अमेरिकी सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में सितंबर के दौरान हल्का सुधार दर्ज किए जाने का अनुमान जताया गया है। व्यापक आर्थिक आंकड़ों से संकेत मिल रहे हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का सेवा क्षेत्र विस्तार के दायरे में मजबूती से टिका हुआ है। वहीं, बीते कुछ कारोबारी सत्रों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और अधिक आक्रामक बढ़ोतरी किए जाने की संभावनाओं पर ब्रेक लगता दिख रहा है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में नई हलचल देखने को मिल रही है।
इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट के सर्विस डेटा पर नजर
सोमवार को 14:00 GMT पर इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट (ISM) द्वारा सितंबर महीने के सर्विस परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के आंकड़े जारी किए जाने हैं। बाजार विश्लेषकों का सर्वसम्मति से अनुमान है कि यह सूचकांक अगस्त के 55.4 से मामूली बढ़कर 55.7 के स्तर पर पहुंच सकता है। यदि यह आंकड़ा अनुमान के अनुरूप रहता है, तो यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े हिस्से में मजबूत लचीलेपन और कारोबारी भरोसे की निरंतरता की पुष्टि करेगा।
अगस्त के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो उस दौरान मिले-जुले संकेत सामने आए थे। रोजगार के मोर्चे पर गति में हल्का सुधार हुआ था और रोजगार सूचकांक 47.4 से बढ़कर 47.8 पर पहुंचा था। इसी तरह, नए ऑर्डर्स के सूचकांक में जोरदार उछाल देखा गया और यह 60.9 पर पहुंच गया, जिसने मांग में निरंतर सुधार के संकेत दिए। हालांकि, इसके साथ ही कीमतों से जुड़ा प्राइसेज पेड इंडेक्स बढ़कर 72.6 के स्तर पर दर्ज किया गया था, जिसने सेवा क्षेत्र में मुद्रास्फीति के दबाव के बने रहने की पुष्टि की थी।
मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर की दिशा
अमेरिका में मुद्रास्फीति अब भी फेडरल रिजर्व के 2% के तय लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है, जिससे केंद्रीय बैंक के नीति निर्माताओं के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके साथ ही पश्चिम एशिया के अनसुलझे संकट और अमेरिकी शुल्कों के व्यापक आर्थिक प्रभावों का पूरी तरह सामने आना अभी बाकी है। इस माहौल में यदि सर्विस पीएमआई उम्मीदों के मुताबिक रहता है, तो अमेरिकी डॉलर (USD) में कोई बहुत बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि यह केवल अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और जिद्दी महंगाई के संतुलन को दर्शाएगा। लेकिन यदि आंकड़े अनुमान से कमजोर आते हैं, तो निवेशकों द्वारा डॉलर की होल्डिंग्स घटाए जाने की संभावना बन सकती है, क्योंकि विकास की गति धीमी पड़ने का डर बढ़ेगा।
विदेशी मुद्रा बाजार और EUR/USD का तकनीकी ढांचा
यूरो और डॉलर (EUR/USD) की जोड़ी हाल के दिनों में मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर फिसल गई है। यह जोड़ी बुधवार को 1.1312 के स्तर तक गिरी और जनवरी के 1.2082 के उच्च स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रही है। यूरो पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती, वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता और यूरोप में ऊर्जा की ऊंची कीमतों का चौतरफा दबाव देखा जा रहा है।
विश्लेषक पियोवानो के तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, यदि स्पॉट 1.1200 के करीब रहता है, तो मंदी के इस रुझान में अगला सपोर्ट 21 मई 2025 के 1.1064 के निचले स्तर पर मिलेगा। इसके नीचे 1.1000 का मनोवैज्ञानिक स्तर और फिर 27 मार्च 2025 का 1.0732 का निचला स्तर आता है। दूसरी ओर, यदि यह जोड़ी 1.1515 से 1.1520 के दायरे को दोबारा हासिल करती है, जहां 55-दिवसीय और 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) स्थित हैं, तो अगला लक्ष्य 200-दिवसीय SMA के पास 1.1610 के आसपास होगा। तकनीकी संकेतकों में रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 17 के करीब रहने से तकनीकी उछाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जबकि 40 के करीब एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) मौजूदा मजबूत ट्रेंड को दर्शाता है।
अन्य वैश्विक मुद्राओं की स्थिति
एशियाई कारोबार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में ताजा बिकवाली देखी गई और यह जोड़ी 0.6900 की ओर गिर गई। डॉलर की नई मजबूती, पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव ने इस पर दबाव बनाया। बाजार की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के रुख पर टिकी है।
वहीं, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) ने अपनी गिरावट को पाटते हुए एशियाई सत्र में 158.00 का स्तर दोबारा छू लिया। फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दर बढ़ोतरी की उम्मीदें कम होने के बावजूद भू-राजनीतिक तनावों ने डॉलर को सहारा दिया। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (BoJ) के सख्त रुख और संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम से इस जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है। क्रिप्टो बाजार में बीएनबी (BNB) लगातार तीन हफ्तों की बढ़त के बाद 790 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा, जहां बढ़ते ओपन इंटरेस्ट और पॉजिटिव फंडिंग रेट्स डेरिवेटिव बाजार में तेजी के संकेत दे रहे हैं।
सोने की कीमतों पर दबाव और जीडीपी का आर्थिक गणित
कमोडिटी बाजार में सोना 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे एक दायरे में फंसा हुआ है। शुक्रवार के कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों को पीछे छोड़ते हुए डॉलर ने अप्रैल 2025 के बाद का नया उच्चतम स्तर छुआ, जिसने सोने की तेजी को सीमित कर दिया। हालांकि, फेड द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें न बढ़ाए जाने की संभावनाओं से सोने की गिरावट भी थमी हुई है।
सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी भी देश की आर्थिक वृद्धि की गति को मापता है। जीडीपी में मजबूती आम तौर पर देश की मुद्रा के लिए सकारात्मक होती है, क्योंकि मजबूत अर्थव्यवस्था में अधिक उत्पादन, निर्यात और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित होता है। जब अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है और जीडीपी बढ़ती है, तो लोग अधिक खर्च करते हैं जिससे मुद्रास्फीति बढ़ती है। केंद्रीय बैंकों को इस मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरें बढ़ानी पड़ती हैं। ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए नकारात्मक साबित होती हैं, क्योंकि इससे नकदी जमा की तुलना में बिना ब्याज वाले सोने को रखने की अवसर लागत (opportunity cost) बढ़ जाती है।























