राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों और उसके बाद हुए पुनर्मतदान के नतीजों के बाद अब राज्य की राजनीति में नए समीकरण उभर रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों के महापौर और कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए 25 सितंबर की तारीख की घोषणा के साथ ही नए सिरे से राजनीतिक जोड़-तोड़ शुरू हो गई है। इन स्थानीय निकायों में प्रारंभिक मतदान के दौरान कुछ मतदान केंद्रों पर मशीनरी की गड़बड़ियों के कारण मतदान प्रक्रिया बाधित हुई थी, जिसके बाद प्रशासन ने कई बूथों पर दोबारा मतदान कराने का फैसला किया था। अब जब पुनर्मतदान के अंतिम आंकड़े पूरी तरह स्पष्ट हो चुके हैं, तो स्थानीय निकायों के शीर्ष पदों पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस पूरी चुनावी प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए एक विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है। इस चुनावी जंग की शुरुआत के लिए 18 सितंबर को आधिकारिक रूप से लोक सूचना जारी की गई। जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर और सुकेत नगरपालिका में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों को अपने नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए 19 सितंबर तक का समय दिया गया है। इसके बाद, उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की संवीक्षा यानी जांच 21 सितंबर को की जाएगी, जबकि अपना नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 22 सितंबर तय की गई है।
चुनाव और मतदान का पूरा कार्यक्रम
इन चारों निकायों के प्रमुखों को चुनने के लिए वास्तविक मतदान प्रक्रिया 25 सितंबर को आयोजित की जाएगी। इसके लिए मतदान का समय सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक निर्धारित किया गया है, जिसमें निर्वाचित पार्षद अपने मतों का प्रयोग करेंगे। निर्वाचन अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने की तैयारी की है कि मतदान समाप्त होते ही मतों की गिनती तुरंत शुरू कर दी जाए। मतगणना पूरी होने के तुरंत बाद उसी शाम अंतिम परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे, जिससे मतदान मशीनों में तकनीकी खराबी के कारण पैदा हुई अनिश्चितता और प्रशासनिक देरी पर विराम लग जाएगा।
हालांकि, 25 सितंबर को महापौर और अध्यक्ष पद की घोषणा के साथ ही यह चुनावी प्रक्रिया समाप्त नहीं होगी। इसके अगले ही दिन, यानी 26 सितंबर को, तीनों नगर निगमों में उप महापौर और सुकेत नगरपालिका में उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराए जाएंगे। यह पूरी प्रक्रिया एक ही दिन में बहुत तेजी से पूरी की जाएगी। इसके लिए 26 सितंबर को सुबह 10:00 बजे नवनिर्वाचित पार्षदों की बैठक शुरू होगी, जिसके बाद उम्मीदवार सुबह 11:00 बजे तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। नामांकनों की संवीक्षा सुबह 11:30 बजे की जाएगी, और उम्मीदवार दोपहर 2:00 बजे तक अपने नाम वापस ले सकेंगे। यदि आवश्यकता पड़ी, तो दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक मतदान कराया जाएगा, और उसके तुरंत बाद मतों की गिनती कर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
जयपुर में कांग्रेस ने दर्ज की बड़ी जीत
पुनर्मतदान के बाद राजधानी जयपुर के राजनीतिक समीकरणों में कांग्रेस को बड़ी राहत मिली है। जयपुर नगर निगम के कुल 150 वार्डों में से चार विशिष्ट वार्डों के पांच मतदान केंद्रों पर 16 सितंबर को पुनर्मतदान कराया गया था, क्योंकि इन बूथों पर EVM में तकनीकी खराबी के कारण मतदान प्रभावित हुआ था। इन चारों वार्डों के पुनर्मतदान में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्लीन स्वीप किया है। इस जीत ने निगम में कांग्रेस की स्थिति को काफी मजबूत किया है, हालांकि वह अभी भी अपने प्रतिद्वंद्वी दल से पीछे है।
जयपुर के इन चारों वार्डों के व्यक्तिगत परिणामों पर नजर डालें तो कांग्रेस उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। वार्ड संख्या 9 से कांग्रेस की कैलाशी देवी ने 764 मतों के अंतर से जीत हासिल की। वार्ड संख्या 18 से वंदिता शर्मा ने 181 मतों के अंतर से अपनी सीट सुरक्षित की। वहीं, वार्ड संख्या 25 में रेखा देवी 397 मतों के अंतर से विजयी रहीं और वार्ड संख्या 34 में सुरेश यादव ने 149 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। पुनर्मतदान से पहले, 150 वार्डों वाले जयपुर नगर निगम में कांग्रेस के पास 53 सीटें थीं, जो अब बढ़कर 57 हो गई हैं। दूसरी ओर, भाजपा 78 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में मजबूत स्थिति में बनी हुई है, जबकि निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के उम्मीदवारों के पास कुल 15 सीटें हैं।
जोधपुर में निर्दलीय बने किंगमेकर
जोधपुर नगर निगम में मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा हो गया है, जहां दोनों प्रमुख दल लगभग बराबर की स्थिति में खड़े हैं। यहां का चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से वार्ड संख्या 50 के मतदान केंद्र संख्या 338 पर हुए पुनर्मतदान पर केंद्रित था। इस महत्वपूर्ण मुकाबले में भाजपा के उम्मीदवार हेमाराम चौधरी ने जीत हासिल की, जिससे उनकी पार्टी की सीटों की संख्या में एक सीट का इजाफा हुआ। इससे पहले, 14 सितंबर को घोषित हुए शुरुआती नतीजों में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 100 वार्डों वाले इस निगम में बराबर यानी 44-44 सीटें मिली थीं।
पुनर्मतदान के इस परिणाम के बाद अब भाजपा के पास 45 सीटें हो गई हैं, जबकि कांग्रेस 44 सीटों पर ही टिकी हुई है। इसके अलावा, निगम की एक सीट राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के खाते में है और 10 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। चूंकि किसी भी दल के पास बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं है, इसलिए महापौर के चुनाव में इन 10 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो गई है। दोनों ही दल अब इन निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में लाने की कोशिशों में जुट गए हैं ताकि जोधपुर में अपना महापौर बना सकें।
कोटा नगर निगम में भाजपा को मिला बहुमत
कोटा नगर निगम में पुनर्मतदान के बाद समीकरण पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में झुक गए हैं। कोटा के वार्ड संख्या 11, 44 और 87 के एक-एक मतदान केंद्र पर दोबारा मतदान कराया गया था। इन तीन सीटों के लिए हुए मुकाबले में भाजपा ने दो सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा। वार्ड संख्या 44 में भाजपा के प्रेम सिंह और वार्ड संख्या 87 में भाजपा की ही पुष्पा चौधरी ने अपनी जीत दर्ज की। वहीं, कांग्रेस को वार्ड संख्या 11 में सफलता मिली, जहां उनकी उम्मीदवार कमलेश कुमारी विजयी रहीं।
इन नतीजों ने 100 वार्डों वाले कोटा नगर निगम में भाजपा की स्थिति को बेहद मजबूत कर दिया है। पुनर्मतदान के बाद भाजपा के पार्षदों की संख्या 55 से बढ़कर 57 हो गई है, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक है। वहीं, कांग्रेस की सीटें भी मामूली बढ़त के साथ 38 से बढ़कर 39 हो गई हैं, जबकि 4 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार काबिज हैं। भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण उसे अब अपना महापौर बनाने के लिए किसी अन्य बाहरी समर्थन या निर्दलीय पार्षदों के सहयोग की आवश्यकता नहीं होगी।
सुकेत नगरपालिका में कांग्रेस को बढ़त
कोटा जिले के तहत आने वाली सुकेत नगरपालिका में भी पुनर्मतदान के बाद सीटों के गणित में मामूली बदलाव हुआ है। यहां वार्ड संख्या 4 के एक मतदान केंद्र पर पुनर्मतदान कराया गया था, जिसमें कांग्रेस के उम्मीदवार मोहम्मद रफीक ने शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के साथ ही 25 वार्डों वाली इस छोटी नगरपालिका में कांग्रेस के पार्षदों की संख्या 10 से बढ़कर 11 हो गई है।
इस बदलाव के बाद भाजपा के पास अब 10 सीटें हैं, जबकि 4 सीटों पर निर्दलीय पार्षदों का कब्जा है। सुकेत नगरपालिका के अध्यक्ष पद के लिए भी 25 सितंबर को मतदान होगा और इसके अगले दिन, यानी 26 सितंबर को उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। जोधपुर की ही तरह सुकेत में भी अध्यक्ष पद के चुनाव का फैसला काफी हद तक निर्दलीय पार्षदों के रुख पर निर्भर करेगा, क्योंकि किसी भी दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं है।
















