नेपाल की त्रिशूली नदी में आई भीषण बाढ़ और जलप्रलय के तेज बहाव ने भारी तबाही मचाई, जिसके चलते कई लोग बेघर हो गए। पानी का प्रवाह इतना विकराल था कि आसपास बनी दो मंजिला और तीन मंजिला पक्की इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढहकर बह गईं। इस भयावह विनाश के बीच एक अकेले मकान का दृश्य सामने आया, जो अपनी जगह पर मजबूती से अडिग रहा और उसे रत्ती भर भी क्षति नहीं पहुंची। तेज लहरों के थपेड़े सहने के बावजूद इस ढांचे के सुरक्षित खड़े रहने और उसमें मौजूद लोगों की जान बच जाने के बाद हर कोई इसकी निर्माण तकनीक को लेकर हैरान है।
बाढ़ में मिट्टी बहने के बाद नजर आई क्रॉस कॉलम संरचना
इस अनूठे निर्माण पर तकनीकी विश्लेषण साझा करते हुए दरभंगा के इंजीनियर राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि चर्चा का केंद्र बनी इस इमारत का ढांचा क्रॉस कॉलम प्रणाली पर तैयार किया गया था। जब नदी के उफान ने इमारत के निचले हिस्से की मिट्टी पूरी तरह बहा दी, तब बेसमेंट के नीचे का क्रॉस कॉलम ढांचा साफ तौर पर बाहर दिखाई देने लगा। आमतौर पर पारंपरिक पिलर केवल सीधा वजन संभालते हैं, लेकिन क्रॉस कॉलम संरचना पानी के तेज पार्श्व दबाव को चारों तरफ समान रूप से बांट देती है, जिससे मुख्य स्तंभ अपनी जगह पर स्थिर बने रहते हैं।
पाइल फाउंडेशन और डायगोनल फोर्स को साधने वाले क्रॉस बीम का कमाल
इंजीनियर राजेश कुमार के अनुसार, इस पूरे निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी उसका पाइल फाउंडेशन था। सामान्य सतही नींव के विपरीत पाइल फाउंडेशन जमीन के भीतर गहराई में मौजूद सख्त चट्टानों या कठोर सतह तक जाता है। इसके अलावा ढांचे के अंदर विकर्ण बल यानी डायगोनल फोर्स को संतुलित करने के लिए विशेष क्रॉस बीम जोड़े गए थे। चारों कोनों पर खड़े पिलरों के बीच जब क्रॉस संरचना दी जाती है, तो वह पूरे भवन को एक एकीकृत पिंजरे जैसी मजबूती प्रदान करती है।
आपदा की स्थिति में पानी की लहरों और हवा के दबाव से जो तिरछा या विकर्ण बल पैदा होता है, वह साधारण इमारतों को हिला देता है। हालांकि इस घर में क्रॉस बीम मौजूद होने की वजह से वह अतिरिक्त दबाव सीधे ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचा सका। क्रॉस बीम ने पूरे ढांचे को आपसी खिंचाव और सहारे से बांधे रखा, जिसके परिणामस्वरूप नींव के नीचे से मिट्टी हट जाने के बावजूद मकान बिना झुके सुरक्षित खड़ा रहा।
नदी तट और संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण के जरूरी नियम
नदी के किनारों अथवा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवासीय निर्माण करने वाले लोगों को सलाह देते हुए इंजीनियर राजेश कुमार ने कुछ ठोस तकनीकी उपाय अपनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील इलाकों में नींव की गहराई सामान्य मकानों की तुलना में कम से कम 1.5 गुना अधिक रखी जानी चाहिए। इसके साथ ही पाइल फाउंडेशन तकनीक का अनिवार्य चयन होना चाहिए। नींव के साथ-साथ पिलरों में क्रॉस ब्रेसिंग तकनीक का प्रयोग करना बेहद आवश्यक है, ताकि प्राकृतिक आपदा, तेज जलप्रवाह अथवा भूकटाव के दौरान भी संरचना सुरक्षित और अडिग बनी रहे।


















