मौसम में ठंडक बढ़ते ही शरीर की त्वचा के साथ सिर की त्वचा में भी कई तरह के बदलाव आने लगते हैं। इस दौरान सिर में रूखापन आने से रूसी यानी डैंड्रफ की शिकायत बहुत सामान्य हो जाती है। बालों की जड़ों में सफेद रंग की पपड़ी जमना, लगातार खुजली चलना और कंधों या कपड़ों पर रूसी के कण गिरना लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाता है। इस समस्या के कारण कई बार बाल तेजी से टूटने और झड़ने भी लगते हैं। बहुत से लोग रूसी से निजात पाने के लिए बाजार में मिलने वाले महंगे शैंपू और केमिकल युक्त हेयर प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, मगर अक्सर उनसे अपेक्षित राहत नहीं मिल पाती। रामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल के अनुसार, सर्दियों में सिर की त्वचा का संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ पारंपरिक और आसान घरेलू उपाय बेहद असरदार साबित हो सकते हैं।
ठंड के दिनों में सिर की त्वचा में क्यों बढ़ता है रूखापन
सर्दियों के मौसम में तापमान में गिरावट और शुष्क हवा के चलते त्वचा की प्राकृतिक नमी तेजी से घटने लगती है। सिर की त्वचा यानी स्कैल्प जब पूरी तरह सूख जाती है, तो वहां मृत कोशिकाओं की परत बनने लगती है, जो पपड़ी के रूप में बाहर आती है। डॉ. मोहम्मद इकबाल स्पष्ट करते हैं कि सिर में रूखेपन के कारण ही डैंड्रफ और तेज खुजली की समस्या पैर पसारती है। ऐसी स्थिति में अगर स्कैल्प की नियमित देखभाल न की जाए, तो बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं। इसलिए इस मौसम में सिर की त्वचा को पर्याप्त पोषण और नमी देना सबसे पहली जरूरत बन जाती है।
सरसों और नारियल के हल्के गुनगुने तेल से करें पोषण
रूसी से राहत पाने के लिए घर में आसानी से उपलब्ध सरसों या नारियल के तेल का प्रयोग बेहद मुफीद माना गया है। इसके लिए तेल को हल्का गुनगुना कर लेना चाहिए। इसके बाद उंगलियों के पोरों की मदद से सिर की त्वचा पर हल्के हाथों से गोलाई में मालिश करनी चाहिए। सप्ताह में दो बार यह प्रक्रिया दोहराना फायदेमंद रहता है। इससे स्कैल्प को जरूरी नमी हासिल होती है और रूखापन खत्म होने लगता है। तेल का इस्तेमाल करते समय यह सावधानी बरतनी जरूरी है कि तेल जरूरत से ज्यादा गर्म न हो। साथ ही मालिश करते वक्त सिर की त्वचा को जोर से रगड़ने या नाखूनों से खरोंचने से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा छिल सकती है।
बालों की गहरी सफाई के लिए आंवला और रीठा का प्राकृतिक पेस्ट
यदि नियमित रूप से तेल लगाने के बावजूद रूसी की परत कम नहीं हो रही है, तो आंवला और रीठा का पारंपरिक मिश्रण उपयोगी साबित होता है। डॉ. मोहम्मद इकबाल के मुताबिक, आंवला और रीठा को बारीक पीसकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जा सकता है, जिसे प्राकृतिक शैंपू की तरह सिर पर लगाना चाहिए। इस पेस्ट को बालों और जड़ों में अच्छी तरह लगाने के बाद कुछ देर के लिए छोड़ दें। इसके पश्चात सिर को साफ और ताजे पानी से धो लें। यह प्राकृतिक उपाय बालों की जड़ों में जमी जिद्दी पपड़ी को हटाकर स्कैल्प की गहराई से सफाई करने में मदद करता है और किसी तरह का रासायनिक नुकसान भी नहीं पहुंचाता।
बाल धोने के दौरान इन सामान्य गलतियों से बचें
सर्दियों में ठंड से बचने के चक्कर में अक्सर लोग अत्यधिक गर्म पानी से सिर धो लेते हैं। बहुत ज्यादा गर्म पानी सिर की त्वचा से बची-खुची नमी भी छीन लेता है, जिससे स्कैल्प और अधिक रूखी हो जाती है और डैंड्रफ की समस्या विकराल रूप ले लेती है। इससे बचने के लिए हमेशा हल्के गुनगुने पानी से ही बाल धोने चाहिए। बालों की स्वच्छता के साथ अपनी व्यक्तिगत कंघी और तौलिये को भी नियमित साफ रखना बेहद जरूरी है। इसके अतिरिक्त, बाल धोने के तुरंत बाद गीले बालों को बांधने की गलती बिल्कुल न करें। सिर की स्वच्छता बरकरार रखने के लिए हफ्ते में दो से तीन बार बालों को धोना उपयुक्त रहता है।
समस्या गंभीर होने पर विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी
अगर सिर में असहनीय खुजली बनी रहे, पपड़ी का जमाव सामान्य से बहुत ज्यादा हो या तमाम घरेलू नुस्खे आजमाने के बाद भी रूसी पर कोई असर न दिखे, तो बिना देर किए चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। कई बार डैंड्रफ का कारण सिर की त्वचा से जुड़े अन्य रोग या फंगल संक्रमण भी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बिना चिकित्सीय सलाह के बालों में कोई भी नया उत्पाद या लेप लगाने से परहेज करना चाहिए ताकि समस्या और न बढ़े।



















