त्योहारों के आगमन से पहले लोग अपने घरों के रखरखाव और रंगाई-पुताई की योजना बनाने लगते हैं। घर को नया और आकर्षक लुक देने के साथ-साथ हर किसी की कोशिश यही रहती है कि बजट भी काबू में रहे और काम भी टिकाऊ हो। इस प्रक्रिया में सबसे अहम भूमिका सही समय के चुनाव, मटेरियल के सटीक आकलन और कुशल कारीगरों के चयन की होती है। समय रहते योजना बनाकर काम शुरू करने से न केवल अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है, बल्कि काम की गुणवत्ता भी बेहतर मिलती है।
त्योहार से पहले काम शुरू करने से बचेंगे पैसे
आगरा में पिछले करीब 30 वर्षों से डेंटिंग और पेंटिंग का काम कर रहे अनुभवी पेंटर नरेश राजपूत के अनुसार, पुताई का काम शुरू करने से पहले मौसम की स्थिति और कारीगरों की उपलब्धता का आकलन करना जरूरी है। दीपावली से कुछ समय पहले घर में पेंटिंग का काम कराना काफी किफायती साबित होता है। इस दौरान बाजार में पेंट की कीमतें स्थिर रहती हैं और कारीगरों के मेहनताने की दरें भी अपेक्षाकृत कम होती हैं।
इसके विपरीत, जब दीपावली का पर्व बिल्कुल नजदीक आ जाता है, तो बाजार में मांग बढ़ने की वजह से पेंट और मजदूरी दोनों के रेट में भारी उछाल आ जाता है। इससे घर के मालिकों को उसी काम के लिए काफी अधिक भुगतान करना पड़ता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि अंतिम दिनों की हड़बड़ी से बचते हुए समय से पहले काम पूरा करा लिया जाए।
100 गज के मकान का अनुमानित बजट और खर्च
मकान की रंगाई-पुताई का कुल बजट तय करने के लिए घर का आकार, कमरों की कुल संख्या और दीवारों की मौजूदा स्थिति को देखना आवश्यक होता है। नरेश राजपूत ने एक सामान्य मकान का उदाहरण देते हुए समझाया कि करीब 100 गज के मकान में, जिसमें दो कमरे, एक किचन, लैट्रिन-बाथरूम, स्टोर और लॉबी शामिल हों, डेंट-पेंट कराने का कुल खर्च लगभग 25 से 30 हजार रुपये तक आ सकता है।
इस निर्धारित बजट में मटेरियल की खरीद और कारीगरों की मजदूरी दोनों शामिल हो सकते हैं। इस लागत में मकान के अंदरूनी कमरों के साथ-साथ बाहरी दीवारों पर भी पेंट का काम सुचारू रूप से कराया जा सकता है। दीवारों की प्रारंभिक स्थिति जितनी साफ-सुथरी होगी, अतिरिक्त मरम्मत का खर्च उतना ही कम होगा।
मटेरियल का सटीक अनुमान: 20 किलो की 7 बाल्टी पेंट
काम शुरू कराने से पहले पेंट और अन्य आवश्यक सामान की सही मात्रा तय करना बेहद महत्वपूर्ण कदम है। 100 गज के पूरे मकान के लिए आमतौर पर 20 किलो वाली लगभग 7 बाल्टी पेंट पर्याप्त मानी जाती हैं। यदि दीवारों की बुनियाद मजबूत है और उन पर व्यवस्थित ढंग से पुट्टी, प्राइमर और पेंट की परतें चढ़ाई जाएं, तो इतनी मात्रा में पूरे घर का रूप निखर जाता है।
उच्च गुणवत्ता वाले पेंट और सही रंगों का चयन पुराने मकान को भी बिल्कुल नया जैसा रूप दे देता है। हालांकि, पेंट की वास्तविक खपत पूरी तरह से दीवारों की सतह, उन पर लगाए जाने वाले कोट की संख्या और प्रयुक्त पेंट की क्वालिटी पर भी निर्भर करती है। खुरदरी या सीलन वाली दीवारों पर पेंट की खपत सामान्य से थोड़ी अधिक हो सकती है।
ठेके पर काम सौंपने से मिलती है कई झंझटों से राहत
नरेश राजपूत का मानना है कि घर में पेंट का काम हमेशा किसी अनुभवी और भरोसेमंद कारीगर को ठेके पर देना सबसे बेहतर विकल्प होता है। ठेका प्रणाली अपनाने से मकान मालिक को बार-बार बाजार के चक्कर काटने और छोटे-मोटे सामान जुटाने की परेशानी से मुक्ति मिल जाती है। कारीगर स्वयं काम की जरूरत के अनुसार सारा मटेरियल मंगवाता है और काम को आगे बढ़ाता है।
ठेके पर काम तय होने के बाद कारीगर भी निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा करने की कोशिश करता है। इसके अलावा, पूरे कार्य की एकमुश्त राशि पहले से निश्चित हो जाने के कारण बजट का सटीक अनुमान लगाना आसान हो जाता है, जिससे काम के बीच में अनपेक्षित खर्चों को लेकर होने वाला तनाव पूरी तरह खत्म हो जाता है।
















