पश्चिम एशिया में जारी भारी संघर्ष के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को पूरी तरह से तबाह करने की चेतावनी दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार, 26 जून 2026 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि तेहरान की ओर से संघर्षविराम की शर्तों का उल्लंघन जारी रहा और अमेरिकी बलों को दोबारा युद्ध शुरू करने पर विवश किया गया, तो इस्लामी गणराज्य ईरान का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों के विरोध में अमेरिकी वायुसेना ने ईरानी ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए हैं। इस ताजा सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्र में बने एक नाजुक शांति समझौते को गंभीर संकट में डाल दिया है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिकी हवाई हमलों का सिलसिला
अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने शनिवार, 27 जून 2026 को पुष्टि की कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे निर्देश पर ईरान के भीतर 10 महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। तड़के अंजाम दिए गए इस ऑपरेशन में अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान की खुफिया निगरानी अवसंरचना, संचार प्रणालियों, वायु रक्षा प्रणालियों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमताओं को नष्ट कर दिया। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ये ठिकाने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास स्थित थे, जो वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस परिवहन के लिए एक रणनीतिक गलियारा माना जाता है।
इस सैन्य हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिकी युद्धक विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर हमले किए हैं, क्योंकि तेहरान ने एक बार फिर युद्धविराम समझौते का खुला उल्लंघन किया है। डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में आगे लिखा कि एक ऐसा समय आ सकता है जब संयम बनाए रखना संभव नहीं होगा और अमेरिका को उस सैन्य अभियान को अंतिम अंजाम तक पहुंचाना पड़ेगा जिसे पहले बेहद प्रभावी तरीके से शुरू किया गया था। उन्होंने साफ किया कि यदि ऐसी परिस्थिति बनी, तो ईरान का पूरी तरह से खात्मा तय है।
कुवैत और बहरीन में हवाई हमले के सायरन और जवाबी कार्रवाई
ईरान पर अमेरिकी हमलों के तत्काल बाद रविवार, 28 जून 2026 को खाड़ी देशों में भी युद्ध की लपटें फैल गईं। कुवैत और बहरीन में हवाई हमले के सायरन गूंज उठे, जिससे वहां के नागरिकों में दहशत फैल गई। कुवैती सेना ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने आने वाले दुश्मनाना मिसाइलों और ड्रोनों का हवा में ही सामना किया और उन्हें नष्ट कर दिया। इसके साथ ही बहरीन के गृह मंत्रालय ने भी हवाई हमले के सायरन बजने की पुष्टि की और अपने नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की।
इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए ईरान के अर्धसैनिक बल इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कोर (IRGC) ने घोषणा की कि उन्होंने अपनी जमीन पर हुए अमेरिकी हमलों का बदला लेने के लिए कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन दागे हैं। ईरानी बलों का दावा है कि उन्होंने कुवैत में अली अल-सलेम एयर बेस और बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय, पोर्ट सलमान सहित कुल आठ अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। ईरानी सैन्य कमांडरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके खिलाफ दोबारा आक्रामकता दिखाई गई, तो इससे भी अधिक विनाशकारी और कुचलने वाला जवाब दिया जाएगा।
लेबनान और सीरिया में इज़राइली सैन्य अभियान और विरासत स्थलों को क्षति
इस क्षेत्रीय तनाव के बीच, इज़राइली सेना ने भी कई मोर्चों पर अपने सैन्य अभियानों को तेज कर दिया है। रविवार, 28 जून 2026 को इज़राइली रक्षा बलों ने दावा किया कि उन्होंने दक्षिणी सीरिया में एक स्वघोषित सुरक्षा क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश कर रहे कई सशस्त्र आतंकवादियों को मार गिराया है। इज़राइल वर्ष 2024 के अंत से ही इस सीरियाई सुरक्षा क्षेत्र पर काबिज है और उसका कहना है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए वहां सैन्य उपस्थिति बनाए रखेगा।
इसके साथ ही, लेबनान के नबातीह क्षेत्र में भी इज़राइली बलों ने हिजब्बुलाह के रॉकेट लॉन्चरों और रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड से लैस लड़ाकों को निशाना बनाया। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान दीर सेरयान क्षेत्र में एक संदिग्ध इमारत की तलाशी लेते समय हिजब्बुलाह लड़ाकों के साथ मुठभेड़ में इज़राइली प्लाटून कमांडर, 21 वर्षीय कैप्टन डेविड हज़ूत मारे गए। इस मुठभेड़ में एक अन्य इज़राइली सैनिक मामूली रूप से घायल हुआ है। इस मौत के बाद मार्च से शुरू हुए इस युद्ध में इज़राइल के सैन्य नुकसान का आंकड़ा बढ़कर 38 सैनिकों और एक नागरिक ठेकेदार तक पहुंच गया है।
दूसरी ओर, लेबनान के संस्कृति मंत्री गसान सलामे ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इज़राइल के चार महीने के सैन्य अभियान ने दक्षिणी लेबनान में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को भारी नुकसान पहुंचाया है। टायर शहर में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल एक प्राचीन स्तंभ का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है, जबकि नबातीह में ममलुक-काल के एक ऐतिहासिक बाजार को नष्ट कर दिया गया है। संस्कृति मंत्री के अनुसार, इज़राइली सेना अभी भी लेबनान के भीतर 10 किलोमीटर तक के सुरक्षा क्षेत्र पर कब्जा जमाए हुए है, जिसके कारण नुकसान का सटीक आकलन करना बेहद कठिन हो गया है।
राजनयिक गतिरोध, द्विपक्षीय वार्ता का बहिष्कार और क्षेत्रीय समीकरण
अमेरिका और ईरान के बीच हुए 60 दिनों के अंतरिम समझौते को इस नए तनाव ने गहरे संकट में डाल दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हवाई हमलों को बर्बर बताते हुए इसे शांति समझौते का खुला उल्लंघन करार दिया। इसके विरोध स्वरूप, ईरान ने सोमवार, 29 जून 2026 को होने वाली तकनीकी वार्ता में भाग लेने से इनकार कर दिया। ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय के सदस्य मेहदी फज़ैली ने सरकारी टेलीविजन पर बताया कि अमेरिका द्वारा एमओयू की शर्तों को पूरा न करने और ईरान के अनफ्रीज किए गए फंड तक उसकी पहुंच बहाल न होने के कारण यह फैसला लिया गया है।
हालांकि, बाद में कूटनीतिक सूत्रों से जानकारी मिली कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर सैन्य हमले रोकने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों के बेरोकटोक आवागमन को अनुमति देने पर सहमत हो गए हैं। इस गतिरोध को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के बीच मंगलवार, 30 जून 2026 को कतर की राजधानी दोहा में एक उच्च स्तरीय तकनीकी बैठक प्रस्तावित है। इस बीच, इराक के विदेश मंत्री फुआद हुसैन ने बगदाद में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची से मुलाकात कर क्षेत्र में शांति बहाली की अपील की। अब्बास अराक्ची ने स्पष्ट चेतावनी दी कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण को चुनौती देने के किसी भी प्रयास से तनाव और बढ़ेगा।
वैश्विक बाजार पर प्रभाव, नौवहन निर्देश और विमानन सुरक्षा
इस सैन्य टकराव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और परिवहन प्रणालियों पर देखा जा रहा है। सोमवार, 29 जून 2026 को कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 50 सेंट यानी 0.69 प्रतिशत बढ़कर 72.49 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 73 सेंट यानी 1.05 प्रतिशत की तेजी के साथ 69.96 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। व्यापारियों को डर है कि इस संघर्ष से समुद्री व्यापार मार्गों पर आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
इसी सुरक्षा संकट को देखते हुए भारत के नौवहन महानिदेशालय (DGS) ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों की आवाजाही पर लगी पुरानी पाबंदियों को वापस ले लिया है, लेकिन समुद्री ऑपरेटरों को अतिरिक्त सावधानी बरतने और नौवहन चेतावनियों पर पैनी नजर रखने की सख्त हिदायत दी है। दूसरी ओर, कतर के आंतरिक मंत्रालय ने बताया कि खाड़ी में सैन्य अभियानों के दौरान दुर्घटनावश छर्रे लगने से एक कतरी नागरिक की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। तनाव के बीच ही, तेहरान और दुबई के बीच उड़ान सेवाओं को 29 जून से दोबारा बहाल करने की घोषणा की गई है, जिससे कुछ हद तक नागरिक हवाई यातायात को राहत मिलने की उम्मीद है।
लेबनान में आंतरिक राजनीतिक कलह और सीरियाई समीकरण पर विवाद
लेबनान और इज़राइल के बीच वॉशिंगटन में हुए त्रिपक्षीय शांति समझौते को लेकर लेबनान के भीतर ही गंभीर राजनीतिक मतभेद उभर आए हैं। हिजब्बुलाह समर्थित संसद अध्यक्ष नबीह बेरी ने इस समझौते को खारिज करते हुए कहा कि यह लेबनान पर थोपा गया एक अनुचित समझौता है जो देश के संप्रभु अधिकारों की रक्षा नहीं करता है। हिजब्बुलाह के सांसद हसन फदलाल्लाह ने चेतावनी दी कि यदि इस समझौते को जबरन लागू करने का प्रयास किया गया तो लेबनान में आंतरिक गृहयुद्ध छिड़ सकता है, जबकि हिजब्बुलाह प्रमुख नईम कासिम ने इसे संप्रभुता का आत्मसमर्पण करार दिया है।
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया की नई इस्लामी विद्रोही सरकार को हिजब्बुलाह के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने का सुझाव देकर क्षेत्र के देशों को चौंका दिया है। डेढ़ साल पहले बशर अल-असद का तख्तापलट करने वाले सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने इस प्रस्ताव में अपनी रुचि होने से इनकार किया है, लेकिन इस नए भू-राजनीतिक समीकरण ने इज़राइल और लेबनान की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।



















