झारखंड की राजधानी रांची के सहजानंद चौक पर इन दिनों एक छोटा सा वैन और तंबू नुमा फूड स्टॉल शहर के खान-पान के शौकीनों के बीच चर्चा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। कभी ठेकेदारी करने वाले बाबू भाई का यह मिनी रेस्टोरेंट आज अपने तीखे और अनोखे जायके के दम पर भारी भीड़ खींच रहा है। लोग शहर के विभिन्न कोनों और 20 से 25 किलोमीटर दूर तक का सफर तय करके केवल यहां के चाइनीज व्यंजनों का स्वाद चखने पहुंच रहे हैं। एक छोटे से सेटअप में संचालित होने के बावजूद इस स्टॉल पर मेन्यू में 50 से भी ज्यादा तरह के लजीज आइटम्स ग्राहकों को परोसे जाते हैं।
ठेकेदारी से खान-पान के कारोबार तक का सफर
बाबू भाई बताते हैं कि लगभग 10 साल पहले वह ठेकेदारी का कामकाज संभालते थे। हालांकि, उनका असली रुझान और दिलचस्पी हमेशा से ही चाइनीज डिशेज बनाने और नए प्रयोग करने में थी। जब भी उन्हें फुर्सत मिलती थी, वह तरह-तरह के पकवान तैयार किया करते थे। उनका बनाया खाना जब परिचितों और दोस्तों ने चखा, तो सभी ने लगातार यही सलाह दी कि उन्हें खान-पान का अपना खुद का आउटलेट शुरू करना चाहिए क्योंकि उनका बनाया खाना बाजार में बहुत पसंद किया जाएगा। अपनों के बार-बार मिले प्रोत्साहन और भरोसे के बाद उन्होंने जोखिम उठाने का फैसला किया और अपना छोटा सा फूड स्टॉल शुरू कर दिया।
नेपाली युवक के सीक्रेट मसालों ने बदली दुकान की किस्मत
शुरुआती दौर में जब बाबू भाई ने यह फूड स्टॉल खोला था, तब एक नेपाली युवक उनके संपर्क में आया। उसने बाबू भाई को कुछ खास सीक्रेट मसालों के इस्तेमाल और चाइनीज खाना पकाने के अनूठे तरीकों की जानकारी दी। यह तरीका और रेसिपी पारंपरिक तौर-तरीकों से बिल्कुल अलग और बेहद असरदार साबित हुआ। उसी रेसिपी को अपनाने के बाद बाबू भाई के चाइनीज व्यंजनों का स्वाद अचानक से निखर गया और दुकान देखते ही देखते शहर भर में मशहूर हो गई। आज इस आउटलेट पर शंघाई डिशेज से लेकर चिकन राइस, चिकन रोल, चिकन सूप, चिकन चाऊमीन और पास्ता जैसे दर्जनों आइटम तैयार किए जाते हैं, और सबसे खास बात यह है कि लगभग हर मुख्य व्यंजन में ग्राहकों को कम से कम पांच-पांच अलग वैरायटी उपलब्ध कराई जाती हैं।
क्वालिटी और किफायती दामों का संतुलन
बाबू भाई का कहना है कि उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह खाने की शुद्धता, मेहनत और सही सामग्री का चुनाव है। वे अपनी रसोई में तेल से लेकर मसालों तक हर चीज ओरिजिनल और बेहतरीन गुणवत्ता की इस्तेमाल करते हैं, जिसे कोई भी ग्राहक खुद रसोई में आकर देख सकता है। इसके साथ ही आम जनता की जेब का ख्याल रखते हुए मेन्यू के दाम बेहद किफायती रखे गए हैं। यहां चाऊमीन की शुरुआत महज 50 रुपये से हो जाती है, जबकि सबसे महंगा आइटम पनीर चिल्ली है जिसकी कीमत 160 रुपये रखी गई है। 10 से ज्यादा साल बीत जाने के बाद भी यहां का क्रेज जस का तस बना हुआ है।

















