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सितंबर महीने में पौधों की ऐसे करें देखभाल, हरा-भरा और फूलों से महक उठेगा आपका घर का बगीचाजीवनशैली
6 सित॰ 2026, 8:14 pm (23 मिनट पहले)· 3

सितंबर महीने में पौधों की ऐसे करें देखभाल, हरा-भरा और फूलों से महक उठेगा आपका घर का बगीचा

मानसून के बाद मौसम में बदलाव के दौर में पेड़-पौधों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। इस दौरान मिट्टी की गुड़ाई, खाद के इस्तेमाल और पानी के प्रबंधन पर ध्यान देकर गार्डन को हरा-भरा रखा जा सकता है।

सितंबर का महीना मौसम में एक बड़े बदलाव का संकेत लेकर आता है। इस समय मानसून की विदाई शुरू हो जाती है और वातावरण में हल्की ठंडक घुलने लगती है। उमस, बारिश और तापमान के उतार-चढ़ाव का सीधा असर पौधों की सेहत और विकास पर पड़ सकता है। ऐसे में पौधों को स्वस्थ और तरोताजा बनाए रखने के लिए उनकी अतिरिक्त देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है। इस समयावधि के दौरान मिट्टी की नमी, जल निकासी की व्यवस्था, धूप की स्थिति और पोषण का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। इसके साथ ही पौधों पर नजर रखते हुए सूखी और रोगग्रस्त पत्तियों को नियमित अंतराल पर हटाते रहना चाहिए। सितंबर के महीने में कुछ बेहद आसान और बुनियादी बातों को अपनाकर पौधों की सेहत को सुधारा जा सकता है और उनकी अच्छी बढ़वार सुनिश्चित की जा सकती है।

लगातार होने वाली बारिश के कारण गमले की मिट्टी से कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व बह जाते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सितंबर की शुरुआत होते ही सबसे पहले गमलों की ऊपरी मिट्टी की हल्की गुड़ाई कर लेनी चाहिए। इस प्रक्रिया से मिट्टी की कठोरता कम होती है और वह भुरभुरी हो जाती है, जिससे पौधों की जड़ों तक पर्याप्त मात्रा में हवा आसानी से पहुंच पाती है। इसके बाद पौधे की वास्तविक जरूरत को ध्यान में रखते हुए वर्मी कम्पोस्ट या अच्छी तरह से डीकंपोज हो चुकी गोबर की खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। खाद मिलाने के बाद उसे मिट्टी में हल्के हाथों से मिला दें और जरूरत महसूस होने पर ही सिंचाई करें।

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गुड़ाई के तुरंत बाद पौधों को जैविक खाद देना उनके विकास के लिए अत्यधिक लाभदायक साबित होता है। बारिश के मौसम की वजह से मिट्टी अपनी प्राकृतिक उर्वरता खो देती है, इसलिए वर्मी कम्पोस्ट या पुरानी गोबर की खाद पौधों को फिर से ऊर्जा देने का काम करती है। खाद को हमेशा पौधे के मुख्य तने से थोड़ी दूरी पर डालना चाहिए और उसे मिट्टी में अच्छी तरह मिला देना चाहिए। इस प्रक्रिया से मिट्टी की गुणवत्ता और उसका भुरभुरापन बेहतर होता है जिससे पौधों को नया जीवन मिलता है। इसके सकारात्मक प्रभाव से पौधों में नई पत्तियों, मजबूत शाखाओं और सुंदर फूलों का विकास तेजी से होने लगता है।

बरसात के सीजन में पौधों की शाखाएं काफी तेजी से फैलती हैं, जिसके कारण कई बार पौधा जरूरत से ज्यादा बड़ा हो जाता है और उसका मूल आकार बिगड़ जाता है। सितंबर के महीने में पौधों की हल्की छंटाई करना एक बहुत अच्छा फैसला साबित होता है। इस प्रक्रिया के दौरान सभी सूखी, कमजोर, बीमारियों से ग्रस्त और आपस में उलझकर रगड़ खाने वाली शाखाओं को काट कर अलग कर देना चाहिए। आवश्यकतानुसार अत्यधिक लंबी हो चुकी शाखाओं की लगभग तीन से चार इंच तक ट्रिमिंग की जा सकती है। इससे पौधे का आकर्षक आकार बरकरार रहता है और नई शाखाओं के फूटने में भी काफी मदद मिलती है। इसके अलावा पौधे के अंदरूनी हिस्सों तक ताजी हवा और पर्याप्त रोशनी का रास्ता भी आसानी से बन जाता है।

सितंबर माह में हवा के अंदर नमी की अधिकता बने रहने के कारण पौधों पर फंगस और विभिन्न प्रकार के कीटों का हमला होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसलिए इस पूरे महीने पौधों की पत्तियों और तनों का नियमित रूप से निरीक्षण करते रहना बहुत जरूरी होता है। यदि आपको पत्तियों के ऊपर किसी भी प्रकार के काले-पीले धब्बे, सफेद परत, सड़न या मकड़ी के जाले जैसे निशान दिखाई दें, तो तुरंत उस प्रभावित हिस्से को काटकर अलग कर दें। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि गमलों में बारिश का या सिंचाई का अतिरिक्त पानी बिल्कुल जमा न होने पाए और पौधों के बीच थोड़ी दूरी अवश्य रखें ताकि हवा का आवागमन सुचारू रूप से चलता रहे। कीटों से बचाव के लिए जरूरत पड़ने पर नीम के तेल के घोल का इस्तेमाल किया जा सकता है।

फंगस और खतरनाक कीटों से अपने हरे-भरे पौधों की सुरक्षा के लिए सितंबर में लगातार निगरानी करना बेहद आवश्यक है। किसी भी प्रकार की बीमारी से बचाव के लिए हर पंद्रह दिन में एक बार नीम के तेल का छिड़काव करना एक कारगर उपाय माना जाता है। यदि किसी पौधे पर फंगस लगने के शुरुआती लक्षण नजर आने लगें, तो तुरंत पौधे की जरूरत के हिसाब से सही फफूंदनाशक का उपयोग करना चाहिए। किसी भी दवा या स्प्रे का इस्तेमाल करते समय उसके पैकेट या लेबल पर छपे सभी निर्देशों और सही मात्रा का पूरी तरह पालन करना चाहिए। इसके अतिरिक्त गमलों में पानी के ठहराव से बचना बहुत जरूरी है, क्योंकि लगातार अधिक नमी बने रहने से जड़ों में सड़न पैदा हो सकती है और फंगस तेजी से फैल सकती है।

सितंबर में मानसून के जाने के बाद तापमान में गिरावट दर्ज होने लगती है और बारिश के प्रभाव से गमलों की मिट्टी पहले से ही नम रहती है। इसी वजह से इस समय पौधों में बार-बार पानी डालने की गलती करने से बचना चाहिए। सिंचाई करने से पहले हमेशा अपनी उंगली से गमले की ऊपरी मिट्टी को छूकर उसकी नमी की जांच कर लें। अगर मिट्टी अंदर से पहले से ही गीली और नम महसूस हो, तो कुछ दिनों के लिए पानी देना टाल देना चाहिए। जब मिट्टी आपको सूखी दिखाई दे और पौधे को वास्तव में पानी की जरूरत महसूस हो, तभी सुबह के समय हल्की सी सिंचाई करें। गमले में जरूरत से ज्यादा पानी डालने से जलभराव की स्थिति बन जाती है, जो पौधों की जड़ों को सड़ा सकती है और फंगस को बुलावा दे सकती है।

यह महीना अपने घर के गार्डन में नए पेड़-पौधे लगाने के लिए भी सबसे अनुकूल समय माना जाता है। मानसून के थमने के बाद मिट्टी में नमी का स्तर बना रहता है और मौसम का तापमान भी धीरे-धीरे कम होने लगता है। इन अनुकूल परिस्थितियों की वजह से नए पौधों को अपनी जड़ें जमाने में बहुत आसानी होती है। इस समयावधि के दौरान आप अपने बगीचे में गुलाब, गेंदा, सदाबहार, गुड़हल, तुलसी और अन्य कई प्रकार के मौसमी फूलों के पौधे आसानी से लगा सकते हैं। नया पौधा लगाते समय हमेशा ऐसी जगह का चयन करें जहाँ उसे दिनभर में पर्याप्त धूप मिल सके और हवा का बहाव भी बना रहे। गमले के अंदर हमेशा ऐसी उपजाऊ और भुरभुरी मिट्टी का इस्तेमाल करें जिससे अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। पौधा रोपण के बाद आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें और शुरुआती कुछ दिनों तक उसकी मिट्टी की नमी पर लगातार अपनी नजर बनाए रखें।

सवाल-जवाब

सितंबर में पौधों की मिट्टी की गुड़ाई करना क्यों जरूरी है?
बरसात के पानी से मिट्टी के पोषक तत्व बह जाते हैं और मिट्टी कड़ी हो जाती है, इसलिए गुड़ाई करने से जड़ों तक हवा पहुंचती है।
सितंबर महीने में पौधों को कौन सी खाद देनी चाहिए?
इस महीने पौधों की जरूरत के अनुसार वर्मी कम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद देना सबसे फायदेमंद रहता है।
क्या सितंबर में पौधों की छंटाई की जा सकती है?
हां, सितंबर में सूखी, कमजोर और रोगग्रस्त शाखाओं की हल्की छंटाई करने से पौधे का आकार सुधरता है और नई शाखाएं निकलती हैं।
पौधों को फंगस और कीटों से बचाने के लिए क्या उपाय करें?
पौधों को कीटों से बचाने के लिए हर 15 दिन में नीम तेल का छिड़काव करना चाहिए और गमलों में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए।
सितंबर में पौधों में पानी कब और कैसे देना चाहिए?
मिट्टी की ऊपरी परत को छूकर नमी की जांच करें और केवल तभी सुबह के समय हल्की सिंचाई करें जब मिट्टी सूखी लगे।
सितंबर में कौन-से नए पौधे लगाए जा सकते हैं?
इस समय गुलाब, गेंदा, सदाबहार, गुड़हल, तुलसी और अन्य मौसमी फूलों के पौधे सफलता से लगाए जा सकते हैं।
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