उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान पर आने से गंभीर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे पिछले 90 वर्षों के रिकॉर्ड टूट गए हैं। इस आपदा के कारण कई रिहायशी इलाकों में पानी भर गया है और मकानों की एक-एक मंजिल तक जलमग्न हो गई है। प्रभावित घरों के भीतर पांच फीट तक कीचड़ और भारी गंदगी जमा हो गई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
मंदाकिनी नदी का रौद्र रूप और तबाही
प्रशासन और राहत एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से चित्रकूट के कई पुल, आश्रम, दुकानें और सड़कें पूरी तरह डूब गई हैं। राम घाट के आसपास का इलाका बुरी तरह प्रभावित हुआ है और बाढ़ के पानी के उतरने के बाद हर तरफ बर्बादी के निशान दिखाई दे रहे हैं। निचले इलाकों में स्थित तिरहार क्षेत्र भी बाढ़ के पानी से घिर गया है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सेना और राहत दलों का रेस्क्यू ऑपरेशन
इस भीषण आपदा में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सेना को मैदान में उतारा गया है। राहत और बचाव कार्यों के तहत सेना ने बाढ़ के बीच फंसे करीब 800 से 1000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। इसके अलावा, राहत कार्यों में हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली जा रही है ताकि दुर्गम स्थानों पर फंसे लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके। इस जलप्रलय की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत की भी पुष्टि हुई है।
मुख्यमंत्री का दौरा और प्रशासनिक जायजा
हालात का जायजा लेने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और स्थिति की समीक्षा की। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री बांटने और साफ-सफाई के काम में जुटी हुई हैं। हालांकि अब मंदाकिनी नदी का जलस्तर लाल निशान से नीचे पहुंच गया है, लेकिन घरों और दुकानों में जमी मोटी कीचड़ के कारण लोगों को सामान्य स्थिति में लौटने में काफी वक्त लगेगा।





















