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आईआईटी बॉम्बे छात्र मौत मामले में राज ठाकरे ने उठाए सवाल, अकादमिक तनाव और जातिगत विभाजन पर जताई चिंतामहाराष्ट्र
23 सित॰ 2026, 1:32 pm (4 घंटे पहले)· 0

आईआईटी बॉम्बे छात्र मौत मामले में राज ठाकरे ने उठाए सवाल, अकादमिक तनाव और जातिगत विभाजन पर जताई चिंता

आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे के निधन पर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने गहरा शोक जताते हुए प्रशासनिक जल्दबाजी, पढ़ाई के दबाव और परिसरों में बढ़ते जातिगत माहौल पर सवाल उठाए हैं।

आईआईटी बॉम्बे के बीस वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे के दुखद निधन के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों पर बढ़ते मानसिक दबाव और उच्च शिक्षा के परिसरों में घर करती जातिगत राजनीति को इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के लिए कटघरे में खड़ा किया। ठाकरे का मानना है कि इस पूरे प्रकरण का केंद्र बिंदु यह होना चाहिए था कि आखिर किन गंभीर परिस्थितियों ने एक होनहार नौजवान को ऐसा आत्मघाती कदम उठाने पर विवश किया, मगर चर्चा का रुख मुख्य मुद्दे से भटक गया है।

जांच से पहले दोष मढ़ने की प्रवृत्ति पर ऐतराज

राज ठाकरे ने इस बात पर कड़ा एतराज जताया कि संस्थान के तंत्र ने पूरी छानबीन होने से पहले ही छात्र पर इम्तिहान के दौरान मोबाइल फोन और चैटजीपीटी जैसी तकनीक का अनुचित इस्तेमाल करने का ठीकरा फोड़ दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा कक्ष में किसी भी प्रकार की अनियमितता या कदाचार को रोकना यकीनन प्राध्यापकों की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि निष्पक्ष जांच पूरी होने से पहले किसी विद्यार्थी को दोषी मान लेना जितना गलत है, उतना ही अनुचित जातीय भेदभाव का आरोप लगते ही बिना पड़ताल प्रोफेसरों को मुजरिम ठहरा देना भी है। दोनों ही पहलू प्रशासनिक और सामाजिक संतुलन के लिहाज से ठीक नहीं हैं।

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उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ता तनाव और जातिगत दरार

मनसे नेता ने कहा कि वर्ष 2000 के उपरांत महाराष्ट्र के सामाजिक ताने-बाने में जाति आधारित दूरियां चिंताजनक रूप से बढ़ी हैं। उनका कहना था कि यह विभाजनकारी सोच अब उन शीर्ष तकनीकी संस्थानों के भीतर भी पैर पसार चुकी है, जिन्हें पंडित नेहरू ने आधुनिक भारत के मंदिर की संज्ञा दी थी। ठाकरे ने उल्लेख किया कि केवल तकनीकी परिसरों तक ही यह संकट सीमित नहीं है, बल्कि प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं की अंधी दौड़, पाठ्यक्रमों का असहनीय बोझ और नौकरी पाने की अंधी होड़ ने समूची युवा पीढ़ी को अवसाद की कगार पर धकेल दिया है।

विद्यार्थियों से एकजुट रहने की अपील और जरूरी सुधार

राज ठाकरे ने विद्यार्थियों से किसी भी प्रकार की भटकाने वाली जातिगत या धार्मिक राजनीति के जाल से दूर रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को आपसी मतभेदों में उलझने के बजाय समूची शिक्षा प्रणाली की ढांचागत कमजोरियों और विसंगतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों का खुला समर्थन किया, जिनमें संस्थान में चौबीसों घंटे मनोरोग विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, शिकायतों के निपटारे के लिए पारदर्शी व्यवस्था तैयार करना और अनुशासन से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतना शामिल है। ठाकरे ने कहा कि शिक्षण व्यवस्था में ठोस सुधार लाना ही दिवंगत साहिल के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस मामले की पृष्ठभूमि में संस्थान स्तर पर प्रशासनिक कदम भी उठाए गए हैं, जिसके तहत प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को अवकाश पर भेजा जा चुका है और पूरे घटनाक्रम की गहन छानबीन के लिए दस सदस्यों की एक विशेष समिति गठित की गई है।

सवाल-जवाब

आईआईटी बॉम्बे में किस छात्र की दुखद मृत्यु हुई?
आईआईटी बॉम्बे के 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की मृत्यु हुई।
राज ठाकरे ने इस मामले में किसे मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया?
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था के भारी तनाव, प्रशासनिक जल्दबाजी और परिसरों में बढ़ती जातिगत राजनीति को जिम्मेदार बताया।
प्रशासनिक स्तर पर कौन से कदम उठाए गए हैं?
प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को अवकाश पर भेजा गया है और 10 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है।
राज ठाकरे ने छात्रों की किन प्रमुख मांगों का समर्थन किया?
उन्होंने 24 घंटे मनोचिकित्सक की उपलब्धता, पारदर्शी शिकायत प्रणाली और संवेदनशील अनुशासनात्मक नियमों की मांग का समर्थन किया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·2 घंटे पहले

परिसरों में जान गंवाने की खबरें झकझोर देती हैं। पढ़ाई का तनाव और जातिगत राजनीति मिलकर युवाओं को तोड़ रहे हैं, इस पर तुरंत बात होनी चाहिए।

Ravikash Gupta@ravikash·3 घंटे पहले

परिसरों में इतना दबाव आखिर कब तक रहेगा? क्या आईआईटी जैसे संस्थानों में पढ़ाई के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर कभी खुलकर काम होगा?

Vikram Yadav@vikram-yadav·3 घंटे पहले

रविकाश भाई, सही कहा आपने। कोटा से लेकर आईआईटी तक यही हाल है, पढ़ाई के तनाव पर रोक लगनी ही चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 घंटे पहले

साहिल की मौत पर राज ठाकरे ने सही सवाल उठाए हैं कि बिना जांच के किसी को दोषी ठहराना गलत है। पर क्या आईआईटी प्रशासन इन काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी मांगों को सच में लागू करेगा या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

Rohan Verma@rohan-verma·3 घंटे पहले

करण, बात तो सही है आपकी, पर मुझे लगता है कि राजनीतिज्ञों के कूदने से असली मुद्दा पीछे छूट जाता है और बस बयानबाजी ही बचती है।

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