भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में पुलिस की पड़ताल लगातार आगे बढ़ रही है। इस घटना की तहकीकात कर रही मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने संस्थान के कई अन्य विद्यार्थियों से पूछताछ की है और उनके आधिकारिक बयान कलमबद्ध किए हैं। जांच अधिकारियों ने विशेष रूप से परीक्षा कक्ष में उपस्थित रहे सहपाठियों और साहिल के करीबी मित्रों से बातचीत करके उस समय के हालात को समझने का प्रयास किया है। साहिल के परिजनों ने इस दुखद कदम के लिए संस्थान के प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है और प्रोफेसर को अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया गया है।
जांच के बीच चर्चा का केंद्र बना जुलाई 2024 का संदेश
इस पूरे घटनाक्रम और कानूनी कार्रवाई के बीच प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला द्वारा पूर्व में विद्यार्थियों को भेजा गया एक आधिकारिक ईमेल सार्वजनिक चर्चा में आ गया है। यह संवाद 27 जुलाई 2024 की तारीख का है, जब प्रोफेसर दुल्ला संस्थान में डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के प्रशासनिक पद पर सेवाएं दे रहे थे। उस समय उन्होंने पूरे छात्र समुदाय को संबोधित करते हुए एक विस्तृत परामर्श जारी किया था। इस संदेश का मुख्य उद्देश्य संस्थान के भीतर किसी भी प्रकार के सामाजिक या व्यक्तिगत स्तर पर होने वाले अनुचित व्यवहार पर रोक लगाना था।
जाति, प्रवेश श्रेणी और परीक्षा रैंक पूछने पर लगाई थी रोक
उस ईमेल में प्रोफेसर दुल्ला ने विद्यार्थियों को सख्त परामर्श दिया था कि वे अपने किसी भी सहपाठी से उसकी जाति, जन्म स्थान, दाखिले की श्रेणी, जेईई एडवांस्ड की रैंक या गेट परीक्षा के अंकों के बारे में अनावश्यक पूछताछ न करें। प्रोफेसर का कहना था कि कई बार छात्र केवल साधारण उत्सुकता या बातचीत शुरू करने के इरादे से ऐसे सवाल पूछ लेते हैं, लेकिन यह जिज्ञासा अनजाने में ही साथी विद्यार्थी के प्रति पूर्वाग्रह, हीन भावना या भेदभावपूर्ण वातावरण को जन्म दे देती है। इसलिए संस्थान की अकादमिक व्यवस्था में इस तरह के व्यक्तिगत प्रश्नों से पूरी तरह बचना आवश्यक बताया गया था।
संवेदनशील विषयों और डिजिटल सामग्री को लेकर दी थी चेतावनी
प्रोफेसर ने परिसर के भीतर आपसी बातचीत में गरिमा और संवेदनशीलता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया था। उन्होंने छात्रों को स्पष्ट रूप से सचेत किया था कि धर्म, लिंग, सामाजिक पहचान अथवा किसी व्यक्ति के लैंगिक रुझान को लेकर अनुचित टिप्पणियां बिल्कुल न की जाएं। इसके अलावा, विद्यार्थियों को जातिवादी, सांप्रदायिक, महिला विरोधी या किसी की सेक्शुअल ओरिएंटेशन का मजाक उड़ाने वाले संदेश, चुटकुले या अन्य आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री को साझा या आगे भेजने से पूरी तरह दूर रहने का निर्देश दिया गया था। ईमेल में यह भी साफ किया गया था कि ऐसी गतिविधियां शैक्षणिक माहौल को विषाक्त बनाती हैं और ऐसा करने वालों के खिलाफ संस्थान कड़ा अनुशासनात्मक कदम उठा सकता है।
मौजूदा आरोपों के बीच ईमेल के मायने
यह पुराना पत्राचार ऐसे दौर में फिर से सामने आया है जब प्रोफेसर दुल्ला स्वयं छात्र के माता-पिता की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों और आपराधिक जांच का सामना कर रहे हैं। उस दौर में डीन के रूप में उनका भेजा गया यह पत्र दर्शाता है कि संस्थान के स्तर पर जातिगत और सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के लिए औपचारिक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, जबकि वर्तमान में उन पर लगे आरोपों की सच्चाई जानने के लिए पुलिस साक्ष्य और गवाहों के बयानों का विश्लेषण कर रही है।





















