महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में अनधिकृत निर्माण और निर्धारित सीमा से अधिक ऊंची बनाई गई झुग्गियों पर नागरिक निकाय बड़े स्तर पर कानूनी डंडा चलाने की तैयारी में है। बृहन्मुंबई महानगर पालिका यानी बीएमसी ने नियमों का उल्लंघन कर खड़ी की गईं चौदह फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों को हटाने के लिए एक समर्पित समय सीमा तय कर दी है। नगर निगम के प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एक अक्टूबर से इकतीस दिसंबर तक समूचे शहर में अवैध ढांचों को ध्वस्त करने का विशेष अभियान छेड़ा जाएगा, जिसमें तय ऊंचाई का दायरा लांघने वाली झोपड़ियों पर सीधी बुलडोजर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
शहर में उनतालीस हजार से अधिक झुग्गियां तय सीमा से ऊंची
नागरिक निकाय द्वारा जुटाए गए आधिकारिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक, आर्थिक राजधानी में कुल झुग्गियों की तादाद करीब दो लाख तेईस हजार एक सौ पचास दर्ज है। इन बस्तियों के गहन आकलन में यह तथ्य सामने आया है कि उनतालीस हजार एक सौ ग्यारह झोपड़ियों का निर्माण चौदह फीट की मान्य सीमा को पार करके किया गया है। क्षेत्रीय विभाजन पर गौर करें तो सबसे गंभीर स्थिति पूर्वी उपनगरों में नजर आती है। पूर्वी उपनगर में इकतीस हजार दो सौ सत्ताईस अवैध ऊंची संरचनाएं चिन्हित की गई हैं। इसके अतिरिक्त पश्चिमी उपनगर क्षेत्र में चार हजार पांच सौ छत्तीस और दक्षिण मुंबई यानी मुंबई सिटी क्षेत्र में तीन हजार तीन सौ तैंतालीस ऐसी झोपड़ियां पाई गई हैं जिन्होंने स्थापित नियमों को ताक पर रख दिया है।
प्रशासन का कड़ा संदेश और तय समय सीमा
अवैध निर्माणों को लेकर निगम तंत्र पहले से ही सक्रिय रहा है। अब तक चार हजार पांच सौ चौरासी झुग्गियों के खिलाफ ध्वस्तीकरण या संशोधन की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है, जबकि छह सौ ग्यारह अवैध निर्माणकर्ताओं को विधिवत नोटिस भेजे जा चुके हैं। निगम अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में रेखांकित किया है कि निर्धारित समय सीमा यानी एक अक्टूबर की तारीख पार होते ही किसी भी स्तर पर कोई अतिरिक्त मोहलत नहीं दी जाएगी और सीधे ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
विपक्ष का कड़ा विरोध और मिलीभगत के आरोप
नागरिक प्रशासन के इस सख्त रुख के सामने आते ही सियासी स्तर पर तीखा विरोध भड़क उठा है। समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने इस बड़े ध्वस्तीकरण अभियान पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाते हुए पूछा कि जब ये मकान चौदह फीट से अधिक ऊंचाई पर धीरे-धीरे ताने जा रहे थे, तब नगर निगम और संबंधित सरकारी अधिकारी क्या कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि निचले स्तर के कर्मचारियों और अधिकारियों की प्रत्यक्ष या परोक्ष मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी संख्या में बहुमंजिला अवैध निर्माण खड़ा होना कतई मुमकिन नहीं था।
मानवीय आधार पर मुख्यमंत्री से अभियान रोकने की गुहार
सपा नेता अबू आजमी ने मानवीय पहलुओं का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री से इस अभियान को तत्काल स्थगित करने की अपील की है। उनका तर्क है कि झुग्गियों की ऊपरी मंजिलों में हजारों बेसहारा बुजुर्ग और छोटे बच्चे अपने परिवारों के साथ रह रहे हैं, और अचानक घरों को तोड़ देने से उनके जीवन पर सीधा संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने मांग रखी है कि प्रशासन को कोई भी विध्वंसक कार्रवाई करने से पहले इन सभी प्रभावित परिवारों को झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण यानी एसआरए अथवा सरकार की अन्य किसी वैकल्पिक आवास योजना के तहत पक्के आशियाने मुहैया कराने चाहिए, जिसके बाद ही कोई जमीनी कदम उठाया जाए।
बांद्रा ईस्ट में पूर्व में हुई रेलवे की बड़ी कार्रवाई
मुंबई में अतिक्रमण के खिलाफ यह पहला बड़ा कदम नहीं है। इससे पूर्व मई के महीने में पश्चिम रेलवे प्रशासन ने भी जमीन खाली कराने के लिए बड़ा बुलडोजर अभियान चलाया था। रेलवे की जमीन के विस्तार और सार्वजनिक पुनर्विकास परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से बांद्रा ईस्ट स्थित गरीब नगर इलाके में बड़े पैमाने पर अनधिकृत बस्तियों को हटाया गया था। उस दौरान बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायिक निर्देशों के तहत लगभग पांच सौ अवैध ढांचों को जमींदोज किया गया था ताकि लंबे समय से अटकी पड़ी सार्वजनिक उपयोग की जमीन को सुरक्षित वापस लिया जा सके।





















