महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है जिसमें ऑटो, टैक्सी और ऐप-बेस्ड कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान होना अनिवार्य किया गया है। चार कैब ड्राइवरों की तरफ से दायर इस याचिका में कहा गया है कि भाषा की इस शर्त से पूरे राज्य में लाखों चालकों के रोजगार पर सीधा खतरा मंडराने लगा है। वकील विवेक शुक्ला के माध्यम से लगाई गई इस याचिका पर 26 अगस्त को चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किए जाने की उम्मीद है। याचिका में मांग की गई है कि 12 अगस्त को जारी किए गए सरकारी नोटिफिकेशन पर तुरंत रोक लगाई जाए और ड्राइवरों को आवश्यक अंतरिम राहत दी जाए।
याचिका में उठाए गए कानूनी और संवैधानिक सवाल
याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के इस कदम की वैधता को चुनौती देते हुए दलील दी है कि यह फैसला मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत राज्य सरकार को प्रदत्त शक्तियों के दायरे से बिल्कुल बाहर है। उनके अनुसार, ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने, ड्राइवर का बैज देने या वाहन का परमिट मंजूर करने के लिए किसी खास भाषा की योग्यता की कोई शर्त केंद्रीय कानून में नहीं दी गई है। चालकों का यह भी पक्ष है कि इस तरह की अनिवार्यता लागू करना संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत प्रद उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। ये संवैधानिक प्रावधान कानून के समक्ष समानता, अपनी पसंद का कोई भी व्यवसाय या व्यापार करने की स्वतंत्रता और जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं।
कानूनी अधिकारों और प्रावधानों का उल्लंघन
याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मूल कानून किसी भी राज्य सरकार को यह अधिकार नहीं देता है कि वह किसी ड्राइवर के लिए भाषा के ज्ञान को योग्यता, बैज या परमिट की शर्त के रूप में तय करे। इसके अलावा, भाषा के आधार पर बैज को सस्पेंड करने या रद्द करने का अधिकार भी सरकार के पास नहीं है। यह विवादित नोटिफिकेशन अपने आप में एक नई अयोग्यता और कार्रवाई का नया आधार गढ़ता है, जिसे कभी भी संसद द्वारा अधिनियमित नहीं किया गया था।
लाखों चालकों और प्रवासियों पर पड़ेगा असर
याचिका में सरकार के इस आदेश के व्यापक प्रभाव का हवाला देते हुए बताया गया है कि पूरे महाराष्ट्र में लगभग 9,65,000 ऑटो-रिक्शा और टैक्सी परमिट व बैज बांटे जा चुके हैं। ड्राइवरों ने चेतावनी दी है कि यदि इस नोटिफिकेशन को कड़ाई से लागू किया गया, तो खासकर गरीब तबके और प्रवासी मजदूरों को भारी संख्या में कारण बताओ नोटिस मिल सकते हैं, उनके बैज निलंबित किए जा सकते हैं और उनके परमिट हमेशा के लिए रद्द हो सकते हैं।
अभियान के आंकड़ों और दावों पर एक नजर
याचिका में यह भी रेखांकित किया गया है कि कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ द्वारा संचालित 105 दिनों के हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा अभियान के दौरान लगभग 1,65,000 ऐसे ड्राइवर सामने आए थे जिन्हें मराठी भाषा का ज्ञान नहीं है। खुद राज्य के परिवहन मंत्री ने मीडिया में स्वीकार किया है कि राज्यभर में कुल 9,65,000 रिक्शा और टैक्सी परमिट व बैज जारी हो चुके हैं। इस प्रकार, लाखों चालकों के ऊपर लगातार नोटिस मिलने, परमिट और बैज छिन जाने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है, जिससे उनका जीवनयापन मुश्किल हो जाएगा।



















