महाराष्ट्र की नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से दो करोड़ छह लाख से ज्यादा मतदाताओं के बाहर होने का मामला सामने आने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस भारी कटौती को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर बेहद तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि इस तरह की प्रक्रिया के पीछे एक ही मकसद है और वह किसी भी कीमत पर चुनाव जीतना है।
वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर बदलाव और आंकड़े
मुख्य चुनाव अधिकारी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' यानी एसआईआर के बाद महाराष्ट्र के कुल पिछले वोटर बेस का इक्कीस दशमलव चौदह प्रतिशत हिस्सा यानी दो करोड़ छह लाख से अधिक मतदाता ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जगह नहीं बना पाए हैं। राज्य के चुनाव अधिकारियों के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्तमान ड्राफ्ट रोल में सात करोड़ इक्हत्तर लाख से ज्यादा वोटर शामिल हैं, जो पिछले वोटर लिस्ट का बहत्तर दशमलव छियासी प्रतिशत हिस्सा हैं।
इस लिस्ट में तीन करोड़ पिचासी लाख पुरुष, तीन करोड़ पचहत्तर लाख महिलाएं और तीन हजार सत्तासी थर्ड-जेंडर वोटर शामिल हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कुल दो करोड़ छह लाख बयासी हजार चार सौ सत्तासी लोगों के नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं किए जा सके क्योंकि उनके एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं हो पाए थे। इसके पीछे मुख्य वजह यह बताई गई कि या तो वे मतदाता अपने पते पर मिल नहीं रहे थे, या फिर उनकी मृत्यु हो चुकी थी या उन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया था।
राहुल गांधी के पुराने चुनावों और SIR पर गंभीर आरोप
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी व्यवस्थाएं अपनी रणनीति लगातार बदलती रहती हैं ताकि जनता के जनादेश को प्रभावित किया जा सके। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच अचानक सैंतीस लाख नए वोटर जुड़ गए थे, जिसे उन्होंने पहले भी वोटों की हेराफेरी करार दिया था।
अपने बयानों में उन्होंने पश्चिम बंगाल का भी जिक्र किया और दावा किया कि वहां एसआईआर के दौरान हटाए गए नामों में से इकानवे प्रतिशत को अपील के बाद वापस जोड़ना पड़ा था, जिससे साबित होता है कि बड़ी संख्या में नाम गलत तरीके से हटाए गए थे। अब महाराष्ट्र के संदर्भ में उन्होंने कहा कि हर पांचवां यानी दो करोड़ सात लाख मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 के नौ करोड़ उन्नतीस लाख, विधानसभा चुनाव 2024 के नौ करोड़ सत्तर लाख और एसआईआर के सात करोड़ अठत्तर लाख के आंकड़ों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि आखिर इनमें से कौन सी सूची सही थी।
क्षेत्रवार आंकड़े और आगे की प्रक्रिया
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा दिक्कतें बड़े शहरों और घनी आबादी वाले जिलों में देखने को मिली हैं। पुणे में सबसे ज्यादा अठ्ठाइस लाख साठ हजार एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं हो पाए, जिसके बाद ठाणे में अठ्ठाइस लाख पचास हजार, मुंबई उपनगर में छब्बीस लाख पचास हजार, नागपुर में चौदह लाख तैंतालीस हजार, नासिक में दस लाख सत्ताईस हजार और मुंबई शहर में साढ़े नौ लाख फॉर्म इकठ्ठा न होने की बात सामने आई है। इस अनकलेक्टेबल श्रेणी में वे लोग शामिल हैं जो अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले, दूसरी जगह बस गए, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जिनका दोहरा पंजीकरण था या जिन्होंने फॉर्म भरने से इनकार कर दिया था।
जिन योग्य मतदाताओं के नाम इस ड्राफ्ट सूची में नहीं आ पाए हैं, उनके पास अपना नाम जुड़वाने का मौका है। वे इकतीस अगस्त से तीस सितंबर के बीच अपनी दावा और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इसके तहत जरूरी घोषणा पत्र के साथ फॉर्म छह भरकर नाम शामिल कराया जा सकता है, फॉर्म सात के माध्यम से किसी भी आपत्ति को दर्ज किया जा सकता है और नाम, उम्र, पता या लिंग में सुधार के लिए फॉर्म आठ का इस्तेमाल किया जा सकता है। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर और उनके सहायक इकतीस अगस्त से उनतीस अक्टूबर के बीच इन सभी दावों और आपत्तियों पर कार्रवाई करेंगे, जिसके बाद चुनाव आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार चार नवंबर को फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी जाएगी।



















