मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर फैली अधूरी जानकारियों और अफवाहों के कारण मुस्लिम समुदाय में एक अजीब असमंजस की स्थिति बन गई है। पिछले महीने मध्य प्रदेश विधानसभा में भारी हंगामे और बहस के बीच समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया गया था। इस नए कानून के पारित होने के बाद से ही शहर के विभिन्न इलाकों में यह चर्चा तेजी से फैलने लगी कि नया कानून लागू होते ही रिश्तेदारों के बीच, विशेष रूप से कजिन मैरिज यानी चचेरे, ममेरे, फुफेरे या मौसेरे भाई-बहनों के बीच होने वाले निकाह पर पूरी तरह से कानूनी प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। इस तरह की अफवाहों के फैलते ही शहर के शादी पंजीकरण केंद्रों और काजियात कार्यालयों में निकाह के आवेदनों की अचानक बाढ़ आ गई है।
निकाह पंजीकरण केंद्रों पर आवेदनों की अचानक आई अभूतपूर्व बाढ़
भोपाल में सामान्य दिनों के दौरान काजियात में प्रतिदिन औसतन 30 से 40 निकाह के आवेदन प्राप्त होते थे। हालांकि, कानून में बदलाव और रिश्तेदारी में निकाह पर रोक की अफवाहें फैलने के बाद यह दैनिक आंकड़ा तेजी से उछलकर 200 से 300 के करीब पहुंच गया है। शहर के काजियात दफ्तर में अचानक बढ़ी इस भीड़ के कारण प्रशासनिक व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया है। कई परिवार ऐसे हैं जिनकी शादियां 6 महीने या उससे भी अधिक समय बाद तय थीं, लेकिन कानूनी पाबंदी के डर से वे समय से पहले ही निकाह संपन्न कराने की होड़ में लगे हुए हैं।
कई मुस्लिम परिवारों ने शादी के लिए मैरिज हॉल पहले ही बुक कर रखे थे और कैटरिंग व्यवस्था से लेकर कपड़े तथा आभूषणों की खरीदारी के लिए एडवांस भुगतान भी कर दिया था। इसके अलावा कई ऐसे परिवार भी हैं जिनके बच्चों के रिश्ते 5 से 10 वर्ष पहले तय हो चुके थे। इन परिवारों को इस बात की गहरी चिंता सताने लगी थी कि यदि नया कानून लागू होने के बाद ब्लड रिलेशन या कजिन के बीच निकाह अवैध घोषित कर दिया गया, तो उनकी सालों पुरानी तैयारियां बेकार हो जाएंगी। इसी सामाजिक आशंका और डर के कारण लोग विवाह की निर्धारित तिथियों से काफी पहले ही निकाह का औपचारिक पंजीकरण कराने काजियात पहुंच रहे हैं।
कजिन मैरिज पर पाबंदी की अफवाह और उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि
मुस्लिम समाज में पारिवारिक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रिश्तेदारों और कजिन के बीच निकाह करने का पुराना चलन रहा है। जब मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित हुआ, तब यह भ्रांति तेजी से फैली कि नए कानून में रक्त संबंधों के बीच विवाह को पूरी तरह निषिद्ध कर दिया गया है। लोगों के बीच यह संदेश प्रसारित हो गया कि कानून लागू होते ही इस तरह के सभी निकाह अवैध माने जाएंगे। इसी आधी-अधूरी जानकारी के कारण उन परिवारों में घबराहट पैदा हो गई, जिनके यहां निकट भविष्य में कजिन के बीच शादी प्रस्तावित थी।
इस भ्रम की स्थिति को गहराने में सामाजिक माध्यमों और मौखिक चर्चाओं ने बड़ी भूमिका निभाई। बिना किसी कानूनी विशेषज्ञ से सलाह लिए कई लोग इस निष्कर्ष पर पहुंच गए कि कजिन मैरिज का विकल्प हमेशा के लिए बंद होने वाला है। इस वजह से जिन शादियों की तैयारियां अगले साल के लिए चल रही थीं, उनके लिए भी आनन-फानन में आवेदन जमा किए जाने लगे।
वक्फ बोर्ड का स्पष्टीकरण: कानून की धारा 4(4) में क्या प्रावधान हैं?
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने इस पूरे विषय पर उत्पन्न भ्रम को पूरी तरह से निराधार और गलत बताया है। उनका कहना है कि कानून के प्रावधानों को अधूरा पढ़कर समाज में गलतफहमी फैलाई जा रही है। उन्होंने स्थिति साफ करते हुए बताया कि समान नागरिक संहिता की धारा 4(4) में निषिद्ध संबंधों के दायरे में आने वाले विवाहों का उल्लेख जरूर किया गया है, लेकिन इसके साथ ही एक बेहद महत्वपूर्ण अपवाद भी जोड़ा गया है।
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी धर्म, समुदाय या सामाजिक समूह की स्थापित रूढ़ि, परंपरा या प्रथा ऐसे रिश्तेदारों के बीच विवाह की अनुमति देती है, तो उस विशेष प्रथा के तहत होने वाले विवाह को कानून के तहत संरक्षण और अनुमति प्राप्त रहेगी। डॉ. सनवर पटेल ने यह भी उजागर किया कि शुरुआत में कानून के हिंदी मसौदे की अंतिम पंक्ति में एक लिपिकीय त्रुटि के कारण 'दोनों के मध्य विवाह की अनुमति न देती हो' लिख गया था। इस त्रुटि को समय रहते सुधारकर 'दोनों के मध्य विवाह की अनुमति देती हो' कर दिया गया है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को इस सुधार के बाद किसी तरह के भ्रम में रहने की आवश्यकता नहीं है।
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने आगे स्पष्ट किया कि यदि वर और वधू दोनों मुस्लिम समुदाय से संबंध रखते हैं और उनकी धार्मिक प्रथा अथवा रूढ़ि में रिश्तेदारों या कजिन के बीच शादी की इजाजत पहले से मौजूद है, तो वह परंपरा आगे भी कानून के दायरे में पूरी तरह वैध बनी रहेगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे केवल कानून का नाम सुनकर या सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करके यह न मान लें कि उनकी परंपराओं पर रोक लगाई जा रही है।
शहर काजी का वक्तव्य और धार्मिक दृष्टिकोण से स्पष्टीकरण
नायब शहर काजी मुफ्ती अली कादर ने भी काजियात में आवेदनों की अचानक बढ़ी संख्या की पुष्टि की है। उन्होंने जानकारी दी कि सामान्य दिनों में रोजाना 30 से 40 आवेदन आने की तुलना में अफवाहों के बाद यह संख्या बढ़कर ढाई सौ और कुछ दिनों में 300 प्रतिदिन तक जा पहुंची। उन्होंने बताया कि लोगों के मन में यह गलत जानकारी बैठ गई थी कि अब रिश्तेदारों के बीच निकाह संभव नहीं होगा, जिसके कारण परिवारों में अनजाना डर फैल गया।
मुफ्ती अली कादर ने इस्लामिक मान्यताओं के हवाले से स्पष्ट किया कि कजिन यानी चचेरे, ममेरे, फुफेरे या मौसेरे भाई-बहन आपस में सगे भाई-बहन की श्रेणी में नहीं आते। इसी कारण मुस्लिम समाज में ऐतिहासिक रूप से ऐसे रिश्तों के बीच निकाह की अनुमति और परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि कानून में यह स्पष्ट प्रावधान मौजूद है कि जिन समाजों की रूढ़ियों और प्रथाओं में ऐसे विवाह स्वीकार्य हैं, वहां यह व्यवस्था जारी रहेगी। काजियात और वक्फ बोर्ड दोनों ही स्तरों पर लगातार आम जनता को समझाकर इस अफवाह का खंडन किया जा रहा है और लोगों से शांत रहने की अपील की जा रही है।





















