कर्नाटक हाईकोर्ट ने खारिज किया अजीबोगरीब मामला, रविवार की तारीख देख जज ने तुरंत रद्द की एफआईआरसितंबर में जन्मे लोगों का व्यक्तित्व: जानिए इनकी 4 खास खूबियां जो इन्हें बनाती हैं सबसे अलगमेघालय सीमा विवाद: लापांगाप के किसानों की सुरक्षा और नए ठिकानों की जांच की उठी मांगपीओके पर भारत का दावा क्यों है अकाट्य? जानिए उस ऐतिहासिक दस्तावेज का पूरा सच जो दिल्ली में है सुरक्षित2026 में सिनेमाघरों में मचेगा तहलका, बॉक्स ऑफिस पर सुनामी बनकर आएंगी ये चार मेगा फिल्मेंपुलिस वैन के सामने अड़कर चर्चा में आईं रिया अहीर, क्या बिग बॉस 20 में होगी एंट्री?धतूरे की ऑनलाइन बिक्री पर कर्नाटक में बड़ी कार्रवाई, अमेजन और बिग बास्केट समेत इन कंपनियों के फूड लाइसेंस सस्पेंडशुक्र के पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में बुध का गोचर: 4 दिन बाद 5 राशियों को होगा बंपर लाभ, जानिए क्या कहते हैं सितारेरक्षाबंधन पर दें ये 10 बेहतरीन और उपयोगी उपहार, बहनें हर रोज करेंगी इस्तेमालउत्तर प्रदेश में 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, कैबिनेट ने 'लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना' को दी मंजूरी
मराठी भाषा के अनिवार्य नियम पर बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती, कैब चालकों की आजीविका पर संकट का दावामहाराष्ट्र
25 अग॰ 2026, 5:28 pm (1 घंटे पहले)· 2

मराठी भाषा के अनिवार्य नियम पर बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती, कैब चालकों की आजीविका पर संकट का दावा

महाराष्ट्र सरकार के कैब चालकों के लिए मराठी भाषा की जानकारी अनिवार्य करने वाले नोटिफिकेशन को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे राज्य के लाखों ड्राइवरों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी और यह मोटर वाहन अधिनियम के दायरे से बाहर है।

महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है जिसमें ऑटो, टैक्सी और ऐप-बेस्ड कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान होना अनिवार्य किया गया है। चार कैब ड्राइवरों की तरफ से दायर इस याचिका में कहा गया है कि भाषा की इस शर्त से पूरे राज्य में लाखों चालकों के रोजगार पर सीधा खतरा मंडराने लगा है। वकील विवेक शुक्ला के माध्यम से लगाई गई इस याचिका पर 26 अगस्त को चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किए जाने की उम्मीद है। याचिका में मांग की गई है कि 12 अगस्त को जारी किए गए सरकारी नोटिफिकेशन पर तुरंत रोक लगाई जाए और ड्राइवरों को आवश्यक अंतरिम राहत दी जाए।

याचिका में उठाए गए कानूनी और संवैधानिक सवाल

याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के इस कदम की वैधता को चुनौती देते हुए दलील दी है कि यह फैसला मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत राज्य सरकार को प्रदत्त शक्तियों के दायरे से बिल्कुल बाहर है। उनके अनुसार, ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने, ड्राइवर का बैज देने या वाहन का परमिट मंजूर करने के लिए किसी खास भाषा की योग्यता की कोई शर्त केंद्रीय कानून में नहीं दी गई है। चालकों का यह भी पक्ष है कि इस तरह की अनिवार्यता लागू करना संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत प्रद उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। ये संवैधानिक प्रावधान कानून के समक्ष समानता, अपनी पसंद का कोई भी व्यवसाय या व्यापार करने की स्वतंत्रता और जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं।

ये भी पढ़ें

कानूनी अधिकारों और प्रावधानों का उल्लंघन

याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मूल कानून किसी भी राज्य सरकार को यह अधिकार नहीं देता है कि वह किसी ड्राइवर के लिए भाषा के ज्ञान को योग्यता, बैज या परमिट की शर्त के रूप में तय करे। इसके अलावा, भाषा के आधार पर बैज को सस्पेंड करने या रद्द करने का अधिकार भी सरकार के पास नहीं है। यह विवादित नोटिफिकेशन अपने आप में एक नई अयोग्यता और कार्रवाई का नया आधार गढ़ता है, जिसे कभी भी संसद द्वारा अधिनियमित नहीं किया गया था।

लाखों चालकों और प्रवासियों पर पड़ेगा असर

याचिका में सरकार के इस आदेश के व्यापक प्रभाव का हवाला देते हुए बताया गया है कि पूरे महाराष्ट्र में लगभग 9,65,000 ऑटो-रिक्शा और टैक्सी परमिट व बैज बांटे जा चुके हैं। ड्राइवरों ने चेतावनी दी है कि यदि इस नोटिफिकेशन को कड़ाई से लागू किया गया, तो खासकर गरीब तबके और प्रवासी मजदूरों को भारी संख्या में कारण बताओ नोटिस मिल सकते हैं, उनके बैज निलंबित किए जा सकते हैं और उनके परमिट हमेशा के लिए रद्द हो सकते हैं।

अभियान के आंकड़ों और दावों पर एक नजर

याचिका में यह भी रेखांकित किया गया है कि कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ द्वारा संचालित 105 दिनों के हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा अभियान के दौरान लगभग 1,65,000 ऐसे ड्राइवर सामने आए थे जिन्हें मराठी भाषा का ज्ञान नहीं है। खुद राज्य के परिवहन मंत्री ने मीडिया में स्वीकार किया है कि राज्यभर में कुल 9,65,000 रिक्शा और टैक्सी परमिट व बैज जारी हो चुके हैं। इस प्रकार, लाखों चालकों के ऊपर लगातार नोटिस मिलने, परमिट और बैज छिन जाने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है, जिससे उनका जीवनयापन मुश्किल हो जाएगा।

सवाल-जवाब

बॉम्बे हाईकोर्ट में किस फैसले को चुनौती दी गई है?
महाराष्ट्र सरकार के उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है जिसमें ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान अनिवार्य किया गया है।
यह याचिका किस अदालत में और किसके द्वारा दायर की गई है?
यह याचिका चार कैब चालकों द्वारा वकील विवेक शुक्ला के माध्यम से बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की गई है।
याचिकाकर्ताओं का मुख्य कानूनी तर्क क्या है?
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि भाषा की यह शर्त मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के दायरे से बाहर है और यह संविधान के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।
इस नियम से महाराष्ट्र में कितने ड्राइवरों के प्रभावित होने की आशंका है?
याचिका के अनुसार, महाराष्ट्र में जारी किए गए लगभग 9.65 लाख ऑटो और टैक्सी परमिट और बैज इस नियम से प्रभावित हो सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR