संसद के मानसून सत्र के 14वें दिन गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को दोनों सदनों में भारी राजनीतिक खींचतान और विधायी कामकाज का मिला-जुला माहौल देखने को मिला। कार्यवाही की शुरुआत में जहां लोकसभा ने हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए ऐतिहासिक परमाणु बम हमलों के पीड़ितों को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की, वहीं इसके तुरंत बाद विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के जोरदार हंगामे के कारण विधायी प्रक्रिया बार-बार बाधित हुई। विपक्ष राम मंदिर दान राशि में कथित वित्तीय अनियमितताओं और 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के विषय पर केंद्र सरकार से सीधे जवाब की मांग पर अड़ा रहा। इन गतियों के बीच, लोकसभा ने कराधान से जुड़े एक महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक को पारित किया, जबकि राज्यसभा ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के खर्चों से संबंधित विनियोग विधेयक पर चर्चा पूरी कर उसे निचले सदन को वापस लौटा दिया। इसके अलावा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जम्मू-कश्मीर के बजट पुनर्गठन और अतिरिक्त वित्तीय सहायता पर एक महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया।
लोकसभा की कार्यवाही: परमाणु पीड़ितों को नमन, भारी विरोध और कराधान विधेयक की स्वीकृति
गुरुवार सुबह 11 बजे जैसे ही निचले सदन की बैठक शुरू हुई, अध्यक्ष पीठ की ओर से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर गिराए गए परमाणु बमों के पीड़ितों की पावन स्मृति में श्रद्धांजलि दी गई। संपूर्ण सदन ने मौन रखकर त्रासदी के शिकार निर्दोष लोगों को याद किया। हालांकि, इसके तुरंत बाद विपक्षी सांसदों ने वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष की मुख्य मांग थी कि जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन पर पुलिसिया कार्रवाई और राम मंदिर चंदे में गबन के आरोपों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद सदन में आकर आधिकारिक बयान दें। विरोध प्रदर्शन के तीखे होते स्वरूप को देखते हुए लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
दोपहर 2 बजे जब सदन पुनः समवेत हुआ, तब सरकार ने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाया। इस दौरान लोकसभा ने कराधान और अन्य नियम (संशोधन) विधेयक, 2026 को विचार-विमर्श के पश्चात ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह नया कानून देश के तीन प्रमुख कानूनों—भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007, आयकर अधिनियम 2025 और वित्त अधिनियम 2026—में महत्वपूर्ण बदलाव सुनिश्चित करता है। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, भारत में विनिर्माण इकाइयों को अत्याधुनिक मशीनरी और टूल्स की आपूर्ति करने वाली विदेशी तकनीकी कंपनियों, जैसे कि एप्पल, के लिए टैक्स हॉलिडे की समयावधि को बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही, भारत में अपना आधार स्थानांतरित करने वाले विदेशी फंड प्रबंधकों के सामने आने वाली नौकरशाही की बाधाओं और विधिक अनिश्चितताओं को समाप्त करने तथा देश के भीतर डेटा सेंटर स्थापित करने की इच्छुक वैश्विक संस्थाओं के लिए नियमों को काफी सरल बनाया गया है।
इसके अतिरिक्त, लोकसभा ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े एक प्रमुख विषय पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया। विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 का अध्ययन कर रही संसद की संयुक्त समिति की रिपोर्ट पेश करने की समयावधि को विस्तारित करने संबंधी प्रस्ताव को सदन ने अपनी स्वीकृति दे दी। अब इस संयुक्त समिति को वर्ष 2026 के शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की छूट मिल गई है। इन विधायी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद, लोकसभा की बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया, जो अब शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को प्रातः 11 बजे पुनः शुरू होगी।
राज्यसभा में विनियोग विधेयक पर विमर्श और जम्मू-कश्मीर पर केंद्रीय घोषणा
उच्च सदन राज्यसभा में भी दिन भर गहमागहमी बनी रही। संसदीय कार्यवाही के दौरान विभिन्न स्थायी समितियों की रिपोर्ट पटल पर रखी गईं। इनमें वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति, उद्योग संबंधी समिति, रसायन और उर्वरक संबंधी संसदीय स्थायी समिति (2025-2026) तथा संचार एवं प्रौद्योगिकी संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति (2025-2026) की विस्तृत रिपोर्ट शामिल थीं।
दोपहर के सत्र में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026 को विचार और लोकसभा को वापस लौटाने के उद्देश्य से उच्च सदन के समक्ष प्रस्तुत किया। यह विधेयक वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार की विभिन्न सेवाओं, विकासात्मक योजनाओं और प्रशासनिक खर्चों की पूर्ति हेतु भारत की संचित निधि से अतिरिक्त धनराशि की निकासी को कानूनी अधिकार प्रदान करता है। राज्यसभा ने गहन चर्चा के बाद संविधान के अनुच्छेदों के तहत इस धन विधेयक को लोकसभा को वापस भेज दिया।
विधेयक पर हुई बहस का उत्तर देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जम्मू-कश्मीर के विकास और वित्तीय स्थिति पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2019 में अनुच्छेद 370 के निरसन के उपरांत वहां निर्वाचित सरकार के गठन तक चले केंद्रीय शासन के दौर में केंद्र सरकार ने दशकों पुरानी संरचनात्मक समस्याओं को सुलझाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं के अध्ययन में व्यापक समय और प्रयास लगाए गए हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में दृढ़ता के साथ कहा, "हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की पूरी देखभाल हो क्योंकि हम सब एक ही देश का हिस्सा हैं।" उन्होंने आगे जोड़ा कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक अविभाज्य अंग है, जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला क्षेत्र भी सम्मिलित है। केंद्र सरकार ने इस केंद्र शासित प्रदेश के ऋण ढांचे का व्यापक पुनर्गठन किया है और संशोधित बजटीय आवंटन के अतिरिक्त ₹5,000 करोड़ की विशेष राशि स्वीकृत की है ताकि बुनियादी ढांचे का विकास निर्बाध गति से हो सके।
शून्यकाल और विशेष उल्लेख: सांसदों ने उठाए जनहित के ज्वलंत मुद्दे
राज्यसभा में शून्यकाल और विशेष उल्लेख सत्र के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय महत्व के विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया
- चिकित्सा क्षेत्र में रेफरल कमीशन का मुद्दा: आम आदमी पार्टी के MP राघव चड्ढा ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में डॉक्टरों, निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक जांच केंद्रों के बीच फल-फूल रहे 'कट मनी अथवा रेफरल कमीशन' के तंत्र पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस अनुचित व्यावसायिक सांठगांठ का सीधा वित्तीय बोझ आम मरीजों पर पड़ता है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस प्रथा पर सख्त कानूनी रोक लगाने की मांग की।
- पुलिस कार्रवाई और सदन के संचालन पर सवाल: समाजवादी पार्टी की MP इकरा हसन ने आरोप लगाया कि 6 अगस्त 2026 तक चले इस मानसून सत्र में सरकार ने विपक्ष को केवल एक दिन सुचारू रूप से अपनी बात रखने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों से पुलिस अत्याचारों और छात्र आंदोलनों पर व्यापक बहस का वादा किया गया था, परंतु सरकार अब तक इस पर चुप्पी साधे हुए है।
- बंजारा समाज और संत सेवालाल महाराज: भारतीय जनता पार्टी के MP डॉ. के. लक्ष्मण ने मांग की कि बंजारा समुदाय के महान समाज सुधारक और जननायक संत सेवालाल महाराज की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए, ताकि उनके सामाजिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल सके।
- उच्च न्यायपालिका में सामाजिक प्रतिनिधित्व: राष्ट्रीय जनता दल के MP मनोज झा ने उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में SC, ST तथा OBC समुदायों के न्यायाधीशों की कम संख्या का मुद्दा उठाया। इसके उत्तर में कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने स्पष्ट किया कि सरकार लगातार संबंधित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को सिफारिशें भेजकर वंचित वर्गों के योग्य वकीलों को न्यायपालिका में शामिल करने का आग्रह करती है। मंत्री ने बताया कि मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (MoP) में न्यायपालिका के भीतर व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के स्पष्ट नियम मौजूद हैं, जिसके तहत जजों की नियुक्ति और तबादले किए जाते हैं।
- गृह मंत्री की मौजूदगी पर गतिरोध: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के MP पी संदोष ने कहा कि गृह मंत्री को सदन में बुलाने की विपक्ष की मांग पर राज्यसभा के सभापति का हस्तक्षेप एक बड़ी सफलता है। सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को निर्देश दिया कि वे गृह मंत्री की अनुपस्थिति के कारणों से विपक्ष की चिंताओं को अवगत कराएं, जो अब आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन चुका है।
- पूर्वोत्तर का आर्थिक विकास: यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) के सांसद प्रमोद बोरो ने पूर्वोत्तर भारत के लिए एक विशेष सीमावर्ती आर्थिक क्षेत्र के निर्माण की आवश्यकता जताई और क्षेत्र में माल ढुलाई बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया।
- छोटे किराना व्यापारियों का संरक्षण: RJD सांसद मनोज झा ने वित्त मंत्री से अपील की कि क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की आक्रामक डिस्काउंटिंग और मूल्य नीतियों से संकट झेल रहे देश के छोटे किराना दुकानदारों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए ठोस नीतियां बनाई जाएं।
- फरक्का संधि और बिहार का जल संकट: राज्यसभा में विशेष उल्लेख के दौरान सांसद संजय कुमार झा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हस्ताक्षरित फरक्का संधि का 2026 में मियाद पूरी होने पर नवीनीकरण न किया जाए। उन्होंने दलील दी कि गंगा नदी के जल बंटवारे का यह समझौता बिहार के कृषि और पर्यावरणीय हितों के प्रतिकूल साबित हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने बिहार में तेजी से नीचे गिर रहे भूजल स्तर पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।
- पहाड़ी राज्यों में पर्यटन: प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देश के पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे सरकारी प्रोजेक्ट्स की विस्तृत जानकारी साझा की।
- खरगे और रिजिजू में नोकझोंक: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा नियमों का हवाला देकर बाधा न डालने की अपील पर पलटवार करते हुए विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, "क्या बोलना है और कैसे बोलना है, यह मेरा अधिकार है।" उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के उस पुराने वक्तव्य का स्मरण कराया जिसमें उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और गतिरोध भी संसदीय प्रक्रिया का वैध हिस्सा हैं। खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सदन में अनिवार्य उपस्थिति की मांग दोहराई।
दिन भर चले इस गहन राजनीतिक घटनाक्रम और विधायी कार्यों के समापन के पश्चात राज्यसभा की कार्यवाही को भी दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया। उच्च सदन की अगली बैठक शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को प्रातः 11 बजे पुनः आरंभ होगी।



















