महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में ऑनलाइन कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं के प्रसार के बीच स्थानीय ऑटो चालकों के रोजगार का मुद्दा गरमाता जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को एक पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि रैपिडो, ओला और उबर जैसी कंपनियों के कारण महाराष्ट्र के हजारों रिक्शा चालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा करना पूरी तरह से गलत है और सरकार को इस दिशा में तुरंत ध्यान देना चाहिए।
मंत्रियों और कंपनियों के संबंधों पर गंभीर सवाल
संजय राउत ने अपने पत्र में तीखे आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य सरकार के कुछ मंत्रियों के रैपिडो कंपनी के साथ गहरे वित्तीय और व्यावसायिक रिश्ते जुड़े हुए हैं। उनके अनुसार, इस कंपनी ने राज्य के कई बड़े आयोजनों जैसे दही हांडी, गणेशोत्सव और विभिन्न मंत्रियों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में खुलकर प्रायोजन किया है और उनमें करोड़ों रुपये का निवेश किया है। इतना ही नहीं, राउत का दावा है कि इन कंपनियों ने कुछ मंत्रियों को चुनावों के दौरान भी आर्थिक मदद पहुंचाई है। उनका कहना है कि इन्हीं एहसानों को चुकाने के लिए आज हजारों आम रिक्शा चालकों के हितों की अनदेखी की जा रही है और उन्हें इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नाम पर संकट में धकेला जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री की पृष्ठभूमि और मुलाकात की मांग
पत्र में आगे इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि राज्य के मौजूदा उपमुख्यमंत्री की अपनी पृष्ठभूमि ऑटो ड्राइवर की रही है। ऐसे में जब खुद नेतृत्व इस पेशे से जुड़ा रहा हो, तब राज्य के रिक्शा चालकों की आजीविका को इस तरह खतरे में डालना और छीना जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस गंभीर मसले पर चर्चा करने के लिए संजय राउत ने रिक्शा चालक संघर्ष समिति के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ परिवहन मंत्री से प्रत्यक्ष मुलाकात का समय मांगा है और इसके लिए उचित समय व स्थान की जानकारी साझा करने का अनुरोध किया है।
सहकारी क्षेत्र और अन्य मुद्दों पर भी मुखर रहे हैं राउत
यह पहला मौका नहीं है जब संजय राउत ने सरकार के सामने नीतिगत मामलों को लेकर पत्रचार किया हो। इससे पहले उन्होंने केंद्र सरकार पर महाराष्ट्र के सहकारी क्षेत्र के साथ भेदभाव और अन्याय करने का गंभीर आरोप लगाया था। गत 20 अगस्त को उन्होंने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को एक पत्र प्रेषित किया था। उस पत्र में उन्होंने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 के तेजी से पारित होने और मुंबई में राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त विकास निगम (एनयूसीएफडीसी) के कार्यालय के उद्घाटन को लेकर अपनी गहरी चिंताएं व्यक्त की थीं।
अन्य नेताओं को भी भेजी गई थी पत्र की प्रति
उस दौरान लिखे गए पत्र की प्रतियां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राष्ट्रीय सहकारी समिति के अध्यक्ष शरद पवार को भी भेजी गई थीं। राउत ने शहरी सहकारी बैंकिंग परिसंपत्तियों से जुड़े मंत्रालय के हालिया फैसलों पर कड़ी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह पत्र उन्होंने जानबूझकर मराठी भाषा में लिखा था ताकि आम जनता आसानी से समझ सके कि किस प्रकार महाराष्ट्र के शहरी सहकारी बैंकिंग ढांचे के साथ अन्याय किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि उक्त विधेयक को जल्दबाजी में मंजूरी दी गई थी और एनयूसीएफडीसी के जरिए महाराष्ट्र व गोवा के शीर्ष शहरी सहकारी बैंकों की संपत्तियां उनके सदस्यों की मर्जी के बिना हड़प ली गईं, जिसे उन्होंने सीधे तौर पर सहकारी आंदोलन पर हमला बताया था।



















