पड़ोसी देश नेपाल में एक अभूतपूर्व और विनाशकारी प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें मरने वालों का आंकड़ा 900 के पार पहुंच गया है और 4,000 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल और तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने और नदियों में अचानक आए उफान ने पर्वतीय क्षेत्रों में भारी तबाही फैलाई है, जिससे बुनियादी ढांचे को जबरदस्त नुकसान पहुंचा है।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह का बयान और जमीनी चुनौतियां
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने इस स्थिति को एक अकल्पनीय और हृदयविदारक त्रासदी करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार संकट से निपटने के लिए अपने तमाम संसाधनों का झोंक चुकी है। रसुवा जिले की भोटे कोशी नदी में आई भयंकर बाढ़ के कारण हुए नुकसान का पूरा जायजा लेना बेहद कठिन साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि खराब मौसम, बेहद दुर्गम इलाकों और लगातार मंडराते खतरों के बावजूद प्रशासन नागरिकों की हिफाजत के लिए पूरी दृढ़ता से जुटा हुआ है।
UN जलवायु प्रमुख की चिंता और हिंदू कुश हिमालय का संकट
इस भीषण आपदा ने हिंदू कुश हिमालय की भौगोलिक संवेदनशीलता को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने 30 अगस्त 2026 को एक बयान में कहा कि वैज्ञानिक और स्थानीय समुदाय लंबे समय से इस क्षेत्र पर मंडराते बड़े खतरे की चेतावनी देते आ रहे थे। नेपाल-चीन सीमा के करीब ग्लेशियर टूटने की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र अत्यधिक नाजुक स्थिति में पहुंच चुका है और जलवायु परिवर्तन इसका मुख्य उत्प्रेरक है।
शवों को सुरक्षित रखने की गंभीर चुनौती और विदेशी सहायता
बचाव कार्यों के दौरान बरामद किए जाने वाले शवों को संरक्षित करना और उनकी पहचान करना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी बाधा बन गया है। विदेश सचिव अमृत बहादुर राय ने जानकारी दी कि नेपाल को तुरंत फ्रीजर यूनिट्स और डीएनए परीक्षण किटों की आवश्यकता है ताकि शवों को सड़ने से रोका जा सके और स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों से निपटा जा सके। इसी बीच, चीन ने नेपाल की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग तथा प्रधानमंत्री ली कियांग ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। नेपाल में चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने नेपाली वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले को 35 करोड़ नेपाली रुपये यानी लगभग 20 लाख डॉलर का चेक सौंपा, इसके अलावा रेड क्रॉस सोसाइटी ऑफ चाइना की तरफ से 2,00,000 डॉलर की अतिरिक्त राशि भी प्रदान की गई।
चितवन में अस्थायी कब्रें और नेपाल सेना का अभियान
आपदा के केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर दक्षिण-मध्य नेपाल के चितवन जिले में भयंकर मंजर देखने को मिला, जहां नदियां अपने साथ भारी संख्या में शव बहाकर ले आईं। पहचान न हो पाने के दबाव और फॉरेंसिक टीमों की कमी के कारण प्रशासन को मजबूरन शनिवार को लगभग 100 पीड़ितों के शवों को अस्थायी गड्ढों में दफनाना पड़ा। एक घने जंगल वाले इलाके में बुलडोजर की मदद से लाल मिट्टी में बड़े गड्ढे खोदे गए, जहां अधिकारियों की मौजूदगी में इन शवों को दफनाया गया। इस बीच, नेपाल सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बस्नेत ने बताया कि सेना ने अपने खोज और बचाव अभियानों को बेहद व्यापक कर दिया है ताकि पहाड़ियों, बस्तियों और नदी के तटीय इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
उत्तर प्रदेश सीमा पर मिले शव
इस आपदा का असर भारत के पड़ोसी राज्यों तक भी महसूस किया गया है। उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में नारायणी-गंडक नदी से चार अज्ञात शव बरामद किए गए थे। 31 अगस्त 2026 को इन शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें नेपाल प्रशासन को आधिकारिक रूप से सौंप दिया गया। निचलौल के तहसीलदार अमित सिंह और अपर जिलाधिकारी प्रशांत कुमार की देखरेख में ठूठीबारी के पास महेशपुर सीमा पर नवलपरासी प्रशासन के अधिकारियों को ये शव एम्बुलेंस के माध्यम से सुपुर्द किए गए। नेपाल प्रशासन के साथ इन शवों के डीएनए नमूने भी साझा किए गए हैं ताकि लापता परिजनों की तलाश में मदद मिल सके।



















