घर पर बनाएं शादी और ढाबे जैसी गाढ़ी मिक्स वेज, दही और काजू की ग्रेवी से आएगा असली जायकाजीएसटी काउंसिल का बड़ा कदम: टैक्स अधिकारियों के सीधे गिरफ्तारी अधिकार पर रोक और 5 करोड़ रुपये तक की छूट पर मंथनहिमाचल प्रवास पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, सुरक्षा में 600 जवान मुस्तैद और मनाली में व्यापक रूट डायवर्जनबीते कल की घटनाओं पर सट्टा: विवादित सच तय करने के लिए खुला नया प्रेडिक्शन मार्केटअमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती के बीच सोने की रफ्तार थमी, जानिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरगारो हिल्स में पीपुल्स प्लान कैंपेन न होने पर तुरा एमडीसी ने मेघालय के उपमुख्यमंत्री को लिखा पत्रयूरोपीय सेंट्रल बैंक के लेन ने दी धीमी आर्थिक वृद्धि की चेतावनी, वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में दिखा दबावयूरोपीय सेंट्रल बैंक के नागेल ने मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों पर दी चेतावनी, वैश्विक मुद्राओं और जिंस बाजार में तेज हलचलअमेरिकी सर्विस पीएमआई से मजबूत अर्थव्यवस्था के संकेत, सोने और डॉलर में हलचलमल्लिका फतेहपुरिया ने घटाया 35 किलो वजन, साझा किए फिटनेस से जुड़े 35 व्यावहारिक सबक
जीएसटी काउंसिल का बड़ा कदम: टैक्स अधिकारियों के सीधे गिरफ्तारी अधिकार पर रोक और 5 करोड़ रुपये तक की छूट पर मंथनव्यापार
5 अक्तू॰ 2026, 3:29 pm (46 मिनट पहले)· 1

जीएसटी काउंसिल का बड़ा कदम: टैक्स अधिकारियों के सीधे गिरफ्तारी अधिकार पर रोक और 5 करोड़ रुपये तक की छूट पर मंथन

जीएसटी परिषद की 7 अक्टूबर की बैठक में कर अधिकारियों की मनमानी गिरफ्तारी शक्तियों को खत्म करने और अदालती मंजूरी अनिवार्य करने का प्रस्ताव आ सकता है। इसके अलावा आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की आर्थिक सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने की तैयारी है।

देश के अप्रत्यक्ष कर ढांचे को अधिक पारदर्शी और कारोबार के अनुकूल बनाने की दिशा में जीएसटी परिषद एक युगांतरकारी कदम उठाने की तैयारी कर रही है। आगामी 7 अक्टूबर को निर्धारित महत्वपूर्ण बैठक में परिषद टैक्स अधिकारियों के सीधे गिरफ्तारी अधिकारों को वापस लेने और किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने से पहले सक्षम अदालत की पूर्व अनुमति को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव की समीक्षा कर सकती है। इसके साथ ही, कर अपराधों के लिए आपराधिक अभियोजन शुरू करने की न्यूनतम आर्थिक सीमा को मौजूदा 1 करोड़ रुपये से सीधे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस पूरी कवायद का मूल उद्देश्य ईमानदार व्यापारियों को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाना और सामान्य व्याख्यात्मक मतभेदों को आपराधिक मुकदमों में बदलने से रोकना है।

व्याख्यात्मक मतभेदों को आपराधिक दायरे से बाहर रखने की तैयारी

प्रस्तावित व्यापक सुधारों के अंतर्गत अभियोजन नियमों के दायरे को बेहद स्पष्ट और सीमित करने की रूपरेखा तैयार की गई है। अक्सर देखा जाता है कि वस्तुओं या सेवाओं के वर्गीकरण, उनके सही मूल्यांकन अथवा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दावों को लेकर करदाताओं और मूल्यांकन अधिकारियों के बीच कानूनी समझ का अंतर होता है। एक ही कारोबारी लेनदेन की दोनों पक्ष अलग-अलग कानूनी व्याख्या करते हैं, जिसे अब तक कई बार आपराधिक श्रेणी में डाल दिया जाता था। नए नियमों के प्रभावी होने के बाद ऐसे सामान्य कारोबारी विवादों में सीधे फौजदारी मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकेगा। यह नीतिगत बदलाव केंद्र सरकार की नई पीढ़ी के अप्रत्यक्ष कर सुधारों का एक प्रमुख स्तंभ माना जा रहा है।

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अनुपालन लागत में कटौती और सरल प्रशासनिक प्रक्रिया

सितंबर 2025 में जीएसटी दरों के पुनर्गठन और तार्किकीकरण के बाद, सुधारों का यह नया चरण कर प्रशासन को व्यावहारिक बनाने और व्यापारियों की अनुपालन लागत को घटाने पर केंद्रित है। इस व्यापक नीतिगत पैकेज में नए व्यवसायों के लिए जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह सुगम बनाना और लंबित रिफंड को त्वरित गति से जारी करना शामिल है। इसके अलावा, इनपुट टैक्स क्रेडिट के सत्यापन और दावे की व्यवस्था को सरल बनाया जाएगा। साथ ही, कारण बताओ नोटिस जारी करने की कार्यप्रणाली और वित्तीय जुर्माना तय करने के मौजूदा प्रावधानों में युक्तिसंगत संशोधन किए जाएंगे ताकि प्रवर्तन तंत्र अधिक संतुलित और आनुपातिक बन सके।

केंद्रीय कानून की धारा 69 में बदलाव और न्यायिक निगरानी

प्रवर्तन सुधारों का मुख्य आधार केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 69 में प्रस्तावित संशोधन है। वर्तमान कानूनी व्यवस्था के अनुसार, यदि तय कानूनी शर्तें पूरी होती हैं और कुछ निर्दिष्ट अपराधों के पुख्ता आधार मिलते हैं, तो संबंधित कर आयुक्त किसी भी विभागीय अधिकारी को संदिग्ध व्यक्ति को सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार दे सकता है। नए प्रस्ताव के तहत अधिकारियों की इस मनमानी प्रशासनिक शक्ति को समाप्त करने और किसी भी गिरफ्तारी के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट या अदालत की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य करने की योजना है। हालांकि, इस प्रशासनिक बदलाव से सरकार का बकाया राजस्व वसूलने या वित्तीय दंड लगाने का अधिकार किसी भी तरह से कमजोर नहीं होगा।

कंपाउंडिंग व्यवस्था और कर चोरी पर सख्त निगरानी

प्रस्तावित कानूनी ढांचे में विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए कंपाउंडिंग की सुविधा को भी सुदृढ़ किया गया है। इसके तहत संबंधित करदाता निर्धारित बकाया कर, अनिवार्य ब्याज और दंडात्मक शुल्क का विधिवत भुगतान करके आपराधिक कार्रवाई से बच सकता है और मामले का निपटारा करा सकता है। कम कर चुकाने या अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करने के मामलों में विभाग की रिकवरी और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं बदस्तूर जारी रहेंगी। केवल गंभीर, सुनियोजित और जानबूझकर की गई वित्तीय धोखाधड़ी अथवा फर्जीवाड़े के मामलों में ही न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से मुकदमा चलाया जाएगा। यह समग्र कदम आर्थिक तथा नियामकीय चूकों को अपराधमुक्त करने के व्यापक राष्ट्रीय अभियान के सर्वथा अनुकूल है।

सवाल-जवाब

जीएसटी परिषद की बैठक कब आयोजित होने जा रही है?
जीएसटी परिषद की यह अहम बैठक 7 अक्टूबर को आयोजित होने वाली है, जिसमें सुधारों पर फैसला लिया जाएगा।
टैक्स अधिकारियों के गिरफ्तारी अधिकारों में क्या बदलाव प्रस्तावित है?
प्रस्ताव के अनुसार अधिकारियों से सीधी गिरफ्तारी की शक्ति वापस लेकर किसी भी गिरफ्तारी के लिए अदालत की पूर्व मंजूरी अनिवार्य की जाएगी।
आपराधिक अभियोजन की सीमा बढ़ाकर कितनी करने का विचार है?
आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की न्यूनतम सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने पर विचार किया जा रहा है।
केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की किस धारा में संशोधन का प्रस्ताव है?
यह मुख्य संशोधन केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 69 में प्रस्तावित किया गया है, जो गिरफ्तारी शक्तियों से संबंधित है।
क्या इस बदलाव से कर विभाग का वसूली और जुर्माना लगाने का अधिकार छिन जाएगा?
नहीं, अधिकारियों का बकाया टैक्स वसूलने, ब्याज लेने और वित्तीय जुर्माना लगाने का अधिकार पूरी तरह बरकरार रहेगा।
विवादों के निपटारे के लिए कंपाउंडिंग व्यवस्था में क्या प्रावधान है?
कंपाउंडिंग के तहत कारोबारी निर्धारित टैक्स, ब्याज और जुर्माना अदा करके मामले को कानूनी तौर पर निपटा सकते हैं।
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