वापसी से पहले सक्रिय हुआ मानसून, कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनीजालोर के खेतों से 15 मुल्कों तक पहुंचा किनोवा, 3500 टन पहुंचा सालाना कारोबारजमशेदपुर की चाय वाली गली में सिर्फ 10 रुपये से शुरू होते हैं कुल्हड़ और चॉकलेट चाय के अनोखे स्वादचाणक्यपुरी के उत्तर प्रदेश भवन में लीजिए पारंपरिक भोजन का आनंद, सुबह के नाश्ते से रात के डिनर तक का पूरा मेन्यू और खर्चजयपुर ग्रामीण में रायथल-बासड़ी मार्ग का कायाकल्प शुरू, 5.25 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी पक्की सड़कसोनीपत में एसटीएफ की घेराबंदी देख टोल मैनेजर हत्याकांड का आरोपी फ्लाईओवर से नीचे कूदा, साथी भी दबोचा गयात्योहारी मांग से चमकेगा रोजगार बाजार, गिग और सीजनल सेक्टर में खुलेंगे 2.5 लाख अवसरउत्तराखंड में कमजोर पड़ा मॉनसून, पांच पहाड़ी जिलों में हल्की बौछारें और मैदानों में खिली रहेगी धूपचीन की अगली पीढ़ी की बुलेट ट्रेन ने पूरा किया 6 लाख किलोमीटर का परीक्षण, 400 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी सीआर450गोभी की बंपर पैदावार चाहिए तो न करें ये गलतियां, जुताई से लेकर कटाई तक अपनाएं ये नियम
बस्तर में मॉनसून के दौरान बिना तेल के पकती है करमत्ता भाजी, सेहत के लिए मानी जाती है गुणकारीजीवनशैली
20 सित॰ 2026, 8:16 am (21 मिनट पहले)· 0

बस्तर में मॉनसून के दौरान बिना तेल के पकती है करमत्ता भाजी, सेहत के लिए मानी जाती है गुणकारी

बस्तर के ग्रामीण अंचलों में बारिश के मौसम में उगाई जाने वाली करमत्ता भाजी को बिना तेल के बेहद सादे मसालों में तैयार किया जाता है, जो पाचन और सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में बारिश के दिनों में उगाई जाने वाली करमत्ता भाजी स्थानीय खानपान का एक अहम हिस्सा है। ग्रामीण इलाकों में इस हरी पत्तेदार सब्जी को पकाने का पारंपरिक तरीका काफी अनूठा है, क्योंकि इसे तैयार करने में बिल्कुल भी तेल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। बिना तेल के तैयार होने के कारण यह डिश बेहद सुपाच्य रहती है और पाचन तंत्र पर भारी नहीं पड़ती। स्थानीय लोग इसे स्वास्थ्य के नजरिए से काफी उत्तम और पौष्टिक भोजन मानते हैं, जो पेट के लिए बहुत मुफीद साबित होता है।

सादे मसालों और पारंपरिक विधि का संगम

बस्तर के गांवों में लोग इस भाजी को बहुत ही साधारण सामग्री के साथ तैयार करते हैं। इसमें मुख्य रूप से केवल हल्दी और नमक का उपयोग किया जाता है, जबकि तीखेपन के लिए जरूरत के अनुसार मिर्च मिलाई जाती है। इस प्रकार सीमित मसालों में तैयार यह डिश स्वाद में काफी लजीज लगती है। कम तेल-मसाले के कारण इस पारंपरिक विधि को आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से भी स्वास्थ्यवर्धक माना गया है।

ये भी पढ़ें

यह सब्जी न केवल पौष्टिकता से भरपूर है, बल्कि इसे पकाने में समय भी बेहद कम लगता है। कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाने वाली इस हरी भाजी का स्वाद ऐसा होता है कि लोग इसे बार-बार खाना पसंद करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे ठेठ देसी अंदाज में बनाने के लिए एक तय प्रक्रिया अपनाई जाती है।

सब्जी पकाने के लिए आवश्यक सामग्री

देसी तरीके से करमत्ता भाजी तैयार करने के लिए बहुत सीमित चीजों की जरूरत पड़ती है। इसके लिए मुख्य सामग्री इस प्रकार है

  • 200 ग्राम ताजा कटी हुई करमत्ता भाजी
  • स्वादानुसार नमक
  • एक चौथाई छोटी चम्मच हल्दी पाउडर
  • दो कटे हुए टमाटर
  • दो कली लहसुन

तैयार करने की चरणबद्ध विधि और परोसने का तरीका

इस पौष्टिक सब्जी को बनाने की शुरुआत कड़ाही में आधा गिलास पानी डालकर की जाती है। इस पानी में कटी हुई करमत्ता भाजी डालकर धीमी आंच पर थोड़ी देर उबाला जाता है। जब भाजी हल्की पक जाए, तब इसमें हल्दी और स्वादानुसार नमक मिला दिया जाता है। इसके बाद एक चम्मच की मदद से सामग्री को अच्छी तरह मिलाया जाता है ताकि मसाले भाजी में पूरी तरह समा जाएं।

थोड़ी देर पकने के बाद इसमें दो कटे हुए टमाटर डाले जाते हैं। टमाटर के गलने और भाजी के पूरी तरह नरम होकर पक जाने पर कड़ाही को आंच से नीचे उतार लिया जाता है। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें लहसुन अथवा कटी हुई हरी मिर्च और प्याज का सादा तड़का भी लगाया जा सकता है। बस्तर के ग्रामीण इलाकों में लोग इस बिना तेल वाली पारंपरिक सब्जी को बड़े चाव से खाते हैं और इसे मुख्य रूप से गरमा-गरम रोटी या सादे चावल के साथ परोसा जाता है।

सवाल-जवाब

करमत्ता भाजी की खेती किस मौसम में की जाती है?
करमत्ता भाजी की खेती मुख्य रूप से बरसात के मौसम में की जाती है।
बस्तर में इस भाजी को बिना तेल के क्यों पकाया जाता है?
बिना तेल के पकाने से यह सब्जी बहुत सुपाच्य बनती है और स्वास्थ्य तथा पेट के लिए अत्यधिक फायदेमंद मानी जाती है।
करमत्ता भाजी बनाने के लिए कितनी सामग्री की आवश्यकता होती है?
इसके लिए 200 ग्राम करमत्ता भाजी, स्वादानुसार नमक, 1/4 छोटी चम्मच हल्दी, दो कटे टमाटर और दो कली लहसुन की जरूरत होती है।
इस सब्जी को आमतौर पर किसके साथ परोसा जाता है?
बस्तर के ग्रामीण इलाकों में इसे मुख्य रूप से रोटी या चावल के साथ परोसा जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp