दंडकारण्य के घने जंगलों में वर्षों तक हिंसा का दामन थामे रहने वाले माओवादियों ने अब मुख्यधारा की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में पिछले साल पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाले छत्तीसगढ़ के करीब 50 माओवादियों को उनके गृह नगर और गांवों के लिए रवाना कर दिया गया है। इस विदाई के पल बेहद भावुक थे, क्योंकि वर्षों तक एक साथ संघर्ष करने वाले साथी अब एक-दूसरे से विदा ले रहे थे।
समर्पण और मुख्यधारा में वापसी
पिछले साल माओवादी संगठन के वरिष्ठ नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ भूपति समेत लगभग 60 माओवादियों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने हथियार डाले थे। इस समूह में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर जैसे विभिन्न जिलों के कैडर शामिल थे। इन सभी ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जीने का संकल्प लिया था, जिसके बाद अब उन्हें उनके परिवारों के पास भेजा जा रहा है।
साथियों से बिछड़ने का दर्द
जब ये लोग अपने पैतृक गांवों के लिए रवाना हो रहे थे, तो वहां का माहौल काफी गमगीन और भावनाओं से भरा हुआ था। जंगलों की कठिन परिस्थितियों में वर्षों तक साथ रहने वाले साथी जब अलग हुए, तो उनकी आंखें नम हो गईं। गाड़ियों में बैठने से पहले सभी ने एक-दूसरे को गले लगाया और पुराने दिनों को याद किया। संगठन के वरिष्ठ नेता भूपति और विवेक भी इस विदाई के दौरान अपने आंसू नहीं रोक पाए। उनके साथ जंगल में रहने वाले कई अन्य साथी भी इस मौके पर काफी भावुक नजर आए।
प्रमुख नेताओं की विदाई
इस विदाई समारोह में कई जाने-माने कैडर शामिल थे जो अब सामान्य जिंदगी की ओर लौट रहे हैं। इनमें भूपति के मुख्य सहायक के रूप में वर्षों तक काम करने वाले टॉप लीडर शब्बीर भी शामिल थे, जो अपने साथियों से बिछड़ते वक्त बेहद भावुक दिखे। इसके अलावा दलम कमांडर जीतू, भूपति की व्यक्तिगत सुरक्षा में तैनात रहने वाली प्रगति और धरनी समेत कई अन्य प्रमुख साथी भी इस विदाई के दौरान नजर आए। कभी हाथों में हथियार लेकर चलने वाले ये लोग अब एक नई शुरुआत करने जा रहे हैं।
परिवार के बीच एक नई शुरुआत
हथियार छोड़ने के बाद इन सभी के सामने अपने जीवन को नए सिरे से संवारने का सुनहरा अवसर है। वर्षों बाद अपने परिवार के बीच रहने और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की उम्मीद इन लोगों के चेहरों पर साफ झलक रही थी। पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुई इस विदाई में एक तरफ पुराने साथियों से अलग होने का गम था, तो दूसरी तरफ अपने अपनों के पास लौटने की खुशी और एक नए भविष्य की उम्मीद भी थी।



















