यूरोपीय सेंट्रल बैंक के नागेल ने मौद्रिक नीति और आर्थिक परिदृश्य पर एक सख्त रुख का संकेत दिया है, जिसमें मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण को लेकर बढ़ते दबावों पर खास जोर दिया गया है। बाजार आधारित दीर्घकालिक संकेतों और विशेषज्ञ अनुमानों के मुताबिक यूरोसिस्टम का 2% मुद्रास्फीति लक्ष्य अपनी जगह बना हुआ है, मगर आने वाले समय में महंगाई के जोखिम काफी प्रबल दिखाई दे रहे हैं। नागेल के अनुसार अनिश्चितता से भरे मौजूदा माहौल में नीतिगत लचीलापन जरूरी है, न कि निष्क्रिय बैठे रहना। इस बयान ने वित्तीय बाजारों में ब्याज दरों में तेजी से कटौती की उम्मीदों को सीमित कर दिया है, जिससे यूरो को सहारा मिलने के आसार बने हैं।
ऊर्जा संकट और खाद्य कीमतों का बढ़ता दबाव
यूरोप के भीतर आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं उभर रही हैं। गैस की कीमतों पर दबाव सबसे अधिक संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि मौजूदा समय में भंडारण का स्तर काफी कम बना हुआ है। यदि सर्दी के मौसम में मांग में भारी उछाल आता है, तो यूरोप को अंतरराष्ट्रीय बाजार से उल्लेखनीय रूप से अधिक मात्रा में गैस खरीदनी पड़ सकती है। इस अतिरिक्त मांग के कारण ऊर्जा लागत में तीव्र उछाल आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
इसके साथ ही रिफाइनिंग क्षमता के नुकसान ने परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के दामों को काफी ऊंचे स्तरों पर पहुंचा दिया है। दूसरी ओर कृषि क्षेत्र में सूखे, जंगलों की आग और उर्वरकों की कमी जैसी विपरीत परिस्थितियों ने खाद्य कीमतों के लिए बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। यह तमाम कारक सम्मिलित रूप से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर नए सिरे से दबाव बनाने की क्षमता रखते हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों के सामने नीतिगत चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।
मजदूरी, बॉन्ड और सोने में विविधीकरण का रुख
नागेल ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि मुद्रास्फीति का प्रभाव अभी तक मूल्य और वेतन निर्धारण में स्पष्ट रूप से परिलक्षित नहीं हुआ है। इस संतुलित टिप्पणी के बावजूद समग्र जोखिमों का झुकाव सख्त मौद्रिक दृष्टिकोण की तरफ ही नजर आता है। इस आर्थिक माहौल के बीच रिजर्व एसेट मैनेजरों के बीच बॉन्ड का सापेक्ष आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है।
इसके अलावा उच्च कर्ज स्तरों से जुड़े क्रेडिट जोखिम और अनवरत भू-राजनीतिक तनावों को देखते हुए सोने में निवेश विविधीकरण का तर्क बेहद मजबूत बना हुआ है। केंद्रीय बैंकों और वैश्विक निवेशकों के लिए सोना संकट के समय में एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में अपनी उपयोगिता बनाए रखे हुए है।
वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर का दबदबा
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की नई मजबूती अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भारी पड़ रही है। मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर सोमवार को देर के एशियाई सत्र में नए सिरे से बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे AUD/USD टूटकर 0.6900 के करीब आ गया। इस जोड़ी में नई दिशा के लिए अब कच्चे तेल के दामों, ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और आरबीए की अपेक्षाओं पर ध्यान केंद्रित है।
दूसरी ओर जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर ने अपनी पिछली गिरावट को पीछे छोड़ते हुए एशियाई सत्र में 158.00 का स्तर दोबारा हासिल कर लिया। USD/JPY पिछले एक हफ्ते के दायरे में घूम रहा है। हालांकि फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि की मंद पड़ती उम्मीदों के बावजूद भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को सहारा दे रही है। इसके उलट बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख की संभावनाओं और संभावित बाजार हस्तक्षेप के जोखिम से इस जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है।
यूरो में ऐतिहासिक गिरावट और सोने की सुस्त चाल
EUR/USD की स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई है और यह मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ चुका है। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 तक लुढ़क गई थी, जो जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यूरो में यह भारी गिरावट अमेरिकी डॉलर की जबर्दस्त मजबूती, यूरोप के ऊर्जा संकट के जोखिमों और भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा परिणाम है।
कमोडिटी बाजार में सोने का दायरा सीमित बना हुआ है और यूरोपीय सत्र की शुरुआत से पहले यह $4,150 से नीचे कारोबार कर रहा था। शुक्रवार के कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों को नजरअंदाज करते हुए डॉलर ने अप्रैल 2025 के बाद का नया उच्चतम स्तर छू लिया, जिसने सोने की तेजी पर रोक लगा दी। हालांकि अक्टूबर में फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की कम होती संभावनाओं ने सोने की गिरावट को थाम रखा है।
क्रिप्टो बाजार और आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़े
डिजिटल परिसंपत्तियों के क्षेत्र में, बीएनबी (पूर्व में बाइनेंस कॉइन) लगातार तीन हफ्तों की बढ़त दर्ज करने के बाद सोमवार को लगभग $790 पर थोड़ा नीचे आ गया। इसके बावजूद डेरिवेटिव्स बाजार में ओपन इंटरेस्ट में बढ़ोतरी और पॉजिटिव फंडिंग रेट्स यह दर्शा रहे हैं कि खरीदारों की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है।
बाजार प्रतिभागियों की निगाहें अब सोमवार को जारी होने वाले अमेरिकी सेवा क्षेत्र के आंकड़ों पर टिकी हैं, जहां इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट अपना सितंबर का गेज पेश करेगा। आम सहमति यह संकेत देती है कि अगस्त के 55.4 के आंकड़े के मुकाबले सितंबर में यह मामूली बढ़कर 55.7 पर पहुंच सकता है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह अमेरिकी सेवा क्षेत्र के लचीलेपन और व्यापक अर्थव्यवस्था के प्रति भरोसे को और पुख्ता करेगा।


















