अगर आप किसी आलीशान भोजनालय में अपना पसंदीदा व्यंजन मंगवाकर सुकून से बैठे हों और अचानक टेबल के पास से चूहों का झुंड गुजर जाए, तो आपका गुस्सा होना स्वाभाविक है। हालांकि, जब महाराष्ट्र एफडीए के प्रमुख और सख्त छवि वाले आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे का अमला एक होटल की जांच करने पहुंचा, तो वहां के प्रबंधक का जवाब बेहद अजीब था। रसोईघर के भीतर चूहे दौड़ते मिलने पर प्रबंधक ने गलती स्वीकार करने या माफी मांगने के बजाय पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि वे उनके पालतू जीव हैं। इस अनोखे बहाने का यह दिलचस्प वाकया खुद तुकाराम मुंडे ने साझा किया है और इससे जुड़ा वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है।
रसोईघर में चूहों का आतंक और प्रबंधक का अजीब तर्क
यह पूरा वाकया तब उजागर हुआ जब अपनी कर्तव्यनिष्ठा और कड़े रुख के लिए चर्चित आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे ने औचक निरीक्षण के दौरान सामने आए इस हैरान करने वाले अनुभव का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब उनकी टीम खाद्य सुरक्षा की जांच करने एक फूड आउटलेट पर गई, तो वहां चारों तरफ चूहे घूम रहे थे। जब अधिकारियों ने प्रबंधक को घेरकर पूछा कि रसोई के अंदर यह सब क्या हो रहा है, तो उसने बिना किसी झिझक के सफाई देते हुए कह दिया कि वे कोई गंदे कीट नहीं बल्कि वहां के पालतू चूहे हैं। प्रबंधक का ऐसा बेतुका उत्तर सुनकर वहां मौजूद निरीक्षक भी अचरज में पड़ गए।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और मीम्स की बाढ़
जैसे ही तुकाराम मुंडे का यह संस्मरण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सामने आया, उपयोगकर्ताओं ने प्रबंधक की जमकर आलोचना शुरू कर दी और इंटरनेट पर चुटीले संदेशों तथा मीम्स की बाढ़ आ गई। एक इंटरनेट यूजर ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे देश में पेट इंडस्ट्री को एक नया व्यापार मॉडल मिल गया है। दूसरे यूजर ने प्रसिद्ध एनिमेटेड फिल्म रतातूई का जिक्र करते हुए कटाक्ष किया कि उन्हें लगा जैसे किसी फिल्म की शूटिंग चल रही हो जहां कोई चूहा चुपचाप बावर्ची की सहायता कर रहा हो। वहीं एक अन्य जागरूक नागरिक ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि जानवर पालना अपनी जगह है, लेकिन वे मानव स्वास्थ्य के लिए संक्रमण का खतरा नहीं बनने चाहिए और यदि इस तरह की अस्वच्छता से कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ता है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी।
बाहरी खान-पान की स्वच्छता पर खड़े हुए बड़े सवाल
इस वायरल घटना ने देश के विभिन्न भोजनालयों और भोजनालयों में साफ-सफाई के गिरते स्तर की पोल खोलकर रख दी है। डिजिटल मंचों पर तमाम लोगों ने कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि बाहर भोजन करना अब एक बड़ा जोखिम बन गया है क्योंकि अधिकांश संस्थान सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों की लगातार अनदेखी कर रहे हैं। नागरिकों का मानना है कि देश को तुकाराम मुंडे जैसे निष्ठावान और सख्त अधिकारियों की सख्त आवश्यकता है जो ऐसे लापरवाह कारोबारियों पर कड़ी कार्रवाई कर सकें, अन्यथा लोग बाहर का भोजन करना पूरी तरह बंद करके केवल घर के बने खान-पान पर निर्भर होने के लिए विवश हो जाएंगे।





















