यूक्रेन टकराव के बाद पश्चिमी ताकतों ने मास्को के ऊर्जा राजस्व को रोकने के लिए कड़े प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में रूसी कच्चे तेल से तैयार ईंधन की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत, तुर्किये और ब्रुनेई जैसे देशों में स्थित रिफाइनरियों ने सितंबर के दौरान पश्चिमी देशों को पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। इस दौरान इन तीनों देशों से पश्चिमी बाजारों को भेजे जाने वाले प्रसंस्कृत तेल उत्पादों का कुल मूल्य 43 प्रतिशत की उछाल के साथ 1 अरब यूरो तक जा पहुंचा, जो अमेरिकी मुद्रा में लगभग 1.2 अरब डॉलर के बराबर बैठता है। यह स्थिति तब सामने आई है जब इन्हीं खरीदार मुल्कों ने रूस के जीवाश्म ईंधनों की सीधी खरीद पर कड़े व्यापारिक अंकुश लगा रखे हैं।
यूरोपीय बंदरगाहों तक भारतीय रिफाइनरी की पहुंच
यूरोपीय संघ के विभिन्न समुद्री टर्मिनलों पर सितंबर के महीने में पहुंचे कुल सात मालवाहक जहाजों में से छह को अकेले गुजरात स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की जामनगर रिफाइनरी ने ईंधन की खेप मुहैया कराई। यह व्यापारिक आवाजाही ऐसे माहौल में दर्ज की गई जब ब्रसेल्स ने रूसी कच्चे तेल के आधार पर तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर औपचारिक रोक लगा रखी है। ऊर्जा प्रवाह के विश्लेषण से पता चलता है कि रूसी मूल के कच्चे माल को तीसरे देशों में परिष्कृत कर यूरोपीय और अमेरिकी बाजारों में बेधड़क खपाया जा रहा है।
सितंबर में यूरोपीय संघ के गंतव्यों के लिए रवाना किए गए ईंधन पोतों में से तीन इटली के बंदरगाहों पर लंगर डालने पहुंचे। इसके अलावा दो पोतों ने रोमानिया के तट पर अपनी खेप उतारी, जबकि स्पेन और साइप्रस के तटों पर एक-एक जहाज पहुंचा। इन खेपों के अतिरिक्त जामनगर रिफाइनरी से निकला 1.04 लाख टन अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल लेकर एक बड़ा टैंकर नीदरलैंड के प्रमुख व्यापारिक केंद्र रॉटरडैम के समुद्री रास्ते पर था। रूसी कच्चे माल को इस्तेमाल करने वाली इन रिफाइनरियों से यूरोपीय संघ के बंदरगाहों के लिए घोषित निर्यात का कुल मूल्यांकन अगस्त की तुलना में सितंबर में 80 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया।
पश्चिमी खरीदारों का ब्योरा और वित्तीय आंकड़े
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के अध्ययन के अनुसार भारत, तुर्किये और ब्रुनेई की रिफाइनिंग इकाइयों से सबसे बड़ा खरीदार स्वयं यूरोपीय संघ बनकर उभरा। ब्रसेल्स से जुड़े सदस्य देशों ने इस अवधि में 66.7 करोड़ यूरो मूल्य के प्रसंस्कृत तेल उत्पाद खरीदे। इस सूची में दूसरा बड़ा खरीदार ऑस्ट्रेलिया रहा, जिसने 16.8 करोड़ यूरो के पेट्रोलियम उत्पाद आयात किए। वहीं पाबंदियों की अगुवाई करने वाले अमेरिका ने 15.4 करोड़ यूरो का तेल खरीदा, जबकि न्यूजीलैंड ने 1.9 करोड़ यूरो मूल्य का ईंधन प्राप्त किया।
विश्लेषकों का आकलन है कि इन मुल्कों को बेचे गए तेल उत्पादों में कम से कम 29.5 करोड़ यूरो मूल्य का माल सीधे तौर पर रूसी कच्चे तेल से निकाला गया था। जामनगर रिफाइनरी ने अमेरिका को भी बड़े पैमाने पर निर्यात जारी रखा, जहां इस संयंत्र से भेजे गए सामान का मूल्य 12.2 करोड़ यूरो तक दर्ज किया गया। आंकड़े दर्शाते हैं कि जुलाई से सितंबर तिमाही के दौरान जामनगर रिफाइनरी में बाहर से मंगाए गए कुल कच्चे तेल में रूसी हिस्सेदारी 32 प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई थी।
प्रतिबंधों के ढांचे में खामी और कड़े नियमों का सुझाव
यूरोपीय संघ ने आधिकारिक रूप से जनवरी 2026 में रूसी कच्चे तेल से तैयार सभी तेल उत्पादों के आयात पर पूर्ण पाबंदी लागू करने का प्रावधान तय किया था। हालांकि मौजूदा नियमों में उन मुल्कों को विशेष छूट प्रदान की गई है जो शुद्ध रूप से कच्चे तेल के निर्यातक माने जाते हैं। शोध संस्थाओं का कहना है कि यही प्रावधान वैश्विक नियमों में सबसे बड़ा चोर दरवाजा बन चुका है, क्योंकि किसी राष्ट्र का नेट क्रूड निर्यातक होना यह कतई तय नहीं करता कि उसके घरेलू शोधन संयंत्र रूसी कच्चे तेल का प्रसंस्करण बंद कर देंगे।
इस कानूनी कमी को पाटने के लिए सिफारिश की गई है कि प्रतिबंधों का दायरा पूरे देश पर थोपने के बजाय व्यक्तिगत रिफाइनरी स्तर पर लागू होना चाहिए। इसके तहत ऐसा कड़ा तंत्र विकसित करने की बात कही गई है जिसमें पिछले छह महीनों के दौरान किसी भी रूसी कच्चे तेल की प्रोसेसिंग करने वाली रिफाइनरी से आने वाले सभी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, भले ही उस उत्पाद का आधिकारिक मूल देश कुछ भी घोषित किया गया हो।
भारत के कुल रूसी तेल आयात में नरमी
एक तरफ जहां पश्चिमी देशों को तैयार तेल का निर्यात बढ़ा, वहीं भारत द्वारा सीधे रूस से मंगाए जाने वाले कच्चे तेल के कुल परिमाण में सितंबर माह के भीतर 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह देश में रूसी कच्चे तेल के आयात में लगातार दूसरे महीने देखी गई नरमी थी, जिसके चलते आयात का स्तर अप्रैल के बाद के सबसे निचले पायदान पर सिमट गया। देश के प्रमुख तेल शोधन परिसरों में भी रूसी कच्चे माल की आवक घटी है।
आंकड़ों के मुताबिक जामनगर में रूसी कच्चे तेल का आयात 27 प्रतिशत कम हुआ, जबकि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की पारादीप रिफाइनरी में यह गिरावट 21 प्रतिशत दर्ज की गई। इसी तरह नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी में आयात 8 प्रतिशत घटा। इस सामान्य गिरावट के बावजूद वाडिनार संयंत्र ने सितंबर के दौरान जामनगर को पीछे छोड़ दिया और वह भारत में रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक संयंत्र बन गया। इस फेरबदल के बावजूद भारतीय शोधन संयंत्र पश्चिमी देशों की उच्च मांग को पूरा करने के लिए अपनी निर्यात क्षमता का व्यापक उपयोग कर रहे हैं।

















