नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की हिमालयी सीमा पर एक विशाल ग्लेशियर के टूटने से भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में आई प्रलयंकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक विभीषिका में जान गंवाने वालों का आंकड़ा बढ़कर 389 तक पहुंच गया है, जबकि 910 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा समेत नेपाल के कई पर्वतीय जिलों में बस्तियां, सड़कें, पुल और बुनियादी ढांचा पूरी तरह तबाही की चपेट में आ चुका है। जलप्रलय के समय कैलाश-मानसरोवर यात्रा और ट्रैकिंग पर गए लगभग 300 भारतीय पर्यटकों और श्रद्धालुओं का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। नेपाल सरकार, भारतीय दूतावास और विभिन्न राज्य प्रशासन लापता नागरिकों को सुरक्षित तलाशने और प्रभावित क्षेत्रों में आपात सहायता पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चला रहे हैं।
ग्लेशियर टूटने और मलबे के बहाव का वैज्ञानिक विश्लेषण
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 26 अगस्त को स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास 5.2 तीव्रता की भूकम्पीय हलचल दर्ज की गई थी। शुरुआती दौर में इसे साधारण भूकंप माना जा रहा था, लेकिन उपग्रह तस्वीरों और लंबी अवधि की भूकंपीय तरंगों के गहन अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि यह हलचल वास्तव में किसी भूकंपीय गतिविधि से नहीं, बल्कि एक विशाल ग्लेशियर के अचानक ढहने और चट्टानों के मलबे के भीषण बहाव से पैदा हुई थी। तापमान में वृद्धि और ग्लोबल वार्मिंग के कारण उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जमी हुई बर्फ और चट्टानों की ढलानें ढीली पड़ रही हैं। ग्लेशियर के टूटने से बर्फ, पानी, कीचड़ और मलबे का 170 किलोमीटर से भी लंबा सैलाब भोटेकोशी नदी घाटी में बह निकला, जिसने काठमांडू से तिब्बत के ल्हासा को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग और निचले इलाकों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
आपदा के कारण रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के ऊपरी प्रवाह क्षेत्र में मलबे के जमाव से एक विशाल कृत्रिम झील बन गई है। नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने चेतावनी जारी की है कि नदी का प्राकृतिक बहाव रुकने से बन रही यह झील कभी भी फट सकती है, जिससे निचले तटवर्ती इलाकों में दोबारा अचानक बाढ़ आ सकती है। चीनी और नेपाली अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले सभी लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने का आग्रह किया है और झील पर निरंतर हवाई नजर रखी जा रही है।
तबाही का दायरा और मौतों का बढ़ता आंकड़ा
नेपाल पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियों द्वारा जारी अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन के कारण विभिन्न जिलों में व्यापक जनहानि हुई है। चितवन जिले में सबसे अधिक 64 लोगों की मौत दर्ज की गई है, जबकि धाडिंग में 27, नवलपरासी पूर्व में 26, गोरखा में 20, नुवाकोट में 12, तनहुं में 9, नवलपरासी पश्चिम में 5 और रसुवा में 2 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। तिब्बत के गिरोंग काउंटी में भी सीमा चेकपोस्ट के पास भूस्खलन और बाढ़ से 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिससे सीमा के दोनों ओर कुल मौतों का आंकड़ा 392 के पार जा चुका है।
लापता 910 से अधिक व्यक्तियों में नेपाल के 85 सशस्त्र बल कर्मी, विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं और सीमा शुल्क कार्यालयों के 162 कर्मचारी तथा 579 से अधिक स्वदेशी व विदेशी पर्यटक शामिल हैं। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार तिब्बत से आए इस मलबे के बहाव के कारण भोटेकोशी और त्रिशूली नदी गलियारे में स्थित 13 जलविद्युत परियोजनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। त्रिशूली-I जलविद्युत परियोजना स्थल पर फंसे 63 भारतीय कर्मचारियों को कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाल लिया गया है।
विभिन्न भारतीय राज्यों के फंसे पर्यटक और राज्यवार स्थिति
बाढ़ प्रभावित नेपाल और तिब्बत में भारत के कई राज्यों से गए पर्यटक और तीर्थयात्री फंसे हुए हैं, जिनके लिए संबंधित राज्य सरकारों ने राहत और हेल्पलाइन केंद्र शुरू किए हैं
- पश्चिम बंगाल: कोलकाता से 21 अगस्त को रवाना हुआ 32 सदस्यीय दल नेपाल में लापता है। इस दल में 30 पर्यटक और 2 टूर प्रबंधक शामिल हैं, जिनमें 21 वरिष्ठ नागरिक हैं। दिवंगत नेता मुकुल रॉय की बहू शर्मिष्ठा भौमिक रॉय भी इस दल का हिस्सा हैं। राज्य सरकार ने भवानी भवन स्थित पुलिस मुख्यालय में हेल्पलाइन (033) 24793311 और 9147890181 स्थापित की है।
- तमिलनाडु: राज्य के 57 तीर्थयात्री नेपाल में फंसे थे। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि अन्य 83 नागरिक सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। परिजनों के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800 309 3793, +91 80690 09900 और +91 80690 09901 जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने दिल्ली और काठमांडू में सहायता कार्यों की निगरानी के लिए 4 मंत्रियों की टीम और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को तैनात किया है।
- केरल: लगभग 30 पर्यटकों के बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे होने की आशंका है। NoRKA-Roots के माध्यम से टोल-फ्री नंबर 1800 425 3939 और +91 88020 12345 पर सहायता प्रदान की जा रही है।
- कर्नाटक: राज्य के 13 नागरिक नेपाल में फंसे हैं, जिनमें बेंगलुरु के 8 लोग शामिल हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में 10 वर्षों से रह रहे 45 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर राकेश नायक भी मानसरोवर यात्रा के दौरान लापता हैं। रत्तीहल्ली (हावेरी) के 12 लोग पोखरा में सुरक्षित हैं। कर्नाटक आपातकालीन केंद्र ने हेल्पलाइन 1070 और 080-22253707 शुरू की है।
- महाराष्ट्र: राज्य के 114 पर्यटक नेपाल में फंसे हुए हैं, जिनमें से 53 लोगों के सागा मानसरोवर क्षेत्र में सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है। 61 नागरिक रिचा टूर्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिए यात्रा पर गए थे।
- अन्य राज्य: गुजरात के 11 नागरिक, छत्तीसगढ़ के रायपुर की मोनिका यादव और मध्य प्रदेश व मेघालय के कई पर्यटक संपर्क से बाहर हैं। सभी राज्यों ने अपने-अपने आपदा नियंत्रण कक्ष स्थापित कर विदेश मंत्रालय से तालमेल बिठाया है।
भारत सरकार का राहत अभियान और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से टेलीफोन पर वार्ता कर आपदा पर गहरा दुख जताया और हरसंभव मानवीय सहायता देने का आश्वासन दिया। भारत सरकार ने नेपाल को त्वरित राहत पहुंचाने के लिए दो सैन्य विमानों के माध्यम से राहत सामग्री भेजी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि 37.5 टन HADR (मानवीय सहायता और आपदा राहत) सामग्री, आवश्यक दवाओं और भोजन पैकेट की दूसरी खेप काठमांडू पहुंचा दी गई है। विदेश मंत्रालय में 24 घंटे सक्रिय रहने वाला कंट्रोल रूम खोला गया है (फोन: +91 11 2308 8718 / 8719, व्हाट्सएप: +91 9968291988)। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन (+977 985 131 6807, +977 970 910 7500, +977 981 032 6117) जारी की है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नेपाल और चीन में हुई तबाही पर शोक व्यक्त करते हुए आपात राहत कार्यों के लिए 20 लाख डॉलर जारी किए हैं। ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय और प्रधानमंत्री एडी बर्नहैम ने संवेदना व्यक्त करते हुए 50 लाख पाउंड (68 लाख डॉलर) की आर्थिक मदद का ऐलान किया है। इसके अलावा श्रीलंका सरकार ने भी नेपाल को 10 लाख डॉलर की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। चीन के प्रधानमंत्री ली च्यांग ने तिब्बत के बाढ़ प्रभावित गिरोंग क्षेत्र का दौरा कर राहत कार्यों का निरीक्षण किया।
भारतीय सीमावर्ती जिलों में अलर्ट और सुरक्षा उपाय
नेपाल की नदियों में आए उफान को देखते हुए भारत के सीमावर्ती राज्यों बिहार और उत्तर प्रदेश में सतर्कता बढ़ा दी गई है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वाल्मीकिनगर, बगहा, बेटिया और मोतिहारी में बाढ़ की स्थिति का हवाई सर्वेक्षण किया। गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने पर वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 फाटकों को खोल दिया गया था, जहां से 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। हालांकि 27 अगस्त की सुबह जलस्तर घटकर 1.04 लाख क्यूसेक रह गया है, जिससे तटीय इलाकों को राहत मिली है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में हाई अलर्ट जारी है, जहां सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों ने गंडक नदी से तेज बहाव में बहकर आए 3 अज्ञात शवों को बरामद किया है। यूपी सरकार ने नेपाल में सहायता के लिए 32 सदस्यीय SDRF टीम और 22 पीएसी जवानों को भेजा है। दिल्ली सरकार ने सुरक्षा कारणों से 28 और 29 अगस्त के लिए भारत-नेपाल मैत्री बस सेवा को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है।



















