सर्दियों के आगमन के साथ ठंडक की राह देख रहे लोगों के लिए आने वाले दिन थोड़े असहज साबित हो सकते हैं। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर सक्रिय अत्यधिक तीव्र अल नीनो के प्रभाव से नवंबर के महीने में देश भर के कई इलाकों में तापमान सामान्य स्तर से ऊपर बना रह सकता है। मौसम विभाग द्वारा जारी मासिक पूर्वानुमान के अनुसार, हिमालय की तलहटी से सटे कुछ सीमित भूभागों को छोड़ दें तो देश के अधिकांश राज्यों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज होने के पूरे आसार हैं। केवल दिन की गर्मी ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है, जिससे रातें भी सामान्य की तुलना में कम ठंडी महसूस होंगी।
मध्य और पूर्वी भारत में रातों की स्थिति
तापमान के इस विस्तृत वितरण में कुछ क्षेत्रीय अंतर भी देखने को मिल सकते हैं। मध्य और पूर्वी भारत के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य स्तर पर या फिर उससे थोड़ा नीचे दर्ज किया जा सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि इन चुनिंदा भूभागों में रात के समय अपेक्षाकृत ठंडक का अहसास बना रहेगा, जबकि देश के बाकी विशाल भूभाग में दिन के साथ-साथ रात में भी सामान्य से अधिक गर्मी झेलनी पड़ सकती है।
देशभर में बारिश के आंकड़ों में भारी गिरावट का अनुमान
नवंबर के दौरान तापमान की तपिश के साथ ही वर्षा का पैमाना भी कमजोर रहने का आकलन सामने आया है। मध्य, उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के कुछ चुनिंदा हिस्सों को छोड़कर देश के अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर, मध्य, उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के कुछ सीमित इलाकों में सामान्य से अधिक वर्षा की गतिविधि दर्ज हो सकती है।
समग्र राष्ट्रीय परिदृश्य पर नजर डालें तो नवंबर के महीने में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत यानी एलपीए के लगभग 77 फीसदी तक ही सीमित रहने का अनुमान है। वर्ष 1971 से 2020 तक के 50 वर्षों के ऐतिहासिक मौसम आंकड़ों के आधार पर नवंबर के लिए अखिल भारतीय स्तर पर दीर्घकालिक औसत 29.7 मिलीमीटर तय है। इस गणना के आधार पर चालू महीने के दौरान पूरे देश में औसत रूप से लगभग 22.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज होने का आकलन किया गया है।
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में भी सूखे जैसे हालात
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के राज्यों में भी नवंबर के दौरान सामान्य से काफी कम वर्षा होने का अंदेशा जताया गया है। इस दक्षिणी भूभाग के लिए भी बारिश का आंकड़ा दीर्घकालिक औसत का करीब 77 प्रतिशत रहने की संभावना व्यक्त की गई है। 1971 से 2020 की समयावधि के ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के लिए नवंबर महीने का बारिश का दीर्घकालिक औसत 118.7 मिलीमीटर है। इस औसत की तुलना में इस बार इस क्षेत्र में लगभग 91.4 मिलीमीटर वर्षा होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जिससे कई कृषि व जल संग्रहण गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
प्रशांत महासागर में जलवायु की स्थिति और अल नीनो का प्रभाव
मौसम के इस असामान्य व्यवहार के पीछे भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में चल रही समुद्री हलचल मुख्य वजह बनकर उभरी है। वहां वर्तमान में अत्यधिक तीव्र अल नीनो की स्थितियां पूरी ताकत के साथ सक्रिय हैं। मानसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम यानी एमएमसीएफएस और दुनिया भर के अन्य प्रमुख वैश्विक जलवायु मॉडलों के नवीनतम अनुमान स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि नवंबर और दिसंबर के दौरान भी अल नीनो का यह मजबूत चक्र निरंतर जारी रह सकता है। अल नीनो वस्तुतः प्रशांत महासागर की सतह के तापमान में होने वाली एक असामान्य बढ़ोतरी की मौसमी प्रक्रिया है, जो दुनिया भर के विभिन्न हिस्सों के मौसम चक्र को उलट-पुलट करने की क्षमता रखती है। हालांकि किसी विशिष्ट क्षेत्र पर इसका वास्तविक असर अन्य स्थानीय मौसमी कारकों की परस्पर क्रिया पर भी निर्भर करता है।


















