महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जालसाजों ने कंपनी के प्रबंध निदेशक का झूठा रूप धरकर एक वरिष्ठ अधिकारी को लगभग दो करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। यह पूरी वारदात व्हाट्सएप पर हुई, जिसे तकनीकी बोलचाल में बॉस स्कैम कहा जाता है। ठगों ने कंपनी के डायरेक्टर की तस्वीर और पहचान का गलत इस्तेमाल करके जनरल मैनेजर स्तर के कर्मचारी से 1.98 करोड़ रुपये किसी अंजान खाते में ट्रांसफर करवा लिए। हालांकि मामला प्रकाश में आते ही मुंबई पुलिस की त्वरित साइबर टीम ने तुरंत कदम उठाया और चोरी हुए पैसों का एक बड़ा हिस्सा सुरक्षित करने में सफलता पाई।
व्हाट्सएप पर ऐसे रचा गया जालसाजी का खेल
यह घटना 6 अगस्त 2026 की है, जब पीड़ित जनरल मैनेजर के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप मैसेज प्राप्त हुआ। इस नए नंबर के प्रोफाइल पर कंपनी के डायरेक्टर की ही तस्वीर लगी हुई थी और प्रदर्शित नाम भी उनका ही दर्ज था। मैसेज भेजने वाले ने खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए किसी अति-आवश्यक भुगतान का हवाला दिया। जनरल मैनेजर को लगा कि संदेश सीधे कंपनी के शीर्ष अधिकारी की ओर से आया है और मामला बेहद जरूरी है। बिना किसी हिचकिचाहट के कर्मचारी ने मैसेज में बताए गए बैंक खाते में 1.98 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि तुरंत ट्रांसफर कर दी।
सच्चाई आते ही पुलिस तक पहुंचा मामला
लेनदेन प्रक्रिया पूरी करने के कुछ समय बाद, जब जनरल मैनेजर ने भुगतान की पुष्टि के लिए कंपनी के डायरेक्टर के असली और पंजीकृत मोबाइल नंबर पर फोन किया, तब फर्जीवाड़े की असलियत सामने आई। डायरेक्टर ने किसी भी तरह का मैसेज भेजने या भुगतान का निर्देश देने से साफ इनकार कर दिया। इसके तुरंत बाद पीड़ित ने बिना समय गंवाए मुंबई पुलिस की साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क साधा। इसके साथ ही दक्षिण विभाग के साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।
साइबर पुलिस ने रिकवर किए 92 फीसदी पैसे
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की विशेष टीम ने ट्रांसफर किए गए फंड का डिजिटल ट्रेल ट्रैक करना शुरू किया। बैंक और वित्तीय मध्यस्थों के साथ तेजी से तालमेल बिठाते हुए अधिकारियों ने संदिग्ध खातों को ब्लॉक करा दिया। इस तत्परता का नतीजा यह रहा कि पुलिस ठगी गई कुल रकम में से 1,83,03,492 रुपये फ्रीज कराने में कामयाब रही। इसका अर्थ है कि पूरी ठगी की राशि का करीब 92 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित बचा लिया गया। पुलिस की इस तत्पर कार्रवाई ने पीड़ित कंपनी को बहुत बड़े आर्थिक नुकसान से बचा लिया।
अधिकारियों ने जारी की एडवाइजरी
मुंबई पुलिस ने आम नागरिकों और कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुलिस ने कहा कि व्हाट्सएप, टेलीग्राम या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम या प्रोफाइल फोटो से पैसे ट्रांसफर करने का मैसेज आता है, तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। जब भी किसी नए या अपरिचित नंबर से तत्काल फंड ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाए, तो आधिकारिक और पुराने संपर्क नंबर पर बात करके पुष्टि अवश्य करें। यदि दुर्भाग्यवश कोई धोखाधड़ी हो जाती है, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि शुरुआती घंटों में पैसों को ब्लॉक किया जा सके।



















