राष्ट्रीय राजधानी के राजनीतिक हलकों में उस समय हलचल तेज हो गई जब निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया के तहत बड़े नेताओं को नोटिस जारी कर दिए। आयोग ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एसआईआर नोटिस थमाया है। इसके साथ ही मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी ऐसा ही नोटिस भेजा गया है, जिससे चुनावी दस्तावेजों को लेकर प्रशासनिक सख्ती साफ नजर आने लगी है।
डिजिटल मैपिंग में मिली तार्किक खामियां
निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची के डिजिटलीकरण और डिजिटल मैपिंग के दौरान कुछ तार्किक विसंगतियां पकड़ी गईं। इन गड़बड़ियों के सामने आने के बाद आयोग ने सख्त रुख अख्तियार किया और साफ किया कि तय मानकों के मुताबिक प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध कराना अनिवार्य है। सत्यापन के बिना किसी भी प्रविष्टि को मान्य नहीं माना जाएगा, इसी वजह से नेताओं से आवश्यक रिकॉर्ड की मांग की गई है।
दस्तावेज जमा न होने पर बढ़ेगी उलझन
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब यह सवाल चर्चा का विषय बन गया है कि क्या समय रहते उचित कागजात न देने पर मतदाता सूची से नाम कटने का खतरा पैदा हो सकता है। निर्वाचन नियमों के तहत हर नागरिक और प्रतिनिधि को अपनी प्रविष्टियों की वैधता साबित करनी होती है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर अपेक्षित दस्तावेज आयोग के समक्ष पेश नहीं किए जाते, तो यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा मोड़ ले सकता है।





















