चुनाव आयोग की अंदरूनी प्रक्रिया पर उठे सवाल, शशि थरूर ने दस्तावेजी सबूतों के साथ मांगा 7 बिंदुओं पर जवाबपितृ पक्ष से शरद पूर्णिमा तक अश्विन माह की तिथियां और धार्मिक नियममूलांक 5 अंकज्योतिष 24 सितंबर: रिश्तों में कड़वाहट से बचें, बुध और मूलांक 6 का संयोग देगा समझदारीबेटी राहा की परवरिश पर आलिया भट्ट ने मांगी सलाह, सद्गुरु बोले चिंतित रहने वाले नहीं बन सकते अच्छे माता-पिताबिली जीन किंग कप में अंतिम चार की जंग तेज, इटली और यूक्रेन पर टिकी नजरेंईरान में शासन बदले बिना सुरक्षित नहीं हो सकता भारत-यूरोप कॉरिडोर, जॉन बोल्टन ने ट्रंप की नीति पर उठाए सवालगड्ढों और निकले सरियों वाले नालों से जूझ रहा नॉलेज पार्क-3, एक लाख से ज्यादा छात्रों की सुरक्षा पर संकटमेरठ के एक्सिस बैंक करेंसी चेस्ट में पहुंचे 4.63 लाख रुपये के नकली नोट, 186 शाखाओं की जमा राशि की जांच शुरूकानपुर दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में बेटे सुब्रत की गिरफ्तारी, कॉल रिकॉर्ड और 20 लाख के कर्ज से खुला राजउत्तर भारत से लेकर तटीय इलाकों तक बिगड़ेगा मौसम, भारी बारिश और तेज आंधी की चेतावनी
सतना के रामपुर में 100 साल पुरानी खुरचन की महक, 3 किलोमीटर हाईवे पर 150 दुकानों का मीठा कारोबारजीवनशैली
24 सित॰ 2026, 8:39 am (26 मिनट पहले)· 0

सतना के रामपुर में 100 साल पुरानी खुरचन की महक, 3 किलोमीटर हाईवे पर 150 दुकानों का मीठा कारोबार

मध्य प्रदेश के सतना जिले स्थित रामपुरबघेलन में आजादी से पहले की पारंपरिक मिठाई खुरचन आज भी बेहद लोकप्रिय है। नेशनल हाईवे किनारे तीन किलोमीटर में फैली 150 से अधिक दुकानों से यह स्वाद विदेशों तक पहुंच रहा है।

मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित रामपुरबघेलन की सड़कों से गुजरने वाले हर मुसाफिर को एक खास सोंधी महक बरबस अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। यह खुशबू शुद्ध दूध से तैयार होने वाली मशहूर पारंपरिक मिठाई खुरचन की है। रामपुर इलाके में यह केवल एक मिष्ठान नहीं, बल्कि एक सदी से भी ज्यादा पुरानी समृद्ध पाक परंपरा की जीवंत पहचान बन चुकी है। धीमी आंच पर कड़ाहियों में उबलते दूध की मलाईदार परतों से तैयार होने वाला यह स्वाद आज स्थानीय गलियारों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा चुका है।

नेशनल हाईवे पर फैला 3 किलोमीटर लंबा अनोखा बाजार

रामपुरबघेलन से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे के किनारे लगभग 3 किलोमीटर के दायरे में खुरचन का एक पूरा बाजार विकसित हो चुका है। आजादी से पहले शुरू हुए इस कारोबार की महक आज भी वैसी ही बरकरार है। वर्तमान समय में इस राजमार्ग के दोनों तरफ करीब 150 दुकानें कतारबद्ध तरीके से सजी हुई हैं। इन दुकानों पर दिन-रात खुरचन तैयार की जाती है और आने-जाने वाले यात्री यहां रुककर इस पारंपरिक स्वाद का आनंद लेते हैं। सड़क किनारे सजी इन दुकानों के चलते यह पूरा इलाका खुरचन मार्केट के नाम से अपनी पहचान बना चुका है।

ये भी पढ़ें

तीन पीढ़ियों का तजुर्बा और टीन शेड की छोटी दुकान

रामपुरबघेलन क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम नेमुआ वार्ड नंबर 5 के निवासी कमलेश पांडे इस पुश्तैनी मिठाई निर्माण के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। वह पिछले 40 से भी अधिक वर्षों से लगातार खुरचन बनाने और बेचने का काम कर रहे हैं। कमलेश पांडे अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं, जो इस पारंपरिक कारोबार को पूरी निष्ठा से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने खुरचन तैयार करने का यह हुनर सीधे अपने माता-पिता से सीखा था।

अपने काम के शुरुआती दिनों में कमलेश पांडे ने एक पक्का ढाबा स्थापित करके खुरचन बेचना शुरू किया था। समय बीतने के साथ उन्होंने भी हाईवे पर अन्य स्थानीय कारीगरों की तरह एक टीन शेड वाली दुकान बना ली। आज वह अपनी उसी ग्रामीण टीन शेड की दुकान पर बैठकर प्रतिदिन कम से कम 5 से 10 किलो खुरचन आसानी से बेच लेते हैं। इसके अतिरिक्त शादी-ब्याह और अन्य आयोजनों के लिए मिलने वाले विशेष आर्डर की आपूर्ति अलग से की जाती है। कमलेश पांडे द्वारा बनाई गई खुरचन का स्वाद अमेरिका तक पहुंचता है, जबकि पूरे रामपुर बाजार से यह मिठाई भारत के विभिन्न राज्यों समेत दुनिया के कई मुल्कों में भेजी जाती है।

धीमी आंच पर कड़ाहियों में दूध की मलाई कुरेदने की विधि

खुरचन तैयार करने की पूरी विधि बेहद धैर्य और पारंपरिक कारीगरी पर आधारित है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक कतार में 6 कड़ाहियों को एक साथ भट्टी की धीमी आंच पर रखा जाता है। इसके बाद प्रत्येक कड़ाही के अंदर एक-एक पाव शुद्ध दूध डाला जाता है। जैसे-जैसे धीमी आंच पर दूध खौलता है, उसकी ऊपरी सतह पर मलाई की गाढ़ी परत जमने लगती है।

कारीगर बड़ी कुशलता से उस मलाईदार परत को कड़ाही के भीतरी किनारों पर चिपकाते चले जाते हैं। जब किनारों पर पर्याप्त मलाई एकत्र हो जाती है, तब खुरचनी नामक विशेष औजार की मदद से उसे कुरेदकर अलग कर लिया जाता है। कुरेदी गई इस मलाई में हल्की शक्कर मिलाई जाती है। इस प्रक्रिया को कड़ाही में बार-बार दोहराया जाता है, जिसमें मलाई की नई परतों को खुरच-खुरचकर एक के ऊपर एक सलीके से रखा जाता है और बीच-बीच में शक्कर का छिड़काव किया जाता है।

रोल और चौकोर टुकड़ों में बिक्री, जानें दोनों के दाम

बाजार में खुरचन मुख्य रूप से दो अलग-अलग स्वरूपों में ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराई जाती है, जिनकी कीमतें भी उनकी बनावट के आधार पर तय हैं

  • रोल वाली खुरचन: इस किस्म को तैयार करने के लिए मलाई की सभी परतों को एक साथ सहेजकर बेलनाकार रोल का आकार दिया जाता है। बाजार में रोल वाली खुरचन की कीमत 600 रुपये प्रति किलो है।
  • पीसेस वाली खुरचन: इस प्रकार में मलाई की तहों को एक के ऊपर एक जमाकर चौकोर टुकड़ों में काटा जाता है। यह पीसेस वाली खुरचन 400 रुपये प्रति किलो के भाव से बेची जाती है।

महीने में 60 हजार की आय और करोड़ों का ग्रामीण व्यापार

खुरचन का यह पुश्तैनी काम सतना जिले के रामपुरबघेलन इलाके की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बन चुका है। हाईवे पर स्थित हर छोटी और मझोली दुकान प्रतिदिन औसतन 5 किलो खुरचन आसानी से बेच लेती है। इस सामान्य दैनिक बिक्री से एक साधारण दुकानदार को हर महीने करीब 60,000 रुपये तक की आमदनी हो जाती है। वहीं क्षेत्र के कई बड़े व्यापारियों का वार्षिक कारोबार करोड़ों रुपये के स्तर को पार कर चुका है।

रामपुर और उसके आसपास के गांवों के 150 से अधिक परिवार प्रत्यक्ष रूप से इस मिठाई निर्माण और बिक्री से जुड़े हैं। पूरे क्षेत्र में हजारों लोगों की आजीविका इसी कारोबार पर निर्भर करती है। लगातार बढ़ती मांग के कारण स्थानीय डेयरी उद्योग भी तेजी से फल-फूल रहा है, जिससे पशुपालकों और दूध उत्पादक किसानों को भी नियमित आर्थिक संबल मिल रहा है।

सवाल-जवाब

मध्य प्रदेश के रामपुर में खुरचन का बाजार कितना पुराना है?
रामपुरबघेलन में खुरचन बनाने की यह परंपरा 100 साल से भी अधिक पुरानी है, जो देश की आजादी के पहले से चली आ रही है।
रामपुर में खुरचन की कितनी दुकानें हैं और यह बाजार कहां फैला है?
यह बाजार नेशनल हाईवे पर लगभग 3 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है, जहां करीब 150 दुकानें सजी हुई हैं।
खुरचन बनाने की पारंपरिक विधि क्या है?
धीमी आंच पर रखी 6 कड़ाहियों में एक-एक पाव दूध डालकर खौलाया जाता है, फिर किनारों पर जमने वाली मलाई को खुरचनी से कुरेदकर हल्की शक्कर के साथ परतों में जमाया जाता है।
बाजार में खुरचन के कौन से प्रकार मिलते हैं और उनके दाम क्या हैं?
बाजार में रोल वाली खुरचन 600 रुपये प्रति किलो और चौकोर टुकड़ों (पीसेस) वाली खुरचन 400 रुपये प्रति किलो के भाव से मिलती है।
कमलेश पांडे कौन हैं और इस कारोबार में उनका कितना अनुभव है?
कमलेश पांडे ग्राम नेमुआ वार्ड नंबर 5 के निवासी हैं, जो अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी के रूप में पिछले 40 से अधिक वर्षों से खुरचन बना रहे हैं।
खुरचन की दुकान से एक साधारण दुकानदार को हर महीने कितनी कमाई हो जाती है?
रोजाना कम से कम 5 किलो खुरचन बेचने वाली छोटी या मझोली दुकान से महीने में 60 हजार रुपये तक की कमाई आसानी से हो जाती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp