अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा कूटनीति के मोर्चे पर नई दिल्ली को वाशिंगटन से बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक शासकीय आदेश पर दस्तखत करते हुए रूस से व्यापारिक संबंध रखने वाले देशों पर प्रस्तावित दंडात्मक शुल्कों और पाबंदियों के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पिछले महीने हस्ताक्षरित कानून के तहत कार्रवाई की अंतिम समय सीमा बेहद नजदीक आ चुकी थी। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा वैश्विक हालात में इन शुल्कों से छूट देना खुद अमेरिका के रणनीतिक हित में जरूरी समझा गया है।
राष्ट्रीय हित का हवाला देकर कार्यकारी आदेश जारी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार देर रात इस विशेष छूट से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। फैसले की संवैधानिक औपचारिकता पूरी करते हुए अमेरिकी संसद को इस संबंध में विधिवत पत्र भेजा गया। इस आदेश के तहत ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ग्राहम एक्ट के कड़े प्रावधानों को लागू करने से छूट देना इस समय संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। हालांकि इस राहत के साथ यह बात भी जुड़ी हुई है कि प्रशासन ने इन शुल्कों को हमेशा के लिए समाप्त नहीं किया है, बल्कि केवल वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर स्थगित किया है। आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में राष्ट्रपति इन शुल्कों को दोबारा प्रभावी करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।
18 अक्टूबर की अंतिम समय सीमा और सौ फीसदी शुल्क का खतरा
यह पूरा मामला 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' से जुड़ा है, जिस पर डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने हस्ताक्षर करके उसे कानूनी रूप दिया था। इस कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को कड़े आर्थिक कदम उठाने के लिए केवल 30 दिनों का निश्चित वक्त दिया गया था। इस अवधि के भीतर रूसी कच्चे तेल की सबसे अधिक खरीदारी करने वाले शीर्ष पांच राष्ट्रों के खिलाफ शत-प्रतिशत आयात शुल्क थोपना अनिवार्य किया गया था। इस सूची में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान के नाम शामिल थे।
कानून के तहत निर्धारित यह एक महीने की समय सीमा 18 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी। यदि समय रहते छूट का आदेश जारी नहीं होता, तो इन पांचों देशों से अमेरिका जाने वाले सभी सामानों पर 100 प्रतिशत तक का भारी सीमा शुल्क लग जाता। इसके अतिरिक्त, इस कानून में मॉस्को की कई ऊर्जा संस्थाओं पर सीधी पाबंदियां लगाने तथा रूस से सीधे अमेरिका आने वाले ऊर्जा उत्पादों पर 500 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान भी दर्ज था।
ग्राहम एक्ट का मूल ढांचा और इसके वैश्विक निहितार्थ
लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 को तैयार करने के पीछे अमेरिकी सांसदों का प्राथमिक उद्देश्य यूक्रेन में जारी सैन्य संघर्ष के लिए मॉस्को के वित्तीय स्रोतों को पूरी तरह सुखाना था। इस कानून के माध्यम से रूसी बैंकों, वरिष्ठ अधिकारियों, ऊर्जा कंपनियों और मॉस्को के सैन्य अभियानों में वित्तीय या तकनीकी सहयोग देने वाली विदेशी इकाइयों को कड़े प्रतिबंधों के दायरे में लाया गया था।
इस कानून ने व्हाइट हाउस को यह व्यापक अधिकार सौंप दिया था कि वह मॉस्को के साथ तेल और गैस का व्यापार जारी रखने वाले देशों पर दंडात्मक कार्रवाई कर सके, ताकि रूसी ऊर्जा पर उनकी निर्भरता घटाई जा सके। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनकी सरकार के आला अधिकारियों पर भी सख्त प्रतिबंध शामिल थे। इस कानून के पूर्ण क्रियान्वयन से रूसी ईंधन खरीदने वाले भारत और चीन सहित कुल 10 देशों पर सीधे तौर पर 100 प्रतिशत तक के टैरिफ का गंभीर संकट मंडराने लगा था, जिसे वर्तमान आदेश ने तात्कालिक रूप से टाल दिया है।



















