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लाइव: नेपाल में बाढ़ का कहर: 1,127 लोगों की मौत, 4,800 से अधिक लापता; राहत और बचाव कार्य तेज — 2 सितंबर 2026लाइव
2 सित॰ 2026, 12:32 pm (48 दिन पहले)· 3

लाइव: नेपाल में बाढ़ का कहर: 1,127 लोगों की मौत, 4,800 से अधिक लापता; राहत और बचाव कार्य तेज — 2 सितंबर 2026

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है। अधिकारियों का मानना है कि रसुवागढ़ी जलविद्युत संयंत्र की सुरंग में हफ्ते भर से फंसे दर्जनों कर्मचारी अब भी सुरक्षित हो सकते हैं। इस बीच, देश के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश से प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है।

नेपाल के उत्तरी, मध्य और पूर्वी इलाकों में हिमनद फटने के बाद आई भीषण बाढ़ और मलबे के बहाव ने तबाही की एक ऐसी दास्तान लिख दी है, जिसने पूरे हिमालयी क्षेत्र को दहलाकर रख दिया है। 26 अगस्त को आई इस कुदरती आफत के एक हफ्ते बाद भी हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। कई दूरदराज के पर्वतीय इलाकों से संपर्क टूट चुका है और सुरक्षा बल मलबे के बीच जिंदगी की तलाश में लगातार अभियान चला रहे हैं। देश के आठ प्रमुख जिलों से नए शव बरामद होने के बाद मृतकों का आधिकारिक आंकड़ा 1,050 के पार पहुंच गया है, जबकि 4,000 से अधिक लोग अब भी लापता दर्ज हैं। आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लापता लोगों में 583 विदेशी पर्यटक और 83 सुरक्षा कर्मी भी शामिल हैं। हालांकि, कठिन मौसम के बावजूद सेना और आपदा राहत दलों ने अब तक लगभग 12,000 लोगों को सुरक्षित बचाकर राहत शिविरों तक पहुंचाया है।

हिमालयी नदियों के उफान और निचले इलाकों में जलप्रलय का बड़ा खतरा

जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग ने देश की प्रमुख नदियों के जलस्तर को लेकर नया रेड अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही रुक-रुक कर बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बचाव कार्यों में लगे दस्तों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, सिंधुली जिले में बहने वाली सुन कोशी नदी, गोरखा की बूढ़ी गंडकी नदी और डडेलधुरा की महाकाली नदी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं।

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इसके अलावा, लमजुंग जिले की मर्स्यांगदी नदी का जलस्तर भुकुंडेबेसी जल स्तर निगरानी केंद्र पर खतरे की सीमा को लांघ गया है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने नदी तटों के समीप रहने वाले सभी नागरिकों से तुरंत सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने का आग्रह किया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि बारिश का दौर इसी तरह जारी रहा, तो निचले मैदानी इलाकों में पानी का बहाव और अधिक विध्वंसकारी रूप धारण कर सकता है।

जलवायु परिवर्तन की गंभीर चेतावनी और वैश्विक कार्रवाई की पुकार

इस भीषण त्रासदी के बीच नेपाल के शीर्ष नेतृत्व और मंत्रियों ने इस आपदा को सीधे तौर पर वैश्विक जलवायु परिवर्तन का दुष्परिणाम करार दिया है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के रास्ते आई तबाही पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में औसत तापमान में 1.8 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि की पुष्टि हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह त्रासदी किसी स्थानीय लापरवाही का नतीजा नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर हो रहे जलवायु बदलाव का सीधा असर है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब यह संकट वैश्विक है, तो इसका मुकाबला करने और पुनर्निर्माण के प्रयासों में सहयोग देने की जिम्मेदारी भी पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बनती है।

वहीं, नेपाल के विदेश मंत्री शीशिर खनाल ने कहा कि बर्फ, पत्थरों और ठंडे पानी के इस भीषण हमले को एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों से विकासशील और पर्वतीय देशों के लिए जलवायु न्याय और अनुकूलन कोष में तेजी से सहयोग की अपील की। इसके साथ ही, वन एवं पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी ने देश के भीतर पर्यावरण संरक्षण और जलवायु नीति को राष्ट्रीय प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखने की वकालत की। उन्होंने कहा कि नेपाल को अंतरराष्ट्रीय जलवायु सम्मेलनों में अपने अधिकारों और क्षतिपूर्ति के दावों को पूरी मुखरता से पेश करना होगा।

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: भविष्य में और भयावह हो सकती हैं हिमनद बाढ़

नेपाल की इस तबाही पर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी गहरा संज्ञान लिया है। संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव कन्नी विग्नराजा ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि आने वाले समय में संपूर्ण हिमालयी क्षेत्र में हिमनद झीलों के टूटने (GLOF) की घटनाओं में भारी वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और झील फटने की स्थिति में आधुनिक तकनीक भी इतनी सक्षम नहीं है कि वह विशाल नदियों के बहाव को रोक सके।

संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ने चिंता जताई कि इस क्षेत्र में स्थित बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं न केवल पूरी तरह तबाह होने के कगार पर हैं, बल्कि इन नदी घाटियों के किनारे बसे करोड़ों लोगों का जीवन और उनका आवास अनिश्चितकाल के लिए असुरक्षित हो गया है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कई समृद्ध पर्वतीय बस्तियां हमेशा के लिए रहने लायक नहीं रहेंगी।

भारत का त्वरित राहत अभियान और टनल रेस्क्यू टीम की जांबाजी

आपदा की खबर मिलते ही भारत ने नेपाल को हर संभव सहायता देने के लिए अपने दरवाजे खोल दिए। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जानकारी दी कि भारत ने राहत सामग्री और विशेषज्ञ कर्मियों से भरा अपना पांचवां विशेष विमान काठमांडू रवाना किया है। इस खेप में 11 सदस्यीय विशिष्ट बचाव दल के साथ-साथ 5.5 टन अत्यंत आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं और आधुनिक उपकरण भेजे गए हैं।

नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव के अनुसार, भारतीय दल नेपाली सेना के साथ चौबीसों घंटे समन्वय बनाकर अत्यंत कठिन परिस्थितियों में काम कर रहा है। काठमांडू में रविवार से तैनात 19 सदस्यीय फोरेंसिक और टनल रेस्क्यू टीम ने जलविद्युत स्थलों पर महत्वपूर्ण प्रगति की है। चिलिमे जलविद्युत परियोजना की सुरंग के भीतर गहरे मलबे और कीचड़ के बीच रास्ता बनाया गया है, जबकि लांगटांग जलविद्युत स्थल पर 185 मीटर गहराई तक तलाशी अभियान पूरा कर लिया गया है। इस दौरान बेहद संकरे रास्तों और दलदली धरातल के कारण भारी मशीनों के उपयोग में भारी बाधाएं आ रही हैं, फिर भी भारतीय बचावकर्मी जोखिम उठाकर फंसे लोगों तक पहुंचने में जुटे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत अब तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 163 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालकर स्वदेश ला चुका है।

सुरंग में हफ्ते भर से फंसे 46 कर्मचारियों के जीवित होने की आस

बाढ़ के बाद सबसे राहत भरी खबर रसुवागढ़ी जलविद्युत संयंत्र से सामने आई है, जहां सुरंग के भीतर पिछले सात दिनों से फंसे दर्जनों कर्मचारियों के सुरक्षित होने की उम्मीदें जग गई हैं। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के बोर्ड सदस्य अम्सु किरण शाही ने बताया कि भूमिगत सुरंग के एक कमरे जैसे सुरक्षित हिस्से में लगभग 46 कर्मचारी फंसे हुए हैं।

उन्होंने बताया कि सात दिन बीत जाने के बाद भी उनके जीवित मिलने की पूरी संभावना इसलिए है, क्योंकि जिस हिस्से में वे बंद हैं, वहां पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी और खाद्य सामग्री उपलब्ध है। बचाव दल सुरंग से पानी और मलबा हटाने का काम तेजी से कर रहे हैं ताकि उन तक हवा और राहत की राह खोली जा सके।

अरबपति बिनोद चौधरी का बयान: बुनियादी ढांचे को पहुंचा अपूरणीय क्षति

नेपाल के एकमात्र अरबपति उद्योगपति और समाजसेवी बिनोद चौधरी ने इस तबाही पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की ओर से मिली तत्काल मदद की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस आपदा का पैमाना इतना विशाल है कि इसकी पूर्व कल्पना करना भी असंभव था। हालांकि पिछले वर्षों में भी क्षेत्र में बाढ़ आई थी, लेकिन इस बार का नुकसान उसकी तुलना में कहीं अधिक भयावह है।

बिनोद चौधरी ने बताया कि बाढ़ के प्रचंड वेग में पूरे के पूरे गांव, व्यस्त बाजार, स्कूल और रणनीतिक पुल बह गए हैं। देश की ऊर्जा रीढ़ को करारा झटका लगा है और 500 मेगावाट से अधिक जलविद्युत उत्पादन क्षमता पूरी तरह ठप हो गई है। उन्होंने कहा कि नेपाल के सामने पुनर्निर्माण की जो चुनौती खड़ी है, वह अत्यंत विकराल है और इसके लिए दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय सहायता की आवश्यकता होगी।

उत्तर प्रदेश की गंडक नदी में मिले 5 नेपालियों के शव, सीमा पर सुपुर्दगी

नेपाल की नदियों में आया सैलाब सीमा पार भारत के उत्तर प्रदेश तक तबाही के निशान छोड़ रहा है। कुशीनगर जिले के बरवा पट्टी और खड्डा थाना क्षेत्रों से बहने वाली गंडक नदी से उत्तर प्रदेश पुलिस ने पांच नेपाली नागरिकों के शव बरामद किए। इनमें दो महिलाओं और तीन पुरुषों के शव शामिल हैं, जो नेपाल से आई तेज धार में बहकर भारतीय सीमा में आ गए थे।

मंगलवार शाम लगभग 4 बजे इन शवों को भारत-नेपाल की सोनाली सीमा पर लाया गया, जहां कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नेपाल के बेलहिया थाने के प्रभारी उप-निरीक्षक हरिराम डांगी को सौंप दिया गया। पुलिस प्रशासन ने शवों को बुटवल भेज दिया है, जहां फॉरेंसिक जांच और शिनाख्त की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें उनके रोते-बिलखते परिजनों के हवाले किया जाएगा।

बिहार सरकार का अलर्ट: बाढ़ के पानी से आई अपरिचित मछलियां न खाएं

नेपाल की सीमा से सटे बिहार के जिलों में बाढ़ के पानी के साथ एक नया स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। बिहार के डेयरी, मत्स्य पालन और पशु संसाधन विभाग ने मंगलवार को एक विशेष जनहित एडवाइजरी जारी कर नागरिकों को सख्त चेतावनी दी है। पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, बगहा और सारण जिलों में स्थानीय ग्रामीणों ने नेपाल से आ रहे जलभराव में असामान्य और अजीब दिखने वाली बड़ी मछलियां पकड़ने का दावा किया है।

विभाग ने खुलासा किया कि इन गैर-पारंपरिक मछलियों को पकाने और खाने के बाद कई लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ गए हैं। स्थानीय मछुआरों ने यह भी रिपोर्ट दी है कि बाढ़ के पानी में इंसानों और मवेशियों के सड़ते हुए शव बहते देखे गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि दूषित पानी, खुले नालों और सड़ती सामग्री के संपर्क में रहने के कारण इन मछलियों में खतरनाक बैक्टीरिया, वायरस और फंगस का संक्रमण फैल चुका है। अतः किसी भी अनजान प्रजाति की मछली का सेवन करना जानलेवा साबित हो सकता है।

लापता विदेशी सैलानी और टेक्सास के भारतीय मूल के नागरिकों का संकट

नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, आपदा के एक सप्ताह बाद तक 324 विदेशी पर्यटकों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन 39 देशों के 590 नागरिक अब भी लापता हैं। हालांकि, नेपाल पर्यटन बोर्ड के प्रवक्ता सुनील शर्मा ने थोड़ी राहत देते हुए बताया कि पूर्व में लापता सूची में दर्ज कम से कम पांच विदेशी नागरिकों ने फोन और ईमेल के जरिए अपनी सुरक्षा की सूचना दी है।

दूसरी ओर, अमेरिका के टेक्सास राज्य के चार भारतीय मूल के नागरिक माउंट कैलाश की धार्मिक यात्रा से लौटते समय चीन-नेपाल सीमा पर गिरोंग पोर्ट के पास से लापता हो गए हैं। इनमें उत्तरी टेक्सास के 60 वर्षीय व्यवसायी दीपक आहूजा और उनकी 57 वर्षीय पत्नी मधु आहूजा शामिल हैं। संचार नेटवर्क पूरी तरह ठप होने के कारण उनसे संपर्क टूट गया है। इस संकट को देखते हुए गैर-लाभकारी संगठन सेवा इंटरनेशनल USA ने लापता व्यक्तियों के लिए एक ऑनलाइन ट्रैकिंग पोर्टल शुरू किया है और 1,00,000 डॉलर का आपातकालीन फंड जारी किया है। संस्था ने मात्र 24 घंटे के भीतर 55,000 डॉलर से अधिक का दान भी जुटा लिया है।

चीन ने खोला गिरोंग मार्ग और भेजे फॉरेंसिक व डीएनए विशेषज्ञ

आपदा के केंद्र तिब्बत सीमा पर चीन ने एक हफ़्ते से बंद पड़ी गिरोंग क्रॉसिंग को जोड़ने वाली एकमात्र मुख्य सड़क को पूरी तरह से खोल दिया है। सड़क मार्ग बहाल होने से पहली बार तबाही वाले इलाके तक भारी मशीनरी और एक्स्ट्रावेटर पहुंच पाए हैं। इससे पहले चीनी सैनिकों को जान बचाने वाले छोटे उपकरणों और हवाई आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ रहा था।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बताया कि चीन सरकार नेपाल को आपातकालीन बेली ब्रिज, शव गृह के लिए प्रशीतक (रेफ्रिजरेटर), संचार उपकरण और डीएनए पहचान विशेषज्ञों का विशेष दल भेज रही है। चीनी बचाव दल स्निफर डॉग्स और लाइफ-डिटेक्टर की मदद से मलबे, खड्डों और क्षतिग्रस्त इमारतों में अपने नागरिकों की खोज कर रहे हैं। हालांकि, झील फटने का तात्कालिक खतरा कम हुआ है, लेकिन ढलानों पर भूस्खलन का जोखिम अभी भी बना हुआ है।

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  1. नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद चीन ने भेजे डीएनए विशेषज्ञ और राहत उपकरण

    सीमावर्ती क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद चीन नेपाल को अतिरिक्त डीएनए पहचान विशेषज्ञों के साथ-साथ बेली ब्रिज, शव गृह के लिए रेफ्रिजरेटर और संचार उपकरण जैसी आपातकालीन राहत सामग्री भेज रहा है। यह जानकारी चीन के विदेश मंत्रालय ने दी है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि चीन ने नेपाल सरकार से वहां लापता हुए अपने नागरिकों को तलाशने और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के राहत कार्यों में तेजी लाने का अनुरोध किया है।
  2. नेपाल की जलविद्युत परियोजना में फंसे श्रमिकों के जीवित होने की प्रबल उम्मीद: अधिकारी

    नेपाल विद्युत प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि रसुवागढ़ी जलविद्युत संयंत्र की भूमिगत सुरंग में हफ्ते भर से फंसे दर्जनों कर्मचारियों के जीवित मिलने की काफी संभावना है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के बोर्ड सदस्य अम्सु किरण शाही ने बताया कि रसुवागढ़ी में सुरंग के भीतर एक कमरे जैसी संरचना में लगभग 46 लोगों के फंसे होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि सात दिनों के बाद भी उनके सुरक्षित होने का पूरा भरोसा है, क्योंकि इमारत के उस हिस्से में उनके पास पर्याप्त मात्रा में पानी और भोजन उपलब्ध है।
  3. नेपाल में भारी बारिश के कारण तीन प्रमुख नदियां खतरे के निशान के पार, निचले इलाकों में चेतावनी

    नेपाल के विभिन्न हिस्सों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद तीन मुख्य नदियों का जलस्तर चेतावनी के स्तर से ऊपर चला गया है, जिसके बाद नेपाली अधिकारियों ने देश के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों के निवासियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग के मुताबिक, आज सुबह 6 बजे तक सिंधुली जिले की सुन कोशी नदी, गोरखा की बूढ़ी गंडकी नदी और डडेलधुरा की महाकाली नदी चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही थीं। प्रभाग ने मंगलवार (1 सितंबर 2026) को जानकारी दी कि लमजुंग जिले में मर्स्यांगदी नदी ने रात 11:15 बजे भुकुंडेबेसी जल स्तर निगरानी केंद्र पर खतरे के स्तर को लांघ दिया था। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार मर्स्यांगदी नदी का जलस्तर अभी भी बढ़ रहा है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का जोखिम अत्यधिक बढ़ गया है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने बताया कि जल स्तर खतरे की सीमा को पार कर जाने के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सजग रहने की अपील की गई है। विभाग ने नदी के किनारे रहने वाले नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने और जलस्तर और बढ़ने की स्थिति में समय रहते सुरक्षित स्थानों की पहचान करने का आग्रह किया है।
  4. नेपाल के बाढ़ के पानी के साथ आई अनजान प्रजाति की मछलियों को न खाने की बिहार सरकार की चेतावनी

    नेपाल से आ रहे बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई अनजानी किस्मों की मछलियों के सेवन से कुछ लोगों के बीमार पड़ने की खबरों के बाद बिहार प्रशासन ने सतर्क रहने का निर्देश जारी किया है। डेयरी, पशु और मत्स्य संसाधन विभाग द्वारा मंगलवार (1 सितंबर, 2026) को यह परामर्श जारी किया गया। आधिकारिक सूचना के अनुसार, नेपाल से आ रहे जलभराव के बीच बिहार के कुछ इलाकों में गैर-पारंपरिक मछलियां पाई गई हैं। कथित तौर पर ऐसी मछलियों को पकाने व खाने से कुछ लोग अस्वस्थ हो गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि बाढ़ के दौरान जलाशयों, नदियों, तालाबों और झीलों से बहकर आने वाली मछलियां बड़े इलाकों में फैल जाती हैं। इस दौरान वे खुले नालों, मृत जानवरों और सड़ते पदार्थों के संपर्क में काफी समय तक रह सकती हैं, जिससे उनमें जीवाणु, विषाणु और कवक का संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
  5. भारत ने नेपाल भेजी 11 सदस्यीय बचाव टीम और 5.5 टन जरूरी दवाएं, उड़ा पांचवां विमान

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जानकारी दी कि भारत ने नेपाल में आई बाढ़ के बाद बचाव कर्मियों और राहत सामग्री से भरा अपना पांचवां विमान रवाना कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए श्री जयशंकर ने बताया कि पांचवें भारतीय विमान ने नेपाल के लिए उड़ान भरी है। इसमें विशेष उपकरणों से लैस 11 सदस्यों की एक बचाव टीम और 5.5 टन आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं भेजी गई हैं।
  6. भारत ने नेपाल भेजी 5वीं राहत उड़ान: 11 सदस्यीय विशेष टीम और 5.5 टन दवाएं रवाना

    विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जानकारी दी है कि भारत ने बाढ़ प्रभावित नेपाल के लिए कर्मियों और राहत सामग्री से भरा अपना पांचवां विमान रवाना किया है। उन्होंने X पर लिखा, "पांचवां भारतीय विमान नेपाल के लिए रवाना हो चुका है। इसमें विशेष उपकरणों से लैस 11 सदस्यीय बचाव दल और 5.5 टन जरूरी दवाएं शामिल हैं।"
  7. चीन ने तिब्बत आपदा क्षेत्र का एकमात्र मार्ग खोला, खोज अभियान में आई तेजी

    चीन ने नेपाल सीमा पर स्थित गिरोंग क्रॉसिंग को जोड़ने वाली एकमात्र सड़क को बाढ़ में तबाह होने के एक हफ्ते बाद पूरी तरह से फिर से खोल दिया है, जिससे पहली बार मुख्य आपदा क्षेत्र तक भारी मशीनें पहुंच सकी हैं। सड़क खुलने से पहले, चीनी सैनिक और बचाव दल जीवन-खोज उपकरणों के सहारे लापता लोगों की तलाश कर रहे थे और हवाई मार्ग से आपूर्ति हासिल कर रहे थे, ऐसा चीनी राज्य प्रसारक CCTV ने बताया। चीनी अधिकारियों के अनुसार, झीलों से होने वाले खतरे कम हुए हैं, लेकिन भूस्खलन की आशंका अब भी बनी हुई है। CCTV के मुताबिक, नष्ट हो चुके चीनी सीमा निरीक्षण परिसर के स्थान पर भारी मशीनरी और खोज अभियानों को मजबूत करने वाले उपकरण पहुंच गए हैं। प्रसारक के फुटेज में दिखाया गया है कि कई बचाव दल और एक्स्ट्रावेटर लापता लोगों की गहन तलाश में जुटे हैं। जीवन का पता लगाने वाले उपकरणों और श्वान दस्तों से लैस टीमों को सीमा क्षेत्र के सबसे प्रभावित हिस्सों, नदी तटों, खड्डों और क्षतिग्रस्त सड़कों के गलियारों में तैनात किया गया है। - रॉयटर्स
  8. नेपाल बाढ़: लापता बताए गए कुछ विदेशी पर्यटकों ने अधिकारियों से संपर्क किया

    नेपाल में खोज अभियान जारी रहने के बीच अधिकारियों ने बताया है कि पूर्व में लापता बताए गए कुछ विदेशी पर्यटकों ने अधिकारियों से संपर्क साधा है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा कि 26 अगस्त की बाढ़ के एक सप्ताह बाद अब तक 324 विदेशी नागरिकों को बचाया जा चुका है, जबकि 39 देशों के लगभग 590 नागरिक अब भी लापता हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के प्रवक्ता सुनील शर्मा के अनुसार, पूर्व में लापता दर्ज किए गए कम से कम पांच अन्य विदेशी पर्यटकों ने हाल के दिनों में फोन या ईमेल द्वारा अधिकारियों से संपर्क किया है। - एपी
  9. टेक्सास के 4 भारतीय मूल के नागरिक नेपाल में लापता, सेवा इंटरनेशनल ने राहत कोष जारी किया

    एक गैर-लाभकारी संगठन ने बताया कि नेपाल-तिब्बत में आई अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद टेक्सास के चार भारतीय मूल के लोग लापता हो गए हैं। संगठन ने आपातकालीन ट्रैकिंग डेस्क शुरू किया है और 1,00,000 डॉलर का राहत कोष जारी किया है। उत्तरी टेक्सास के व्यवसायी दीपक आहूजा (60) और मधु आहूजा (57) माउंट कैलाश यात्रा से लौट रहे थे, तभी बाढ़ के कारण स्थानीय संचार नेटवर्क ठप होने से चीन-नेपाल सीमा पर गिरोंग पोर्ट के पास उनसे संपर्क टूट गया। टेक्सास में मुख्यालय वाले सेवा इंटरनेशनल USA ने मंगलवार (1 सितंबर) को घोषणा की कि उसने अपने "नेपाल फ्लैश फ्लड रिलीफ" अभियान के लिए 24 घंटे के भीतर 55,000 डॉलर से अधिक जुटाए हैं और एक लापता व्यक्ति पोर्टल (sewausa.org/NepalRescue) शुरू किया है। - पीटीआई
  10. बिहार सरकार की चेतावनी: नेपाल की बाढ़ के पानी में पाई जाने वाली 'अपरिचित' मछलियों का सेवन न करें

    नेपाल में विनाशकारी अचानक आई बाढ़ के बीच, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, बिहार के डेयरी, मत्स्य पालन और पशु संसाधन विभाग ने मंगलवार (1 सितंबर, 2026) को एक जनहित परामर्श जारी कर नेपाल से राज्य की नदियों में आ रहे बाढ़ के पानी से पकड़ी गई "अपरिचित और असामान्य" मछलियों को न खाने की सलाह दी है। हाल के दिनों में पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, बगहा और सारण जिलों के लोगों ने "अजीब दिखने वाली" बड़ी मछलियां पकड़ने की बात कही है। कुछ लोगों ने अनजाने में इन्हें खाने के बाद बीमार पड़ने की शिकायत की। कुछ मछुआरों ने बाढ़ के पानी में इंसानों और जानवरों के सड़ते शव तैरते देखने का दावा किया है। बिहार सरकार ने स्वास्थ्य जोखिमों और संदूषण की चिंताओं के कारण नेपाल के बाढ़ के पानी की अपरिचित मछलियों के सेवन से बचने की चेतावनी दी है।
  11. संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: आने वाले वर्षों में हिमालयी क्षेत्र में हिमनद बाढ़ का गंभीर खतरा

    संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि हिमालयी क्षेत्र को भविष्य में हिमनद बाढ़ों से गंभीर खतरा है, क्योंकि ग्लेशियर टूटने से नेपाल में आई पिछले हफ्ते की बाढ़ में मरने वालों की संख्या 1,000 से अधिक हो गई है। न केवल वह जलविद्युत ऊर्जा खतरे में है जिस पर कई लोग निर्भर हैं, बल्कि पूरी नदी प्रणालियों के किनारे जहां लाखों लोग रहते हैं, रहने लायक नहीं रह सकते हैं। UN की सहायक महासचिव कन्नी विग्नराजा ने रॉयटर्स को दिए साक्षात्कार में कहा, "इन विशाल नदी प्रणालियों के किनारे होने वाले नुकसान को रोकने के लिए तकनीक उतनी तेजी से विकसित नहीं हो सकती जो हिमनद झीलों के उफान को संभाल सके।" - रॉयटर्स
  12. नेपाल के इकलौते अरबपति बिनोद चौधरी ने पीएम मोदी और भारत की त्वरित मदद की सराहना की

    नेपाल के एकमात्र अरबपति और समाजसेवी बिनोद चौधरी ने मंगलवार (1 सितंबर) को देश में आई विनाशकारी बाढ़ पर त्वरित प्रतिक्रिया के लिए भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि इस आपदा का पैमाना किसी की भी सोच से "कहीं बड़ा" था। पुनर्निर्माण के काम को "अत्यधिक विशाल" बताते हुए श्री चौधरी ने रेखांकित किया कि कैसे गांव, बाजार, स्कूल और पुल बह गए हैं तथा 500 मेगावाट से अधिक जलविद्युत उत्पादन क्षमता ठप हो गई है। श्री चौधरी ने पीटीआई वीडियो को बताया, "इस तबाही का पैमाना इतना बड़ा है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। पिछले साल भी इसी जगह बाढ़ आई थी, लेकिन वह इसके आसपास भी नहीं थी।" - पीटीआई
  13. नेपाल में भारतीय टनल रेस्क्यू टीम ने चिलिमे और लांगटांग जलविद्युत स्थलों पर प्रगति की

    काठमांडू में भारतीय राजदूत ने जानकारी दी है कि भारत के विशेष टनल रेस्क्यू दल ने बाढ़ प्रभावित नेपाल में दो जलविद्युत परियोजनाओं पर महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसमें चिलिमे के टनल के भीतर पहुंच बनाई गई और लांगटांग में 185 मीटर तक खोज की गई। नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोमवार (31 अगस्त, 2026) को X पर एक पोस्ट में कहा कि प्रतिकूल मौसम और कठिन रास्तों के बावजूद इस टीम ने नेपाली सेना के साथ समन्वय में काम किया। भारत ने 26 अगस्त को आई तबाही के बाद सहायता के लिए ये विशेष टीमें तैनात की हैं, जिसने नेपाल के उत्तरी और मध्य हिस्सों को तबाह कर दिया, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और जलविद्युत परियोजनाएं नष्ट हो गईं।
  14. नेपाल बाढ़: 163 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया, कठिन परिस्थितियों में भी बचाव अभियान जारी

    नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सुरक्षित निकाले गए भारतीय नागरिकों की संख्या 163 हो गई है, विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार (1 सितंबर) को यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने X पर यह अपडेट साझा किया। उन्होंने रविवार से काठमांडू में काम कर रही 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम और टनल रेस्क्यू टीम के बारे में भी जानकारी दी। बयान के अनुसार, "टनल रेस्क्यू टीम: चिलिमे जलविद्युत टनल में पहुंच बनाने के बाद, भारतीय टीम को अत्यंत तंग जगह, इलाके के कारण विशेष उपकरणों के सीमित उपयोग और दलदली धरातल जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।" - पीटीआई
  15. नेपाल में बाढ़ से बहे 5 नागरिकों के शव उत्तर प्रदेश में मिले, सोनाली सीमा पर नेपाल पुलिस को सौंपे गए

    पड़ोसी देश में बाढ़ में बह गए और बाद में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से बरामद किए गए पांच नेपाली नागरिकों के शव मंगलवार (1 सितंबर) को सोनाली सीमा पर नेपाल पुलिस को सौंप दिए गए। कुशीनगर के बरवा पट्टी और खड्डा इलाकों से दो महिलाओं और तीन पुरुषों के शव मिले थे। शवों को शाम लगभग 4 बजे सोनाली लाया गया और नेपाल के बेलहिया थाना प्रभारी उप-निरीक्षक हरिराम डांगी को सौंप दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि शवों को बुटवल ले जाया गया है, जहां नेपाल पुलिस पहचान की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें परिजनों को सौंपेगी। - पीटीआई
  16. नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने रसुवा की भीषण बाढ़ के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया

    नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि पिछले सप्ताह तिब्बत की सीमा से लगी भोटेकोशी नदी के रास्ते रसुवा में आई भीषण बाढ़ का कारण जलवायु परिवर्तन है। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि जलवायु परिवर्तन ने यह आपदा पैदा की है, क्योंकि यह पुष्टि हो चुकी है कि हिमालयी क्षेत्र में तापमान में 1.8 डिग्री की वृद्धि हुई है।" श्री शाह ने आगे कहा कि जलवायु परिवर्तन वैश्विक देन है और आपदा से निपटना भी वैश्विक जिम्मेदारी है। - पीटीआई
  17. नेपाल की पर्यावरण मंत्री का बयान: जलवायु न्याय को शीर्ष राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना आवश्यक

    नेपाल की वन एवं पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय मुद्दों को शीर्ष राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने का आह्वान किया है, स्थानीय मीडिया ने मंगलवार (1 सितंबर, 2026) को यह रिपोर्ट दी। उनकी यह टिप्पणी नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के कुछ दिनों बाद आई है जिसमें लगभग 1,000 लोग मारे गए और 4,000 के करीब लापता हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के गिरने से आई इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि देश को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जलवायु न्याय पर अपने अधिकारों और दावों को मजबूती से उठाना चाहिए।
  18. नेपाल के विदेश मंत्री का बयान: हिमनद टूटने की आपदा जलवायु परिवर्तन की 'चेतावनी'

    नेपाल में हिमनद टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ देश के लिए जलवायु परिवर्तन से पैदा हो रहे खतरों का एक "चेतावनी संकेत" है, यह बात नेपाल के विदेश मंत्री ने मंगलवार को AFP से कही। शीशिर खनाल ने साक्षात्कार में कहा, "हमारा मानना है कि इस आपदा को नेपाल के लिए जलवायु परिवर्तन के खतरों की चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।" बर्फ के ठंडे पानी, मलबे और पत्थरों के कहर के लगभग एक हफ्ते बाद उन्होंने यह बात कही। विदेश मंत्री ने इस तबाही के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अनुकूलन और न्याय के लिए सहयोग की अपील की है।
  19. नेपाल बाढ़: मृतकों की संख्या 1,000 पार, 4,000 के करीब लोग अब भी लापता

    नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या मंगलवार (1 सितंबर, 2026) को बढ़कर 1,050 हो गई, क्योंकि सुरक्षा बलों ने देश के आठ जिलों से और शव बरामद किए हैं। नेपाल के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से जारी नए अलर्ट और रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच बचाव दल फंसे लोगों को खोजने में संघर्ष कर रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने बताया कि 583 विदेशी नागरिकों और 83 सुरक्षा कर्मियों सहित लगभग 4,000 लोग अभी भी लापता हैं। प्राधिकरण ने बताया कि करीब 12,000 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। - पीटीआई

सवाल-जवाब

नेपाल में बाढ़ और हिमनद फटने से अब तक कितने लोगों की मौत हो चुकी है?
नेपाल के आठ प्रभावित जिलों से अब तक 1,050 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं।
आपदा के बाद कितने लोग लापता हैं और कितनों को बचाया गया है?
लगभग 4,000 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। वहीं करीब 12,000 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
भारत सरकार नेपाल में राहत और बचाव के लिए क्या कदम उठा रही है?
भारत ने 5.5 टन दवाएं और 11 सदस्यीय विशेष दल के साथ 5वां विमान भेजा है। इसके अलावा 19 सदस्यीय टनल रेस्क्यू और फॉरेंसिक टीम रसुवागढ़ी और लांगटांग में काम कर रही है।
बिहार सरकार ने बाढ़ के पानी की मछलियों को लेकर क्या चेतावनी जारी की है?
बिहार के मत्स्य पालन विभाग ने नेपाल से आ रहे बाढ़ के पानी की अनजान और अजीब मछलियों को न खाने की सलाह दी है, क्योंकि दूषित पानी और शवों के संपर्क में आने से वे संक्रमित हो सकती हैं।
क्या सुरंग में फंसे श्रमिकों के सुरक्षित होने की उम्मीद है?
नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, रसुवागढ़ी सुरंग के एक कमरे जैसे हिस्से में फंसे 46 श्रमिकों के पास पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध है, जिससे उनके सुरक्षित होने की प्रबल संभावना है।
क्या चीन ने तिब्बत सीमा मार्ग खोल दिया है?
हाँ, चीन ने एक सप्ताह बाद गिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग की सड़क को खोल दिया है, जिससे आपदा क्षेत्र तक भारी मशीनरी और डीएनए विशेषज्ञ पहुंच सके हैं।
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