हजरत निजामुद्दीन-मैसूर एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12782) के एसी कोच A-1 में अपनी बर्थ पर दीया जलाकर धार्मिक अनुष्ठान करने वाले 55 वर्षीय यात्री के खिलाफ मध्य रेलवे ने कड़ी कानूनी कार्रवाई की है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर निवासी गरीब नामक इस यात्री को ट्रेन में आग लगने का गंभीर खतरा पैदा करने के आरोप में महाराष्ट्र के भुसावल रेलवे स्टेशन पर चलती ट्रेन से नीचे उतार दिया गया। मध्य रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि यात्री के पास से पूजा सामग्री और ज्वलनशील वस्तुएं बरामद की गई हैं तथा उसके खिलाफ रेलवे अधिनियम 1989 की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला पंजीकृत किया गया है।
भुसावल स्टेशन पर हुई कार्रवाई और घटना का विवरण
यह पूरा वाकया 31 अगस्त का है, जब ट्रेन संख्या 12782 हजरत निजामुद्दीन-मैसूर एक्सप्रेस अपनी निर्धारित यात्रा पर थी। सफर के दौरान कोच A-1 की बर्थ संख्या 17 पर सवार यात्री गरीब ने अपनी बर्थ पर ही पीतल का दीपक जलाकर पूजा-पाठ शुरू कर दिया। डिब्बे में खुले तौर पर आग की लौ जलती देख अन्य सहयात्रियों में डर का माहौल बन गया। इसकी सूचना तुरंत ट्रेन में तैनात रेल कर्मचारियों को दी गई। सूचना मिलते ही ऑन-ड्यूटी टिकट चेकिंग स्टाफ (टीटीई) तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया।
मौके पर पहुंचे टीटीई ने देखा कि यात्री अपनी बर्थ पर पीतल का दीया जलाकर बैठा हुआ था। रेल कर्मचारी ने यात्री को तत्काल लौ बुझाने की हिदायत दी और समझाया कि चलती ट्रेन में इस प्रकार आग जलाना बेहद खतरनाक है, जिससे पूरा कोच जल सकता है और सैकड़ों यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती है। हालांकि, यात्री ने टीटीई की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए कहा कि वह पूजा पूरी करने के बाद ही दीया बुझाएगा। इस दौरान टीटीई ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जो मामले में अहम साक्ष्य बना। ट्रेन के भुसावल स्टेशन पहुंचने पर रेलवे सुरक्षा बल और अधिकारियों ने यात्री को सामान समेत नीचे उतार लिया। जांच के दौरान उसके कब्जे से एक माचिस, एक पीतल का दीपक और एक स्टील का डिब्बा बरामद किया गया।
रेलवे अधिनियम की धारा 153 और 145(बी) के तहत एफआईआर दर्ज
मध्य रेलवे के प्रवक्ता ने बताया कि मंगलवार को आरोपी यात्री के खिलाफ रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 153 और धारा 145(बी) के तहत औपचारिक केस दर्ज किया गया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी यात्री को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(सी) के प्रावधानों के तहत एक औपचारिक कानूनी नोटिस देकर रिहा कर दिया।
रेलवे के कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, रेलवे अधिनियम की धारा 153 बेहद सख्त कानून है, जो उन कृत्यों से संबंधित है जिनसे रेल यात्रियों की सुरक्षा को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खतरा पहुंचता है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को 5 साल तक के सश्रम कारावास की सजा हो सकती है। वहीं, धारा 145(बी) ट्रेन या रेलवे परिसर में ज्वलनशील अथवा खतरनाक पदार्थ ले जाने, उनका दुरुपयोग करने और उपद्रव फैलाने से जुड़ी है। इस धारा के उल्लंघन पर यात्री को रेलवे परिसर से तुरंत निष्कासित करने, 5000 रुपये तक का जुर्माना लगाने और गंभीर परिस्थितियों में 5 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।
ज्वलनशील पदार्थों को लेकर मध्य रेलवे की सख्त चेतावनी
इस घटना के बाद मध्य रेलवे प्रशासन ने सभी रेल यात्रियों से एक विशेष अपील जारी की है। रेलवे ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ट्रेन के डिब्बों में किसी भी प्रकार का ज्वलनशील पदार्थ ले जाना, मोमबत्ती, अगरबत्ती, कपूर या दीपक जलाना कानूनन अपराध है और यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। डिब्बे में कपड़ों, फोम की सीटों और लकड़ी के पैनलों की मौजूदगी के कारण आग तेजी से फैल सकती है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है। रेलवे ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी इस प्रकार का उल्लंघन करने वाले यात्रियों के खिलाफ बिना किसी ढील के सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


















