पवित्र सावन मास की शुरुआत के साथ ही देवाधिदेव महादेव की आराधना की तैयारियां हर घर में जोर-शोर से शुरू हो जाती हैं। इस दौरान बेलपत्र, आक के पुष्प, गंगाजल और धतूरे जैसी पूजन सामग्री की मांग में भी काफी तेजी आ जाती है। कई श्रद्धालु हर सोमवार या विशेष पर्वों पर धतूरा खरीदने के वास्ते बाजारों का रुख करते हैं। हालांकि यदि यही विशेष पौधा आपके घर के आंगन, छत या बालकनी में ही लहलहा उठे, तो पूजन की व्यवस्था काफी सुगम हो जाती है। सबसे अच्छी बात यह है कि धतूरे के पौधे को बहुत अधिक देखरेख की आवश्यकता नहीं होती है। उचित आकार का गमला, उपयुक्त मिट्टी और थोड़ी सी नियमित देखभाल से यह बहुत तेजी से विकसित होता है। यदि आप भी इस सावन भगवान शिव की पूजा के लिए घर पर ही धतूरा उगाने की योजना बना रहे हैं, तो इसकी पूरी विधि और जरूरी सावधानियों के बारे में विस्तार से जान लेना चाहिए।
धतूरे के विकास के लिए सही गमले का चुनाव क्यों है आवश्यक?
धतूरे के पौधे की जड़ें काफी मजबूत और गहरी होती हैं, इसलिए इसे फैलने के लिए पर्याप्त स्पेस की जरूरत पड़ती है। इसके वास्ते कम से कम 12 से 15 इंच गहरे गमले का चयन करना चाहिए। यदि आपके घर में कोई पुरानी प्लास्टिक की बाल्टी या बड़ा ड्रम बेकार पड़ा है, तो उसका उपयोग भी किया जा सकता है। बस इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बर्तन की तली में जल निकासी के लिए उचित छेद अवश्य बने हों। इससे अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल जाता है और जड़ों में सड़न की समस्या पैदा नहीं होती है।
कैसी मिट्टी तैयार करें?
धतूरा ऐसे माध्यम में उत्तम रूप से पनपता है जहां जल भराव की स्थिति न बने। इसके लिए 50 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत अच्छी तरह से विघटित गोबर की खाद या कम्पोस्ट और 20 प्रतिशत रेत अथवा कोकोपीट को आपस में अच्छी तरह मिला लें। इस तैयार मिश्रण को गमले के अंदर भर दें। यह मिट्टी न केवल पौधे को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती है बल्कि जड़ों तक वायु का संचार भी सुचारू रूप से बनाए रखती है।
बीज से लगाएं या पौधे से?
यदि आपके पास धतूरे के बीज उपलब्ध हैं, तो उन्हें लगभग 1 से 2 सेंटीमीटर की गहराई में मिट्टी के भीतर बोएं और ऊपर से हल्का सा पानी छिड़क दें। कुछ ही दिनों में बीज अंकुरित होकर बाहर आने लगते हैं। वहीं दूसरी तरफ, यदि आप किसी नर्सरी से छोटा पौधा खरीदकर ला रहे हैं, तो उसे बेहद सावधानी के साथ गमले में रोपित करें। मिट्टी को अपने हाथों से हल्के दबाव के साथ थपथपाएं ताकि पौधा मजबूती के साथ खड़ा रह सके। शुरुआती कुछ दिनों तक पौधे को तेज धूप से बचाकर रखने से यह अपने नए परिवेश में बहुत जल्दी ढल जाता है।
सिंचाई और धूप का रखें उचित ध्यान
धतूरे के इस पौधे को प्रतिदिन लगभग 5 से 6 घंटे की भरपूर धूप मिलना बहुत जरूरी है। इसलिए इसे ऐसी जगह पर स्थापित करें जहां सुबह से लेकर दिनभर की पर्याप्त धूप आती रहे। पानी तभी डालें जब आपको ऊपरी परत की मिट्टी सूखी हुई महसूस हो। कई लोग प्रतिदिन नियमित रूप से पानी डाल देते हैं, जिसकी वजह से जड़ें सड़ने लगती हैं। विशेष तौर पर बरसात के मौसम में मिट्टी की नमी की जांच करने के बाद ही सिंचाई का निर्णय लें।
हर 20 से 25 दिन के अंतराल पर पौधे की जड़ों में वर्मीकम्पोस्ट या जैविक खाद डालना पूरी तरह पर्याप्त रहता है। इससे पौधा स्वस्थ बना रहता है और उस पर अधिकतम संख्या में फूल और फल खिलते हैं। यदि समय-समय पर पौधे की सूखी पत्तियों और कमजोर शाखाओं की छटाई कर दी जाए, तो नई शाखाएं बहुत तेजी से बाहर निकलती हैं। यही कारण है कि अनुभवी बागवानी प्रेमी नियमित रूप से प्रूनिंग करने की सलाह देते हैं।
जो लोग निरंतर शिव पूजन में लीन रहते हैं, उनके लिए घर में धतूरे का पौधा होना बेहद सुविधाजनक साबित होता है। इससे बाजार पर उनकी निर्भरता काफी हद तक कम हो जाती है और आवश्यकता पड़ने पर ताजे पुष्प तुरंत मिल जाते हैं। इसके अतिरिक्त घर की सुंदरता और हरियाली में भी इजाफा होता है, और गार्डनिंग का शौक रखने वालों के लिए यह एक बेहद सरल पौधा माना जाता है.
धतूरे की देखभाल करते समय कौन सी सावधानियां बरतें?
धतूरे को एक विषैला पौधा माना गया है। इसके फल, बीज और अन्य किसी भी हिस्से का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। यदि आपके घर में छोटे बच्चे या फिर पालतू जानवर हैं, तो गमले को हमेशा उनकी पहुंच से सुरक्षित दूरी पर रखें। पौधे की कटाई-छटाई या किसी भी प्रकार की देखभाल करने के बाद अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना अत्यंत आवश्यक है। यदि अनजाने में पौधे का कोई भाग मुंह के भीतर चला जाए या किसी प्रकार की शारीरिक असुविधा महसूस होने लगे, तो बिना देर किए तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें।



















