महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गणेशोत्सव को लेकर तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। शहर के सबसे समृद्ध और प्रतिष्ठित गणेश पंडालों में शामिल जीएसबी सेवा मंडल ने इस वर्ष सुरक्षा और प्रबंधन के मोर्चे पर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मंडल प्रशासन ने 10 दिवसीय गणेशोत्सव के आयोजन के लिए 703.27 करोड़ रुपये का व्यापक बीमा कवर हासिल किया है। इस विशाल बीमा सुरक्षा का प्राथमिक उद्देश्य उत्सव स्थल पर जुटने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, मंडल की विविध भौतिक संपत्तियों की रक्षा और आयोजकों की प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरी तरह सुरक्षित रखना है।
करोड़ों के स्वर्णाभूषण और महागणपति का अलौकिक श्रृंगार
जीएसबी सेवा मंडल के महागणपति अपनी अद्भुत भव्यता और अनमोल अलंकृत स्वरूप के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध हैं। इस साल भी प्रतिमा का अलौकिक श्रृंगार भक्तों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा। मंडल के आधिकारिक विवरण के अनुसार, महागणपति की प्रतिमा को 66 किलो से अधिक शुद्ध सोने के आभूषणों और 335 किलो से अधिक चांदी की वस्तुएँ अर्पित कर सजाया जाता है। इसके अतिरिक्त कई मूल्यवान रत्नों से युक्त हार और मुकुट भी प्रतिमा की शोभा बढ़ाते हैं। यह सभी आभूषण और बहुमूल्य सामग्रियाँ समय-समय पर श्रद्धालुओं द्वारा अपनी मन्नत पूरी होने पर श्रद्धापूर्वक दान की गई हैं। इतनी विशाल मात्रा में मौजूद कीमती धातुओं और रत्नों की सुरक्षा के लिए ही सुरक्षा व्यवस्था और बीमा कवर को इतना मजबूत बनाया गया है।
पेपरलेस प्रणाली और पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव
इस वर्ष जीएसबी सेवा मंडल ने अपने आयोजन को अधिक व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से कई आधुनिक कदम उठाए हैं। मंडल ने पारंपरिक कागजी रसीदों और प्रिंटेड पर्चियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। पूजा-अर्चना और दान से जुड़ी पूरी रसीद प्रक्रिया को अब पूरी तरह से डिजिटल रूप दे दिया गया है। इस डिजिटल व्यवस्था से कागज की भारी खपत को रोका जा सकेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा। इसके अलावा, महागणपति की प्रतिमा भी पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल मिट्ठी और सामग्रियों से तैयार की गई है। मंडल ने इस उत्सव के लिए 'गो ग्रीन' की थीम को आधिकारिक रूप से अपनाया है, जिससे अन्य आयोजनों के सामने भी एक सकारात्मक मिसाल कायम हो सके।
वैदिक परंपराएँ, महापूजा और अन्नदान की विशाल सेवा
गणेशोत्सव के दौरान जीएसबी सेवा मंडल में धार्मिक विधियों और वैदिक अनुष्ठानों का विशेष पालन किया जाता है। शास्त्रों में वर्णित शुद्ध परंपराओं के तहत यहाँ प्रतिदिन पूजा, अर्चना, तुलाभार, गणहोम और विशेष हवन आयोजित किए जाते हैं। उत्सव के दिनों में औसतन 1 लाख से अधिक छोटी-बड़ी पूजा और धार्मिक सेवाएँ श्रद्धालुओं तथा सेवेदारों द्वारा अर्पित की जाती हैं। इसके साथ ही मंडल द्वारा संचालित अन्नदान सेवा का दायरा भी अत्यंत व्यापक है। यहाँ प्रतिदिन 40 हजार से अधिक लोग प्रसाद भोजन ग्रहण करते हैं। 5 दिनों के मुख्य उत्सव चक्र के दौरान कुल मिलाकर 2 लाख से अधिक भक्त इस अन्नदान सेवा का लाभ उठाते हैं। यह महाप्रसाद पूरी तरह से पारंपरिक तरीके से केले के पत्तों पर परोसा जाता है, जो भारतीय संस्कृति और सात्विकता का अद्भुत प्रतीक है।





















