मध्य प्रदेश में कृषि, ऊर्जा, खेल, स्वास्थ्य और न्यायिक ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़े वित्तीय प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 22 सितंबर को आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास को रफ्तार देने के लिए 13 हजार 790 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। इस बैठक में किसानों की सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, युवाओं और खिलाड़ियों के लिए आधुनिक खेल परिसरों की स्थापना, बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नए समझौतों और न्यायिक तंत्र के सुदृढ़ीकरण से संबंधित अनेक निर्णय लिए गए।
कृषि क्षेत्र के लिए सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार
कैबिनेट बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों में जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई अहम निर्णय लिए गए। राजगढ़ जिले में स्थित सुठालिया सिंचाई परियोजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर जारी रखने के लिए 262 करोड़ 63 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से राजगढ़ जिले के 40,000 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में कुशल सिंचाई सुविधा विकसित करना है, जिससे किसानों को पानी की समुचित उपलब्धता प्राप्त हो सके।
इसी क्रम में नीमच जिले के लिए जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को आगामी पांच वर्षों, यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 4 हजार 197 करोड़ 58 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। यह योजना पूरी तरह से दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई तकनीक पर आधारित है, जिसके माध्यम से खेतों तक सीधे पाइपलाइनों के जरिए पानी पहुंचाया जाएगा। इस उन्नत तकनीक का उद्देश्य जल की अधिकतम बचत करते हुए प्रति बूंद अधिक फसल के सिद्धांत पर क्षेत्र की कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करना है।
राजगढ़ जिले की एक और महत्वपूर्ण योजना, पार्वती रिन्सी सिंचाई परियोजना के लिए भी वित्तीय प्रावधान को हरी झंडी दी गई है। इस परियोजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 की अवधि के लिए 507 करोड़ 23 लाख रुपये का अनुमोदन प्राप्त हुआ है। इसके अंतर्गत बांध का निर्माण किया जाएगा, जिससे राजगढ़ क्षेत्र के 48,000 हेक्टेयर रकबे में सिंचाई क्षमता का विस्तार संभव होगा। इन सभी सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से राज्य के बड़े भूभाग में भूजल स्तर को स्थिर रखने और किसानों को समय पर पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया है।
ऊर्जा सुरक्षा और 2800 मेगावाट ताप विद्युत क्रय की योजना
राज्य में भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा विभाग की एम.पी. पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड को महत्वपूर्ण अधिकार सौंपे गए हैं। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा निर्धारित डीबीएफओओ मॉडल बिडिंग दस्तावेजों के आधार पर कुल 2800 मेगावाट ताप विद्युत क्रय के प्रस्ताव को कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दी है। यह विद्युत आपूर्ति मध्य प्रदेश में पहले से मौजूद, निर्माणाधीन और नई प्रस्तावित ग्रीनफील्ड व ब्राउनफील्ड ताप विद्युत परियोजनाओं से पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के माध्यम से हासिल की जाएगी।
इससे पहले 24 जनवरी 2025 को हुई बैठक में 900 मेगावाट ताप विद्युत क्रय से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई थी। हालांकि, पूर्व निविदा के निरस्त हो जाने के कारण उस अनुमोदन को अब इसी नए 2800 मेगावाट के प्रस्ताव में समाहित कर लिया गया है। इस पूरी खरीद प्रक्रिया, अनुबंधों और विनियामक आयोग के निर्देशों के पालन के लिए एम.पी. पावर मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध संचालक को अधिकृत किया गया है, ताकि राज्य के घरेलू, औद्योगिक और कृषि उपभोक्ताओं को उचित दरों पर विश्वसनीय बिजली प्राप्त होती रहे।
140 विधानसभा क्षेत्रों में बनेंगे मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स
प्रदेश के युवाओं और खिलाड़ियों को स्थानीय स्तर पर आधुनिक खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अंतर्गत एक विस्तृत योजना को सैद्धांतिक सहमति दी गई है। राज्य के 140 विधानसभा क्षेत्रों में नए खेल परिसरों के निर्माण और उनके सुचारू संचालन के लिए 962 करोड़ 50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इन सभी परिसरों को 'मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स' के नाम से जाना जाएगा।
इन खेल परिसरों की एक खास विशेषता यह होगी कि मुख्य खेल मैदान के बीच में एक स्थायी हेलीपैड भी तैयार किया जाएगा। इस बहुउद्देशीय व्यवस्था से पीएमश्री योजना के अंतर्गत संचालित होने वाले हेलीकॉप्टरों का आवागमन सुलभ, सुरक्षित और व्यवस्थित हो सकेगा। इससे न केवल ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को निखारने का अवसर मिलेगा, बल्कि आपातकालीन एवं प्रशासनिक संपर्क के लिए हवाई कनेक्टिविटी का एक बेहतर नेटवर्क भी तैयार हो सकेगा।
न्यायिक प्रणाली और विधिक सहायता का सुदृढ़ीकरण
राज्य के नागरिकों को समय पर सुलभ न्याय दिलाने और न्यायिक ढांचे को मजबूत बनाने के उद्देश्य से विधि एवं विधायी कार्य विभाग से संबंधित कई प्रस्तावों को 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए मंजूरी दी गई। यह समयावधि 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 31 मार्च 2031 तक चलेगी। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे विवादों को स्थानीय स्तर पर निपटाने वाली ग्राम न्यायालय योजना को निरंतर रखने के लिए 554 करोड़ 61 लाख रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दी गई है। इस राशि का उपयोग ग्राम न्यायालयों में तैनात न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन, भत्तों तथा कार्यालयीन व्यवस्थाओं के संचालन में किया जाएगा।
कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को निःशुल्क कानूनी सलाह उपलब्ध कराने के लिए संचालित मध्य प्रदेश विधिक सहायता तथा विधिक सलाह बोर्ड योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए 524 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसके अतिरिक्त, पारिवारिक विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए स्थापित परिवार न्यायालयों के संचालन को निरंतर बनाए रखने के लिए 1 हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उच्च न्यायालय से जुड़े प्रशासनिक और न्यायिक दायित्वों के निर्वहन हेतु उच्च न्यायालय (भारित) योजना के लिए 2,015 करोड़ 60 लाख रुपये के बड़े बजट की मंजूरी दी गई है।
वाणिज्यिक कर विभाग की 6 योजनाओं के लिए 969 करोड़ रुपये
राजस्व प्रणाली को पारदर्शी, आधुनिक और जनहितैषी बनाने के लिए वाणिज्यिक कर विभाग की 6 प्रमुख योजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026-2027 से 2030-2031 तक अगले पांच वर्षों के लिए जारी रखने का निर्णय लिया गया। इसके लिए कुल 969 करोड़ 87 लाख रुपये की वित्तीय व्यवस्था की गई है। इस बजट का अलग-अलग योजनाओं में विभाजन किया गया है।
डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए संपदा ई-रजिस्ट्री योजना को 62 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं। इसके अलावा, स्टाम्पों की बिक्री पर होने वाले व्यय के लिए 664 करोड़ रुपये और स्टाम्पों की वास्तविक लागत योजना के लिए 175 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। विभाग की परिसंपत्तियों के संधारण और रखरखाव के लिए 12 करोड़ 50 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही, डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम के लिए 46 करोड़ 37 लाख रुपये तथा जिला एवं उप पंजीयक कार्यालय भवनों के नवीन निर्माण और विस्तार के लिए 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
दंत चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर में नए पद और सीटें
चिकित्सा शिक्षा और दंत स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के उद्देश्य से इंदौर स्थित शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई है। कॉलेज में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कुल 13 नए चिकित्सा शिक्षकों के पद बनाए जाएंगे। इनमें प्राध्यापक का 1 पद, सह-प्राध्यापक के 10 पद और सहायक प्राध्यापक के 2 पद शामिल हैं। इन नए पदों के सृजन पर राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 3 करोड़ 78 लाख रुपये का व्यय किए जाने का अनुमान है।
पदों के इस विस्तार के साथ ही संस्थान में सीटों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना के अनुसार, स्नातक स्तर पर बीडीएस पाठ्यक्रम की सीटें वर्तमान 63 से बढ़ाकर 100 की जाएंगी। वहीं स्नातकोत्तर स्तर पर एमडीएस पाठ्यक्रम की सीटों को 35 से बढ़ाकर 44 किया जाएगा। इससे प्रदेश के होनहार विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय दंत चिकित्सा शिक्षा के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे और राज्य में विशेषज्ञ दंत चिकित्सकों की उपलब्धता में सुधार होगा।
नवगठित जिलों में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के नए कार्यालय
प्रशासनिक तंत्र को विकेंद्रीकृत करने और नागरिकों तक पेयजल व स्वच्छता सेवाएं सुगमता से पहुंचाने के लिए नवगठित जिलों में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यालयों की स्थापना को मंजूरी दी गई है। नए बने मैहर जिले में विभाग का जिला कार्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। चूंकि उचेहरा विकासखंड को मैहर जिले में शामिल नहीं किया गया है, इसलिए उचेहरा को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी अनुविभाग सतना में सम्मिलित किया गया है। मैहर जिला कार्यालय के लिए 5 नए स्थायी पद और 2 कार्यालय सहायकों को आउटसोर्स माध्यम से नियुक्त करने की अनुमति दी गई है।
इसी प्रकार, नवगठित पांढुर्णा जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का जिला कार्यालय खोलने के लिए 5 नए स्थायी पद और 2 आउटसोर्स कार्यालय सहायकों के नियोजन को मंजूरी मिली है। इसके अतिरिक्त, सिंगरौली जिले के दूरस्थ चितरंगी ब्लॉक में विभाग का अनुविभागीय कार्यालय स्थापित किया जाएगा। चितरंगी कार्यालय के संचालन के लिए 3 नए स्थायी पद तथा 1 आउटसोर्स कार्यालय सहायक का पद स्वीकृत किया गया है, जिससे ग्रामीण अंचल में पेयजल योजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।




















