मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले अंतर्गत ब्यावरा शहर में एक बेहद चौंकाने वाला और दुखद वाकया सामने आया है। यहां वर्षों से सांपों को सुरक्षित पकड़ने का काम करने वाले एक व्यक्ति की जहरीले करैत सांप के डसने से जान चली गई। 40 वर्षीय प्रवेश उर्फ पीनू, जिनके पिता का नाम मोहन गिरी है, मंगलवार को सर्पदंश के गंभीर जहर का शिकार हो गए। रेस्क्यू के दौरान सांप के काटने के बावजूद उन्होंने तुरंत चिकित्सकीय मदद नहीं ली और सांप को सीधे अपने घर ले आए थे।
सुठालिया रोड पर रेस्क्यू के दौरान उंगली में काटा
प्राप्त विवरण के अनुसार, सोमवार रात करीब 9 बजे पीनू को सूचना मिली थी कि सुठालिया रोड इलाके में एक जहरीला करैत सांप देखा गया है। सूचना मिलते ही वह हमेशा की तरह बिना किसी औपचारिक सुरक्षा उपकरण के मौके पर पहुंचे। रेस्क्यू अभियान के दौरान ही करैत ने उनकी एक उंगली में डस लिया था। हालांकि पीनू ने इस दंश को बिल्कुल हल्के में लिया और अपनी सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
सांप पर काबू पाने के बाद वह उसे जंगल में छोड़ने के बजाय सीधे अपने निवास पर ले आए। घर पहुंचने पर उन्होंने पकड़े गए करैत को अपने परिजनों और बच्चों को दिखाया। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक, उन्होंने सांप को घर की एक बच्ची के हाथ में भी थमा दिया था। उस वक्त तक उन्हें जहर के तीव्र असर का अहसास नहीं हुआ था, जिससे परिवार को भी खतरे की गंभीरता का अंदाजा नहीं लगा।
हालत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचे, रास्ते में तोड़ा दम
घर में कुछ समय बीतने के बाद अचानक पीनू के शरीर में बेचैनी और घबराहट शुरू हो गई। जैसे ही जहर तंत्रिका तंत्र पर असर करने लगा, उनकी शारीरिक स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। यह देख घबराए परिजन उन्हें तत्काल ब्यावरा के स्थानीय सिविल अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर होते देख डॉक्टरों ने उन्हें बिना देर किए भोपाल के बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। भोपाल ले जाते समय एंबुलेंस में ही रास्ते में पीनू ने दम तोड़ दिया।
एक दशक से कर रहे थे सांप पकड़ने का काम
मृतक के परिजनों ने बताया कि पीनू कोई प्रशिक्षित या पेशेवर स्नेक कैचर नहीं थे, लेकिन वे पिछले लगभग 10 साल से स्थानीय स्तर पर सांप पकड़ने का कार्य कर रहे थे। इन दस वर्षों में उन्होंने कई विशाल और विषैले सांपों को सुरक्षित पकड़कर जंगलों में छोड़ा था। इसी आत्मविश्वास और लंबे अनुभव के चलते वे करैत के दंश को लेकर लापरवाह हो गए। पीनू दो भाइयों में से एक थे और अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी को छोड़ गए हैं।
परिजनों के इनकार के बाद बिना पोस्टमार्टम हुआ अंतिम संस्कार
ब्यावरा सिटी थाना प्रभारी शिवराज सिंह चौहान ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की है। थाना प्रभारी के अनुसार, पीनू की मृत्यु के बाद परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से साफ मना कर दिया। पुलिस प्रशासन ने नियमानुसार आवश्यक कानूनी पंचनामा तैयार किया और शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इसके बाद परिजनों ने गमगीन माहौल में मृतक का अंतिम संस्कार संपन्न किया।
पूर्व में मंदसौर के कुएं से निकले थे 20 कोबरा
क्षेत्र में सांपों के रेस्क्यू से जुड़ी यह पहली असामान्य घटना नहीं है। कुछ महीने पहले मध्य प्रदेश के ही मंदसौर जिले में एक आवासीय परिसर के भीतर मौजूद कुएं से एक साथ 20 कोबरा सांप बरामद हुए थे। उस समय उन सभी विषैले कोबरा सांपों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कुएं में करीब 7 टैंकर पानी भरा गया था। इतनी बड़ी तादाद में एक ही जल स्रोत से जहरीले सांपों का मिलना उस समय इलाके में चर्चा का बड़ा विषय बना था।























