महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में नक्सलवाद का प्रभाव अब काफी हद तक कम हो चुका है। सरकार की तरफ से साल 2005 में शुरू की गई सरेंडर नीति के परिणामस्वरूप कई खूंखार माओवादी पुलिस के सामने हथियार डाल चुके हैं। हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले इन लोगों के सफल पुनर्वास और उन्हें एक नई जिंदगी देने के लिए विशेष तौर पर प्रोजेक्ट संजीवनी का संचालन किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
आर्थिक मदद और भूमि आवंटन
प्रशासन की तरफ से केवल सुरक्षा अभियानों तक ही सीमित नहीं रहा जा रहा, बल्कि आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन स्तर को सुधारने पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है। इसी सिलसिले में 1 सितंबर 2026 को प्रोजेक्ट संजीवनी के अंतर्गत कुल 14 सरेंडर माओवादियों को आवास के लिए जमीन के प्लॉट वितरित किए गए। इसके अलावा नियमानुसार अन्य आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास पैकेज के तहत वित्तीय सहायता राशि के चेक भी सौंपे गए ताकि वे अपना गुजर-बसर ठीक से कर सकें।
सैकड़ों माओवादियों ने छोड़ी हिंसा
गढ़चिरौली पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे इलाके में अब तक कुल 819 माओवादी पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर चुके हैं। महाराष्ट्र सरकार की ओर से चलाई जा रही पुनर्वास योजना का मुख्य उद्देश्य इन सभी लोगों को सामान्य नागरिकों की तरह जीवन जीने का अवसर देना है। इसके तहत उन्हें रहने के लिए मकान, कृषि या आवासीय भूमि, रोजगार के अवसर और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं जैसी मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
लगातार बढ़ रहा है प्लॉट आवंटन का दायरा
जिला प्रशासन और गढ़चिरौली पुलिस के बीच बेहतरीन तालमेल के कारण पुनर्वास अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रशासन ने अब तक सरेंडर करने वाले माओवादी सदस्यों के लिए कुल 174 जमीन के प्लॉट स्वीकृत किए हैं। इनमें से 153 प्लॉट पहले ही लाभार्थियों को सौंपे जा चुके थे, और मंगलवार को 14 और लोगों को प्लॉट का आवंटन किया गया। इसके अलावा, कई पात्र सदस्यों को वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस भी प्रदान किए गए हैं ताकि वे आजीविका कमा सकें।
बच्चों के भविष्य पर खास ध्यान
पुनर्वास कार्यक्रमों के दौरान केवल पूर्व माओवादियों की ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों और बच्चों की जरूरतों का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। इस विशेष आयोजन के दौरान सरेंडर माओवादियों के बच्चों को स्कूल जाने के लिए साइकिलें और पठन-पाठन से जुड़ी सभी जरूरी अध्ययन सामग्री वितरित की गई।
मुख्यधारा में वापसी का संकल्प
स्थानीय पुलिस अधिकारियों और जिला प्रशासन का मानना है कि इस तरह की कल्याणकारी योजनाओं से भटके हुए लोगों को समाज की मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिलती है। इन पहलों का एकमात्र मकसद इन लोगों को एक सुरक्षित, भयमुक्त और सम्मानजनक जीवनशैली प्रदान करना है ताकि वे देश के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका निभा सकें।



















