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राजगढ़ में करैत के डसने से स्नेक कैचर की मौत, रेस्क्यू के बाद घर लाकर बच्चों को दिखाया था सांपमध्य प्रदेश
23 सित॰ 2026, 12:21 am (43 मिनट पहले)· 0

राजगढ़ में करैत के डसने से स्नेक कैचर की मौत, रेस्क्यू के बाद घर लाकर बच्चों को दिखाया था सांप

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा में जहरीले करैत सांप के काटने के बाद समय पर इलाज न कराने से 40 वर्षीय स्नेक कैचर पीनू की जान चली गई।

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले अंतर्गत ब्यावरा शहर में एक बेहद चौंकाने वाला और दुखद वाकया सामने आया है। यहां वर्षों से सांपों को सुरक्षित पकड़ने का काम करने वाले एक व्यक्ति की जहरीले करैत सांप के डसने से जान चली गई। 40 वर्षीय प्रवेश उर्फ पीनू, जिनके पिता का नाम मोहन गिरी है, मंगलवार को सर्पदंश के गंभीर जहर का शिकार हो गए। रेस्क्यू के दौरान सांप के काटने के बावजूद उन्होंने तुरंत चिकित्सकीय मदद नहीं ली और सांप को सीधे अपने घर ले आए थे।

सुठालिया रोड पर रेस्क्यू के दौरान उंगली में काटा

प्राप्त विवरण के अनुसार, सोमवार रात करीब 9 बजे पीनू को सूचना मिली थी कि सुठालिया रोड इलाके में एक जहरीला करैत सांप देखा गया है। सूचना मिलते ही वह हमेशा की तरह बिना किसी औपचारिक सुरक्षा उपकरण के मौके पर पहुंचे। रेस्क्यू अभियान के दौरान ही करैत ने उनकी एक उंगली में डस लिया था। हालांकि पीनू ने इस दंश को बिल्कुल हल्के में लिया और अपनी सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।

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सांप पर काबू पाने के बाद वह उसे जंगल में छोड़ने के बजाय सीधे अपने निवास पर ले आए। घर पहुंचने पर उन्होंने पकड़े गए करैत को अपने परिजनों और बच्चों को दिखाया। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक, उन्होंने सांप को घर की एक बच्ची के हाथ में भी थमा दिया था। उस वक्त तक उन्हें जहर के तीव्र असर का अहसास नहीं हुआ था, जिससे परिवार को भी खतरे की गंभीरता का अंदाजा नहीं लगा।

हालत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचे, रास्ते में तोड़ा दम

घर में कुछ समय बीतने के बाद अचानक पीनू के शरीर में बेचैनी और घबराहट शुरू हो गई। जैसे ही जहर तंत्रिका तंत्र पर असर करने लगा, उनकी शारीरिक स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। यह देख घबराए परिजन उन्हें तत्काल ब्यावरा के स्थानीय सिविल अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर होते देख डॉक्टरों ने उन्हें बिना देर किए भोपाल के बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। भोपाल ले जाते समय एंबुलेंस में ही रास्ते में पीनू ने दम तोड़ दिया।

एक दशक से कर रहे थे सांप पकड़ने का काम

मृतक के परिजनों ने बताया कि पीनू कोई प्रशिक्षित या पेशेवर स्नेक कैचर नहीं थे, लेकिन वे पिछले लगभग 10 साल से स्थानीय स्तर पर सांप पकड़ने का कार्य कर रहे थे। इन दस वर्षों में उन्होंने कई विशाल और विषैले सांपों को सुरक्षित पकड़कर जंगलों में छोड़ा था। इसी आत्मविश्वास और लंबे अनुभव के चलते वे करैत के दंश को लेकर लापरवाह हो गए। पीनू दो भाइयों में से एक थे और अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी को छोड़ गए हैं।

परिजनों के इनकार के बाद बिना पोस्टमार्टम हुआ अंतिम संस्कार

ब्यावरा सिटी थाना प्रभारी शिवराज सिंह चौहान ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की है। थाना प्रभारी के अनुसार, पीनू की मृत्यु के बाद परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से साफ मना कर दिया। पुलिस प्रशासन ने नियमानुसार आवश्यक कानूनी पंचनामा तैयार किया और शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इसके बाद परिजनों ने गमगीन माहौल में मृतक का अंतिम संस्कार संपन्न किया।

पूर्व में मंदसौर के कुएं से निकले थे 20 कोबरा

क्षेत्र में सांपों के रेस्क्यू से जुड़ी यह पहली असामान्य घटना नहीं है। कुछ महीने पहले मध्य प्रदेश के ही मंदसौर जिले में एक आवासीय परिसर के भीतर मौजूद कुएं से एक साथ 20 कोबरा सांप बरामद हुए थे। उस समय उन सभी विषैले कोबरा सांपों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कुएं में करीब 7 टैंकर पानी भरा गया था। इतनी बड़ी तादाद में एक ही जल स्रोत से जहरीले सांपों का मिलना उस समय इलाके में चर्चा का बड़ा विषय बना था।

सवाल-जवाब

ब्यावरा में जान गंवाने वाले स्नेक कैचर का क्या नाम था?
मृतक का नाम 40 वर्षीय प्रवेश उर्फ पीनू था, जो मोहन गिरी के पुत्र थे।
पीनू को सांप ने कब और कहां डसा था?
उन्हें सोमवार रात करीब 9 बजे सुठालिया रोड इलाके में करैत सांप का रेस्क्यू करते समय उंगली में डसा था।
सांप पकड़ने के बाद पीनू ने क्या किया था?
वे करैत को सीधे अपने घर ले आए और परिजनों व बच्चों को दिखाने लगे, यहां तक कि सांप एक बच्ची के हाथ में भी थमा दिया।
पीनू की मौत कहां और किस परिस्थिति में हुई?
ब्यावरा सिविल अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें भोपाल रेफर किया गया था, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
क्या मृतक के शव का पोस्टमार्टम करवाया गया?
नहीं, परिजनों द्वारा मना किए जाने के बाद पुलिस ने पंचनामा तैयार कर शव सौंप दिया और बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार हुआ।
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टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·9 मिनट पहले

अरे यार, दस साल का अनुभव अपनी जगह है पर करैत जैसे जहर को ऐसे हल्के में लेना वाकई पागलपन था। बच्चों को सांप पकड़ाना तो और भी डरावना है, भगवान उनके परिवार को इस दुख से उबरने की शक्ति दे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 मिनट पहले

रवि भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। वन्यजीव संरक्षण और रेस्क्यू के लिए सरकार और वन विभाग को ऐसे अनट्रेंड लोगों के लिए कोई गाइडलाइन या ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाना चाहिए, वरना ऐसे हादसे और होते रहेंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·28 मिनट पहले

अरे भगवान! सांप बच्चों के हाथ में थमा दिया, यह तो गनीमत थी कि किसी और को नहीं डसा। ओवरकॉन्फिडेंस जान ले डूबा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·28 मिनट पहले

रोहन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछले साल जब मैंने भोपाल के एक मामले की पड़ताल की थी, तब भी ऐसे ही लापरवाही में एक शख्स ने अपनी जान गंवा दी थी।

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