दशहरे का पर्व आते ही चारों तरफ उल्लास का माहौल बन जाता है और बच्चों के मन में रावण दहन देखने की उत्सुकता सबसे अधिक होती है। अमूमन परिवार बच्चों को रामलीला मैदान या मेलों में ले जाकर विशालकाय पुतलों का दहन दिखाते हैं। इस बार मेले की भीड़ और पटाखों के शोर से इतर यदि आप बच्चों को घर पर ही त्योहार से जुड़ी किसी रचनात्मक गतिविधि में शामिल करें, तो यह उनके लिए बेहद ज्ञानवर्धक और मजेदार अनुभव बन सकता है। अनुपयोगी कार्डबोर्ड, रंगीन कागज, गोंद और सामान्य घरेलू सजावटी सामान की सहायता से बच्चे अपने हाथों से रावण का एक छोटा और सुंदर पुतला तैयार कर सकते हैं। अपने हाथों से कुछ नया गढ़ने की यह प्रक्रिया बच्चों में रचनात्मकता को बढ़ावा देती है और उन्हें हमारी पौराणिक कथाओं तथा परंपराओं से सीधे जोड़ने में मदद करती है।
घर पर छोटा पुतला बनाने के लिए जरूरी सामग्री
बच्चों के साथ किसी भी तरह का क्राफ्ट प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है कि उपयोग में लाई जाने वाली वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित और बच्चों के अनुकूल हों। इस गतिविधि के लिए घर में आसानी से मिलने वाली चीजों का ही चुनाव करना चाहिए ताकि किसी भी तरह की असुविधा न हो।
- कार्डबोर्ड और मोटा चार्ट पेपर: पुतले को मजबूती देने और उसका आधार तैयार करने के लिए पुराने खाली डिब्बों के कार्डबोर्ड या मोटे चार्ट पेपर का इस्तेमाल करें।
- रंगीन कागज और रंग: पुतले के कपड़े, चेहरे और मुकुट को आकर्षक रूप देने के लिए रंगीन शीट, क्रेयॉन अथवा लाल, पीला और काले रंग के पोस्टर रंगों की व्यवस्था करें।
- कागज की खाली ट्यूब या पेपर रोल: पुतले के हाथ, पैर और धड़ का ढांचा खड़ा करने के लिए भारी या नुकीली लकड़ी के बजाय कागज के खाली रोल या अखबार की मुड़ी हुई नलियों का उपयोग करना सबसे सुरक्षित रहता है।
- सुरक्षित कैंची और गोंद: कागज काटने के लिए बच्चों की सुरक्षित प्लास्टिक कैंची चुनें और काटने का काम हमेशा किसी बड़े व्यक्ति की सीधी निगरानी में ही कराएं। पुतले के विभिन्न अंगों को चिपकाने के लिए साधारण पेपर ग्लू या फेविकोल उपयुक्त है।
- सजावटी सामान: रावण के मुकुट, कुंडल और वस्त्रों को सजाने के लिए चमकीले सुनहरे कागज, रंगीन धागे और स्टिकर का प्रयोग किया जा सकता है।
यदि आपके बच्चे काफी छोटे हैं, तो सुरक्षा का विशेष ध्यान रखते हुए पुतले के सभी हिस्सों को केवल कागज, गत्ते और गोंद से ही तैयार करें। इसमें लोहे के तार, नुकीली सींकें, माचिस का मसाला, पटाखे अथवा किसी भी प्रकार के ज्वलनशील रसायन का भूलकर भी इस्तेमाल न करें।
चरणबद्ध तरीके से कैसे तैयार करें रावण का पुतला
घर पर बच्चों के साथ मिलकर रावण का पुतला बनाना बेहद सरल और मनोरंजक है। इस पूरी प्रक्रिया को कुछ आसान चरणों में बांटकर पूरा किया जा सकता है।
1. रावण का चेहरा और मुकुट बनाना
सबसे पहले एक पीले या बादामी चार्ट पेपर पर रावण का मुख्य चेहरा बनाएं। पेंसिल की मदद से बड़ी आंखें, तीखे नैन-नक्श और रौबदार मूंछें बनाएं। इसके बाद बच्चों को इसमें रंग भरने दें। सिर पर एक भव्य मुकुट का आकार बनाकर उसे सुनहरे कागज से सजाएं। बच्चों को रावण के दस सिरों के संदर्भ के बारे में जानकारी देते हुए चार्ट पेपर पर नौ छोटे चेहरे और बनवाएं। इन छोटे चेहरों को मुख्य चेहरे के दोनों तरफ एक कतार में चिपका दें ताकि रावण का पारंपरिक स्वरूप उभर कर सामने आ सके।
2. शरीर का ढांचा और हाथ-पैर जोड़ना
पुतले का धड़ बनाने के लिए किसी कार्डबोर्ड के टुकड़े को गोल मोड़कर बेलनाकार रूप दें या फिर किसी खाली डिब्बे का उपयोग करें। हाथ और पैर बनाने के लिए पेपर रोल का इस्तेमाल करें। जब सभी अंग तैयार हो जाएं, तो गोंद की मदद से सिर, धड़, हाथ और पैर को आपस में मजबूती से जोड़ दें। इस बात का पूरा ध्यान रखें कि पुतले का वजन हल्का हो ताकि वह अपने आधार पर सीधा और संतुलित खड़ा रह सके।
3. आकर्षक परिधान और श्रृंगार
पुतले का बुनियादी ढांचा जुड़ जाने के बाद उसकी वेशभूषा तैयार करने की बारी आती है। कार्डबोर्ड के शरीर पर लाल, नीले या सुनहरे रंगीन कागज चिपकाकर पारंपरिक वस्त्र तैयार करें। मुकुट, बाजूबंद, कमरबंद और गले के हार को अलग-अलग रंगों और चमकीले स्टिकर की मदद से सजाया जा सकता है। बच्चों को अपनी कल्पना के अनुसार नए डिजाइन बनाने की पूरी छूट दें, जिससे उनका आत्मविश्वास और कल्पनाशक्ति दोनों मजबूत होंगे।
4. पुतले को आधार पर टिकाना और सजाना
जब पूरा पुतला सजकर तैयार हो जाए, तो उसे कार्डबोर्ड के एक मजबूत चौकोर टुकड़े पर गोंद की मदद से सीधा खड़ा करके चिपका दें। यदि बच्चे आयु में बहुत छोटे हैं, तो इस सुंदर पुतले को जलाने के बजाय इसे त्योहार के उपलक्ष्य में घर के किसी कोने या स्टडी टेबल पर सजावट के तौर पर रखें। पुतला बनाते समय बच्चों को रामायण की प्रेरणादायक कहानियां सुनाएं, ताकि वे खेल-खेल में सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात कर सकें।
पुतला दहन से जुड़ी जरूरी सावधानियां
रावण दहन के दौरान खुले तौर पर अग्नि का प्रयोग होता है, इसलिए छोटे बच्चों को कभी भी आग के करीब जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। घर के अंदर, बालकोनी में या छत जैसी सीमित जगहों पर पुतला जलाने से आग फैलने, दमघोंटू धुआं उठने और गंभीर रूप से जलने का बड़ा खतरा बना रहता है।
- माचिस और पटाखों से दूरी: बच्चों की पहुंच से माचिस, लाइटर और किसी भी तरह के आतिशबाजी के सामान को पूरी तरह दूर रखें।
- घर के भीतर दहन से बचें: चारदीवारी के भीतर, बरामदे में या छत पर कभी भी पुतला न जलाएं, क्योंकि हवा के हल्के झोंके से भी पर्दों या घरेलू सामान में आग लग सकती है।
- सार्वजनिक आयोजन में सावधानी: यदि बच्चों को रावण दहन दिखाना आवश्यक लगे, तो उन्हें प्रशासन द्वारा अधिकृत किसी बड़े और खुले मैदान में ही लेकर जाएं और किसी भी सूरत में उनका हाथ न छोड़ें।
- सुरक्षा घेरे का सम्मान: दहन स्थल पर सुरक्षा घेरे और आयोजन समिति के निर्देशों का कड़ाई से पालन करें तथा जलते पुतले से हमेशा सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
- कलाकृति का सकारात्मक उपयोग: सबसे बेहतरीन विकल्प यही है कि बच्चों द्वारा मेहनत से बनाई गई इस कलाकृति को जलाने के बजाय त्योहार की रंगत बढ़ाने वाले सजावटी शोपीस के रूप में सुरक्षित रखा जाए।
दशहरे का संदेश और बच्चों के लिए सीख
भारतीय संस्कृति में दशहरे के दिन रावण दहन की परंपरा को हमेशा से अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की शाश्वत विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। रामायण के प्रसंगों के अनुसार, भगवान श्री राम ने अहंकारी लंकापति रावण का वध करके माता सीता को उसके बंधन से मुक्त कराया था। इसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष विजयादशमी के दिन रावण के साथ-साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया जाता है।
बच्चों को इस त्योहार का मर्म समझाते हुए यह स्पष्ट करें कि रावण दहन का वास्तविक उद्देश्य केवल कागज और बांस के पुतलों को जलाना नहीं है। इसका गहरा नैतिक अर्थ अपने भीतर छिपे अहंकार, अत्यधिक क्रोध, लालच, ईर्ष्या और कटु व्यवहार जैसी बुराइयों को पहचानना तथा उन्हें हमेशा के लिए समाप्त करना है। जब बच्चे इस दर्शन को समझेंगे, तो वे दशहरे को महज एक उत्सव या मनोरंजन मानने के बजाय अपने जीवन में विनम्रता, सच बोलने और सही राह चुनने के संकल्प से जोड़ सकेंगे।



















