अपने घर के आंगन, छत या गार्डन में खूबसूरत जलीय पौधे लगाना बहुत से लोगों को पसंद होता है। खासतौर पर कमल और वाटर लिली जैसे पौधे घर की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं, हालांकि कई बार उचित जानकारी न होने की वजह से लोग इनकी सही देखभाल नहीं कर पाते हैं और इनमें फूल नहीं खिल पाते हैं। इस समस्या को आसान बनाने के लिए बोकारो स्थित ठाकुर नर्सरी के विशेषज्ञ अभिषेक ने कमल का पौधा लगाने और उसकी देखभाल से जुड़े कुछ बेहद उपयोगी सुझाव साझा किए हैं, जिन्हें अपनाकर कोई भी अपने घर पर आसानी से कमल के फूल खिला सकता है।
बीज के बजाय कंद का करें चयन
विशेषज्ञों के अनुसार कमल का पौधा उगाने के लिए दो मुख्य माध्यम होते हैं, जिनमें बीज और कंद यानी ट्यूबर दोनों शामिल हैं। हालांकि जो लोग गार्डनिंग की शुरुआत कर रहे हैं, उनके लिए बीज की तुलना में कंद से पौधा लगाना ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है। कमल के बीजों की बाहरी परत बेहद सख्त होती है, जिसकी वजह से उनके अंकुरण में काफी वक्त लग जाता है और यदि सही विधि न पता हो तो पौधा ठीक से विकसित भी नहीं हो पाता है। इसके विपरीत एक स्वस्थ कंद का इस्तेमाल करने से शुरुआती अंकुरण की लंबी प्रक्रिया से छुटकारा मिल जाता है और पौधे का विकास भी तेजी से होता है।
गमले का चुनाव और धूप की जरूरत
कमल का पौधा लगाने के लिए साधारण आकार के गमलों का उपयोग करने से बचना चाहिए। इसके लिए हमेशा ऐसे गहरे और चौड़े टब या बड़े बर्तनों का चुनाव करना चाहिए जिनमें पानी रोकने की अच्छी क्षमता हो। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रकार के बर्तनों के निचले हिस्से में पानी निकासी के लिए कोई छेद नहीं होना चाहिए, ताकि पौधे की जड़ों के आसपास हमेशा पानी भरा रहे। इसके अलावा पौधे को घर में ऐसी जगह रखना बेहद आवश्यक है जहां रोजाना कम से कम छह घंटे की भरपूर सीधी धूप मिल सके, क्योंकि पर्याप्त धूप मिलने से पौधे की ग्रोथ अच्छी होती है और उसमें अधिक फूल खिलते हैं।
मिट्टी तैयार करने और खाद डालने की विधि
कमल के पौधे के लिए प्राकृतिक कीचड़ जैसी भारी मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इसके लिए मिट्टी तैयार करते वक्त आधी यानी पचास प्रतिशत सामान्य मिट्टी और आधी यानी पचास प्रतिशत वर्मी कंपोस्ट खाद को आपस में अच्छी तरह मिला लेना चाहिए। पौधे के बेहतर विकास और फूलों के खिलने के लिए समय पर खाद देना जरूरी होता है, लेकिन इसे बहुत सावधानी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। खाद को सीधे डालने के बजाय एक साफ कपड़े में लपेटकर मिट्टी के करीब एक या दो इंच नीचे दबा देना चाहिए, ताकि पोषक तत्व धीरे-धीरे पानी में घुलें और पौधे की जड़ों को किसी तरह का सीधा नुकसान न पहुंचे।
सर्दियों के मौसम में विशेष देखभाल
साल के ठंडे महीनों यानी सर्दियों के दौरान कमल के पौधों की वृद्धि की गति प्राकृतिक रूप से थोड़ी धीमी हो जाती है। इस समयावधि के दौरान पौधों को अतिरिक्त खाद देने से पूरी तरह बचना चाहिए। कम तापमान की वजह से पौधों की सक्रियता घट जाती है और ऐसे समय में अधिक खाद का प्रयोग करने से पानी की गुणवत्ता खराब हो सकती है, जिससे कंद को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए हमेशा मौसम के मिजाज और पौधे की तत्कालीन स्थिति को परखने के बाद ही उसमें खाद का उपयोग करना चाहिए।
कीटों से बचाव और पानी की स्वच्छता
कई बार कमल के पौधों की चौड़ी पत्तियों पर काले धब्बे, गलन या फंगस जैसी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं, जिन पर समय रहते ध्यान देना बहुत जरूरी होता है। यदि पत्तियां खराब हो रही हैं तो उन्हें तुरंत हाथ से हटा देना चाहिए और पानी के अंदर सड़ रहे पत्तों या अन्य कचरे को बिल्कुल भी इकट्ठा नहीं होने देना चाहिए। इसके अलावा टैंक या पॉट का पानी लंबे समय तक एक ही जगह स्थिर रहने से मच्छरों का खतरा बहुत बढ़ जाता है, इसलिए साफ-सफाई बनाए रखने के लिए समय-समय पर पानी को नियमित रूप से बदलते रहना चाहिए।


















