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चूहे देखकर भड़के IAS तुकाराम मुंडे, मैनेजर बोला- सर ये पालतू हैंमहाराष्ट्र
31 अग॰ 2026, 7:19 pm (1 घंटे पहले)· 3

चूहे देखकर भड़के IAS तुकाराम मुंडे, मैनेजर बोला- सर ये पालतू हैं

महाराष्ट्र एफडीए प्रमुख तुकाराम मुंडे ने एक रेस्तरां निरीक्षण का मजेदार और चौंकाने वाला किस्सा साझा किया है, जहां रसोई में चूहे मिलने पर मैनेजर ने उन्हें पालतू बता दिया था।

अगर आप किसी आलीशान भोजनालय में अपना पसंदीदा व्यंजन मंगवाकर सुकून से बैठे हों और अचानक टेबल के पास से चूहों का झुंड गुजर जाए, तो आपका गुस्सा होना स्वाभाविक है। हालांकि, जब महाराष्ट्र एफडीए के प्रमुख और सख्त छवि वाले आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे का अमला एक होटल की जांच करने पहुंचा, तो वहां के प्रबंधक का जवाब बेहद अजीब था। रसोईघर के भीतर चूहे दौड़ते मिलने पर प्रबंधक ने गलती स्वीकार करने या माफी मांगने के बजाय पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि वे उनके पालतू जीव हैं। इस अनोखे बहाने का यह दिलचस्प वाकया खुद तुकाराम मुंडे ने साझा किया है और इससे जुड़ा वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है।

रसोईघर में चूहों का आतंक और प्रबंधक का अजीब तर्क

यह पूरा वाकया तब उजागर हुआ जब अपनी कर्तव्यनिष्ठा और कड़े रुख के लिए चर्चित आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे ने औचक निरीक्षण के दौरान सामने आए इस हैरान करने वाले अनुभव का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब उनकी टीम खाद्य सुरक्षा की जांच करने एक फूड आउटलेट पर गई, तो वहां चारों तरफ चूहे घूम रहे थे। जब अधिकारियों ने प्रबंधक को घेरकर पूछा कि रसोई के अंदर यह सब क्या हो रहा है, तो उसने बिना किसी झिझक के सफाई देते हुए कह दिया कि वे कोई गंदे कीट नहीं बल्कि वहां के पालतू चूहे हैं। प्रबंधक का ऐसा बेतुका उत्तर सुनकर वहां मौजूद निरीक्षक भी अचरज में पड़ गए।

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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और मीम्स की बाढ़

जैसे ही तुकाराम मुंडे का यह संस्मरण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सामने आया, उपयोगकर्ताओं ने प्रबंधक की जमकर आलोचना शुरू कर दी और इंटरनेट पर चुटीले संदेशों तथा मीम्स की बाढ़ आ गई। एक इंटरनेट यूजर ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे देश में पेट इंडस्ट्री को एक नया व्यापार मॉडल मिल गया है। दूसरे यूजर ने प्रसिद्ध एनिमेटेड फिल्म रतातूई का जिक्र करते हुए कटाक्ष किया कि उन्हें लगा जैसे किसी फिल्म की शूटिंग चल रही हो जहां कोई चूहा चुपचाप बावर्ची की सहायता कर रहा हो। वहीं एक अन्य जागरूक नागरिक ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि जानवर पालना अपनी जगह है, लेकिन वे मानव स्वास्थ्य के लिए संक्रमण का खतरा नहीं बनने चाहिए और यदि इस तरह की अस्वच्छता से कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ता है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी।

बाहरी खान-पान की स्वच्छता पर खड़े हुए बड़े सवाल

इस वायरल घटना ने देश के विभिन्न भोजनालयों और भोजनालयों में साफ-सफाई के गिरते स्तर की पोल खोलकर रख दी है। डिजिटल मंचों पर तमाम लोगों ने कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि बाहर भोजन करना अब एक बड़ा जोखिम बन गया है क्योंकि अधिकांश संस्थान सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों की लगातार अनदेखी कर रहे हैं। नागरिकों का मानना है कि देश को तुकाराम मुंडे जैसे निष्ठावान और सख्त अधिकारियों की सख्त आवश्यकता है जो ऐसे लापरवाह कारोबारियों पर कड़ी कार्रवाई कर सकें, अन्यथा लोग बाहर का भोजन करना पूरी तरह बंद करके केवल घर के बने खान-पान पर निर्भर होने के लिए विवश हो जाएंगे।

सवाल-जवाब

यह किस्सा किसने साझा किया है?
यह किस्सा महाराष्ट्र एफडीए प्रमुख और आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे ने साझा किया है।
रेस्तरां के मैनेजर ने चूहों के बारे में क्या कहा?
मैनेजर ने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा कि वे रेस्तरां के पालतू जानवर हैं।
यह मामला किस से जुड़ा हुआ है?
यह मामला रेस्तरां की रसोई में साफ-सफाई की कमी और चूहों के मिलने से जुड़ा है।
सोशल मीडिया पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?
सोशल मीडिया पर लोगों ने मीम्स शेयर किए और रेस्तरां के गिरते हाइजीन मानकों पर गुस्सा जाहिर किया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·48 मिनट पहले

तुकाराम मुंडे की यह कार्रवाई दिखाती है कि खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के मामले में प्रशासनिक सख्ती कितनी जरूरी है। जब तक नियमों का उल्लंघन करने वाले रेस्तरां संचालकों पर भारी आर्थिक दंड और लाइसेंस रद्द करने जैसी कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे हास्यास्पद बहाने और अस्वच्छता का यह खेल बंद नहीं होगा। जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आपराधिक लापरवाही के तहत मुकदमे दर्ज होने चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·48 मिनट पहले

करन मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह समझना होगा कि ऐसी प्रशासनिक औचक कार्रवाई सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि देश के हर राज्य में खाद्य सुरक्षा तंत्र को सक्रिय करने की आवश्यकता है। जब तक खाद्य नियामक विभाग नियमित और पारदर्शी निरीक्षण नहीं करेंगे, तब तक व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्वच्छता मानकों को ताक पर रखते रहेंगे। ऐसे मामलों में केवल चेतावनी देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाले संचालकों पर त्वरित और अनुकरणीय दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए ताकि बाजार में एक कड़ा संदेश जाए।

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