मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित लाल परेड ग्राउंड पर 6 अक्टूबर को युवाओं की ऊर्जा, आधुनिक तकनीक और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्यभर से जुटे हजारों छात्र-छात्राओं और युवा उद्यमियों के साथ सीधा संवाद साधा और प्रदेश के चौमुखी विकास का व्यापक खाका सामने रखा। इस भव्य आयोजन में न केवल रोजगार, उच्च शिक्षा और स्टार्टअप्स को नई दिशा देने वाली ऐतिहासिक घोषणाएं की गईं, बल्कि युवाओं के तीखे और महत्वपूर्ण सवालों के मुख्यमंत्री ने बेहद संजीदगी से जवाब भी दिए। पूरे कार्यक्रम के दौरान आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का रोमांच और लोक संस्कृति का सरोकार एक साथ नजर आया।
प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए सौगातों की बौछार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं के भविष्य को संवारने के लिए कई बड़े नीतिगत फैसलों का ऐलान किया। राज्य में प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के हित में फैसला लेते हुए उन्होंने कहा कि अगले साल से लोक सेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाएगी, जिसमें नियमित वार्षिक परीक्षा के साथ-साथ एक विशेष परीक्षा भी शामिल होगी। इसके अतिरिक्त, सरकारी कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क तैयारी कराने के लिए विशेष कोचिंग कक्षाएं शुरू की जाएंगी।
उच्च शिक्षा के स्तर पर गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने पीएचडी और रिसर्च स्कॉलर्स को मिलने वाली मासिक छात्रवृत्ति को 16 हजार रुपये से सीधे बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रति माह करने का फैसला किया है। इसके साथ ही, शोध संस्थानों को मजबूती देने के लिए विश्वविद्यालय निधि से 1 करोड़ रुपये का विशेष शोध फंड तैयार किया जाएगा। राज्य के सभी शासकीय महाविद्यालयों में आधुनिक एआई और एडवांस कंप्यूटिंग लैब्स स्थापित की जाएंगी, ताकि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों से आने वाले युवा भी अत्याधुनिक तकनीक में पारंगत हो सकें।
चिकित्सा, कौशल विकास और नवाचार का नया आधारभूत ढांचा
प्रदेश के युवाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर उच्च व तकनीकी शिक्षा और रोजगार दिलाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगले वर्ष राज्य में 12 नए मेडिकल कॉलेज और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए 12 नई स्किल यूनिवर्सिटी शुरू की जाएंगी। राज्य के 1 लाख युवाओं को बड़े पैमाने पर कौशल उन्नयन योजना से जोड़कर उन्हें उद्योग जगत की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। युवाओं के व्यवस्थित करियर और प्लेसमेंट के लिए सरकार एक पेशेवर नोडल एजेंसी भी नियुक्त करने जा रही है, जो सीधे तौर पर युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ेगी।
नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए 5 करोड़ रुपये का एक समर्पित 'आइडिया फंड' बनाया गया है, जिसके जरिए नए विचारों को आर्थिक मदद दी जाएगी। साथ ही, युवा वर्ष 2027 के लिए एक खास डिजिटल पोर्टल की शुरुआत की जा रही है, जहां युवा प्रदेश के विकास के लिए अपने सुझाव और आइडियाज सीधे सरकार के साथ साझा कर सकेंगे, जिन्हें नीतियों में लागू किया जाएगा। सामाजिक सहभागिता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की 500 नई इकाइयां भी गठित की जाएंगी।
महिला सशक्तिकरण और छात्राओं के लिए योजनाओं का विस्तार
महिला सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री ने स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर की छात्राओं को भी राज्य की प्रसिद्ध 'गांव की बेटी योजना' और 'प्रतिभा किरण योजना' के दायरे में शामिल करने की घोषणा की। इससे उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही ग्रामीण और होनहार बालिकाओं को सीधी वित्तीय सहायता मिलेगी। इसके अलावा, करियर बनाने के लिए शहरों में रहने वाली युवतियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के प्रत्येक संभाग मुख्यालय पर कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित हॉस्टल बनाए जाएंगे।
कृषि, एआई और स्टार्टअप्स पर युवाओं के तीखे सवाल और सीएम के जवाब
संवाद सत्र के दौरान विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं ने मुख्यमंत्री से सीधे सवाल किए। मायशा खान ने जब कृषि क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी पर सवाल पूछा, तो मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार खेतों से लेकर फूड प्रोसेसिंग तक एक मजबूत वैल्यू चेन तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में युवाओं ने कृषि के नए प्रयोग किए हैं और अब राज्य में ड्रैगन फ्रूट की खेती भी सफलतापूर्वक हो रही है। सरकार ने पौने 14 लाख किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया है। आने वाले समय में किसानों को दिन के समय ही 10 घंटे निर्बाध बिजली दी जाएगी, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा मिलेगा और दुग्ध उत्पादन में भारी बढ़ोतरी की जाएगी।
छात्रा ईशा बारस्कर ने जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टार्टअप्स के लिए सरकारी नीतियों की जानकारी मांगी, तो मुख्यमंत्री ने विस्तार से बताया कि भोपाल में एआई सिटी, नॉलेज सिटी और साइंस सिटी का निर्माण तेजी से चल रहा है। सेमीकंडक्टर निर्माण से लेकर हर आधुनिक सेक्टर में प्रोत्साहन दिया जा रहा है। स्टार्टअप स्थापित करने वाले हर पात्र युवा को 5 लाख रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार युवाओं को नौकरी मांगने वाले के बजाय रोजगार देने वाला उद्यमी बनाना चाहती है। इसी विजन के तहत इंदौर, रीवा और उज्जैन में आईटी पार्क और ग्वालियर में विशेष टेलीकॉम जोन स्थापित किए जा रहे हैं।
खेल हब के रूप में उभरता मध्यप्रदेश और सांस्कृतिक चेतना
लक्ष्य श्रीवास्तव द्वारा मध्यप्रदेश को स्पोर्ट्स हब बनाने की योजना पर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर का विशाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है। सरकार खेल को एक विषय के रूप में शामिल कर चुकी है और प्रशिक्षकों (कोच) के प्रमोशन की व्यवस्था की गई है। आने वाले समय में हर विधानसभा क्षेत्र में स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने गर्व जताते हुए कहा कि एशियाई खेलों में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 5 स्वर्ण पदक जीते हैं और शूटिंग तथा तीरंदाजी में भी राज्य के खिलाड़ी लगातार पदक हासिल कर रहे हैं। साल 2027 में खेल सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में रहेगा।
छात्रा अपर्णा ने सोशल मीडिया के युग में संस्कृति से जुड़े रहने पर सवाल किया, जिसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति प्रकृति प्रेम, नदियों, पहाड़ों और वृक्षों के पूजन तथा 'जियो और जीने दो' के शाश्वत सिद्धांत पर टिकी है। उन्होंने इसी भावना का उदाहरण देते हुए पायलट स्मित मच्छार का उल्लेख किया, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर 174 यात्रियों की जान बचाई। उन्होंने धार्मिक पर्यटन की प्रगति बताते हुए कहा कि पिछले वर्ष मध्यप्रदेश में 13 करोड़ पर्यटक आए और अब उज्जैन में महाकाल का लड्डू प्रसाद एटीएम मशीन की तर्ज पर उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, डॉ. निशा चटर्जी के नशे की लत से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2029 तक प्रदेश को पूरी तरह नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है और इसके खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई की जा रही है।
विकसित भारत 2047 और मध्यप्रदेश का बुनियादी ढांचा
अनिकेत तिवारी द्वारा वर्ष 2047 के विकसित भारत के विजन और युवाओं की भूमिका पर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के तेजी से बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि आजादी के पहले मध्यप्रदेश में सिर्फ चार हवाई अड्डे जबलपुर (1930), ग्वालियर (1935), भोपाल (1940) और इंदौर (1947-48) में बने थे। इसके बाद 1977 में खजुराहो हवाई अड्डा शुरू हुआ, लेकिन दशकों तक एयर कनेक्टिविटी ठप रही। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सतना, रीवा और दतिया जैसे शहरों में हवाई सेवाओं का विस्तार हुआ है और हर 150 किलोमीटर के दायरे में एयर स्ट्रिप बनाने की योजना पर काम चल रहा है। राज्य में लगभग 10 हवाई अड्डों और एयर स्ट्रिप्स के विकास कार्य प्रगति पर हैं, जिनमें से कई इसी साल पूरे हो जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने आधुनिक तकनीकों का जिक्र करते हुए कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन जैसी अत्याधुनिक तकनीक अब हकीकत बन रही है। भोपाल और इंदौर में मेट्रो ट्रेन की शुरुआत से शहरी परिवहन में क्रांतिकारी बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार वर्ष 2027 में फिर से ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) का आयोजन करने जा रही है, जिससे राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
प्रदर्शनी, रोबोट की मौजूदगी और कबीर कैफे का सुरमयी जादू
कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री ने 15 से अधिक शासकीय विभागों और निजी संस्थाओं द्वारा लाल परेड मैदान पर लगाई गई 80 से अधिक स्टॉल्स की भव्य प्रदर्शनी का मुआयना किया। इस प्रदर्शनी में तकनीकी कौशल, उच्च शिक्षा, स्वरोजगार योजनाओं और करियर गाइडेंस से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदर्शित की गई थीं।
मंच पर जब एआई ह्यूमनॉइड रोबोट 'बडी' ने चहलकदमी की, तो हजारों युवाओं ने करतल ध्वनि से उसका स्वागत किया। इसके बाद कबीर कैफे और प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। नीरज आर्य के कबीर कैफे द्वारा गाए गए सूफी कलाम और 'झीनी-झीनी बीनी चदरिया' के सुरों पर पूरा पंडाल झूम उठा। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि राज्य में बेरोजगारी दर देश में सबसे कम है और अब तक 85 हजार लोगों को सरकारी व संगठित रोजगार दिया जा चुका है। उन्होंने आने वाले वर्ष को 'युवा वर्ष' के रूप में मनाने की घोषणा करते हुए सभी युवाओं से मध्यप्रदेश को देश का सिरमौर राज्य बनाने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।























