सुबह के समय नाश्ते में अक्सर लोग पोहा, उपमा या पराठे जैसे जाने-पहचाने विकल्पों से एक जैसा महसूस करने लगते हैं। अगर आप सुबह की शुरुआत किसी नए, कुरकुरे और पौष्टिक व्यंजन के साथ करना चाहते हैं, तो दक्षिण भारत का पारंपरिक पेसरट्टू एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के खानपान में बेहद लोकप्रिय यह डिश दिखने में भले ही सामान्य डोसे जैसी नजर आती है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी सामग्री और इसे बनाने का सरल तरीका है। यह व्यंजन मुख्य रूप से साबुत हरी मूंग से तैयार किया जाता है, जिसके चलते यह प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्वों का बेहतरीन जरिया बन जाता है।
पेसरट्टू की पहचान और इसका पारंपरिक स्वरूप
पारंपरिक दक्षिण भारतीय रसोई में पेसरट्टू को विशेष दर्जा प्राप्त है। सामान्य डोसे में जहां चावल और उड़द दाल का मिश्रण होता है और उसे खमीर उठाने के लिए रात भर छोड़ना पड़ता है, वहीं पेसरट्टू में ऐसा कोई झंझट नहीं होता। इसे बनाने के लिए हरी मूंग को कुछ घंटे भिगोने के बाद सीधे पीस लिया जाता है। इसके बाद तवे पर फैलाकर इसे दोनों तरफ से कुरकुरा होने तक पकाया जाता है। इसके घोल और टॉपिंग में प्याज, हरी मिर्च, अदरक और ताजी हरी धनिया का उपयोग इसके स्वाद को तीखा और चटपटा बना देता है। आमतौर पर इसे नारियल की चटनी, अदरक की चटनी या गरमागरम सांभर के साथ परोसा जाता है।
आवश्यक सामग्री की सूची
घर पर स्वादिष्ट पेसरट्टू बनाने के लिए बहुत सीमित और रसोई में आसानी से मिलने वाली चीजों की जरूरत पड़ती है। मुख्य सामग्री के तौर पर आपको साबुत हरी मूंग और थोड़ा सा चावल लेना होता है। इसके साथ ही स्वाद बढ़ाने के लिए ताजी हरी मिर्च, अदरक का टुकड़ा, बारीक कटी प्याज, ताजा हरा धनिया और जीरा चाहिए। पकाने के लिए जरूरत के अनुसार तेल या घी और स्वादानुसार नमक की आवश्यकता होती है।
बैटर तैयार करने का सही तरीका
इस व्यंजन को बनाने की शुरुआत दाल की तैयारी से होती है। सबसे पहले साबुत हरी मूंग को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और फिर लगभग 4 से 6 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रख दें। जब मूंग अच्छी तरह फूल जाए, तो अतिरिक्त पानी को पूरी तरह निकाल दें और दाल को मिक्सर जार में डालें।
इसके बाद जार में अदरक और हरी मिर्च डालें। पीसते समय थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाएं ताकि एक चिकना घोल बन सके। ध्यान रखें कि बैटर न तो बहुत ज्यादा गाढ़ा होना चाहिए और न ही जरूरत से ज्यादा पतला। जब मिश्रण पिस जाए, तो इसे एक बर्तन में निकालें और उसमें साबुत जीरा और स्वादानुसार नमक मिला लें। इस बैटर को फर्मेंट करने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती, इसलिए पीसने के तुरंत बाद इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे जीरे की खुशबू और ताजगी बरकरार रहती है। नमक डालते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि इसे बाद में नमकीन चटनी या सांभर के साथ खाया जाएगा, इसलिए घोल में नमक की मात्रा संतुलित ही रखें।
तवे पर सेंकने और परोसने की विधि
घोल तैयार होने के बाद गैस पर एक नॉन-स्टिक या लोहे का तवा अच्छी तरह गर्म करें। तवा जब पूरा गर्म हो जाए, तो उस पर थोड़ा सा पानी छिड़कें और कपड़े या टिशू से पोंछकर तापमान को सामान्य स्तर पर ले आएं। इसके बाद एक कलछी बैटर तवे के केंद्र में डालें और कलछी को गोलाकार घुमाते हुए बैटर को पतला फैलाएं। क्योंकि यह पूरी रेसिपी मुख्य रूप से हरी मूंग पर आधारित है, इसलिए यदि इसे बहुत कम तेल या घी में सेका जाए तो यह एक बेहद हल्का और सुपाच्य नाश्ता बन जाता है।
बैटर फैलाने के तुरंत बाद इसके ऊपर बारीक कटी हुई प्याज, कटी हरी मिर्च और हरा धनिया समान रूप से बुरक दें। अब किनारों पर और ऊपर हल्का सा तेल या घी डालें और मध्यम से धीमी आंच पर इसे पकने दें। जब निचली सतह सुनहरी और कुरकुरी होने लगे, तब इसे सावधानी से पलट दें और दूसरी तरफ भी थोड़ी देर हल्का सा सेक लें। इसके बाद इसे मोड़कर प्लेट में निकाल लें।
पेसरट्टू का असली आनंद अदरक की खास चटनी के साथ आता है, जो इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है। इसके अलावा आप इसे नारियल की चटनी, टमाटर की चटनी या गरमागरम सांभर के साथ भी खा सकते हैं। जो लोग ज्यादा तीखा पसंद करते हैं, वे ऊपर से अतिरिक्त कटी हरी मिर्च और प्याज डालकर इसका आनंद ले सकते हैं।


















