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मराठी भाषा नियम और RTO कार्रवाई के खिलाफ कुर्ला में ऑटो-टैक्सी चालकों की हड़ताल, 6 महीने की मांगी मोहलतमहाराष्ट्र
24 अग॰ 2026, 1:06 pm (64 दिन पहले)· 2

मराठी भाषा नियम और RTO कार्रवाई के खिलाफ कुर्ला में ऑटो-टैक्सी चालकों की हड़ताल, 6 महीने की मांगी मोहलत

महाराष्ट्र में गैर-मराठी ऑटो-टैक्सी चालकों पर RTO की सख्त कार्रवाई के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। कुर्ला में सैकड़ों रिक्शा चालकों ने काम बंद कर प्रदर्शन किया और मराठी सीखने के लिए 6 महीने का समय देने की मांग की।

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गैर-मराठी ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) द्वारा की जा रही दंडात्मक कार्रवाई के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। मुंबई के कुर्ला इलाके में सैकड़ों चालकों ने अपने वाहनों को कतारबद्ध खड़ा करके काम पूरी तरह बंद कर दिया। प्रदर्शनकारी चालकों का आरोप है कि मराठी भाषा न जानने के नाम पर की जा रही यह प्रशासनिक कार्रवाई पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है। चालकों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।

1 महीने का नोटिस और बैज रद्द करने की प्रक्रिया

महाराष्ट्र में व्यवसायिक वाहन चलाने वाले चालकों के लिए मराठी भाषा की जानकारी अनिवार्य करने की मुहिम के तहत RTO द्वारा जांच अभियान चलाया जा रहा है। जिन चालकों को मराठी भाषा बोलना या समझना नहीं आता है, उन्हें प्रशासन की ओर से सबसे पहले 1 महीने का कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। यदि चालक इस दिए गए 1 महीने के भीतर मराठी भाषा सीखने में विफल रहते हैं, तो उनके वाहन चालक बैज को रद्द करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। बैज रद्द करने की इस कानूनी प्रक्रिया के तहत चालकों को 3 महीने का अंतिम नोटिस दिया जाता है, जिससे गैर-मराठी चालकों में भारी चिंता व्याप्त है।

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कुर्ला में सड़कों पर उतरे सैकड़ों चालक

प्रशासनिक कार्रवाई से उपजे असंतोष के कारण मुंबई के अलग-अलग क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। कुर्ला में स्थिति अधिक गंभीर देखी गई, जहां सैकड़ों की संख्या में ऑटो रिक्शा चालकों ने मुख्य मार्ग पर गाड़ियां खड़ी कर दीं और मीटर बंद रखकर सेवाएं देना पूरी तरह बंद कर दिया। चालकों के इस अचानक काम बंद आंदोलन से दैनिक यात्रियों को आवाजाही में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

6 महीने की मोहलत की मांग और रोजमर्रा की चुनौतियां

आंदोलन में शामिल चालकों ने स्पष्ट किया कि उन्हें क्षेत्रीय भाषा सीखने से कोई परहेज नहीं है और वे मराठी भाषा सीखने का प्रयास भी कर रहे हैं। हालांकि उनका तर्क है कि दैनिक मजदूरी और लंबी शिफ्ट में काम करने वाले चालकों के लिए 1 महीने की अवधि बेहद कम है। चालकों ने राज्य सरकार से मांग की है कि मराठी भाषा ठीक से सीखने और बोलने के लिए उन्हें कम से कम 6 महीने की समय-सीमा दी जानी चाहिए।

चालकों ने अपनी जमीनी समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे यात्रियों से मराठी में बात करने की कोशिश करते हैं, तो कई बार लोग उनके उच्चारण का मजाक उड़ाते हैं। इसके अलावा RTO और पुलिस की लगातार जांच कार्रवाई से उनका काम का समय बर्बाद होता है तथा भारी जुर्माने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।

गरीब चालकों को निशाना बनाने का आरोप

प्रदर्शनकारी चालकों ने प्रशासनिक कार्रवाई के समय और मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई चालक पिछले कई दशकों से मुंबई की सड़कों पर ऑटो और टैक्सी चलाकर शहर की यातायात व्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। चालकों का पूछना है कि दशकों बाद अचानक ऐसा अभियान चलाकर केवल गरीब ऑटो-टैक्सी चालकों को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है। चालकों ने सरकार से आग्रह किया है कि राजनीतिक दबाव में कठोर कदम उठाने के बजाय भाषा सीखने की समय-सीमा में बढ़ोतरी की जाए।

सवाल-जवाब

मुंबई में ऑटो और टैक्सी चालक विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
मराठी भाषा न जानने पर आरटीओ द्वारा दी जा रही नोटिस और बैज रद्द करने की कार्रवाई के खिलाफ चालक विरोध कर रहे हैं।
आरटीओ गैर-मराठी चालकों को कितना नोटिस समय दे रहा है?
प्रशासन सबसे पहले 1 महीने का नोटिस दे रहा है, जिसके बाद बैज रद्द करने की प्रक्रिया के तहत 3 महीने का नोटिस दिया जाता है।
ऑटो-टैक्सी चालकों की सरकार से मुख्य मांग क्या है?
चालकों की मुख्य मांग है कि उन्हें मराठी भाषा ठीक से सीखने के लिए कम से कम 6 महीने की समय-सीमा दी जाए।
काम बंद आंदोलन का सबसे ज्यादा असर किस क्षेत्र में देखा गया?
मुंबई के कुर्ला इलाके में सैकड़ों ऑटो चालकों ने काम बंद कर सड़कों पर गाड़ियां खड़ी करके विरोध जताया।
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