भारतीय वित्तीय बाजार में बैंकिंग प्रणाली की तरलता में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे भारतीय रुपये को अल्पकालिक तीव्र गिरावट के दबाव से राहत मिली है। हाल के दिनों में स्वैप विंडो के माध्यम से बड़े पैमाने पर हुए पूंजी प्रवाह के बाद बैंकिंग प्रणाली का अधिशेष 10 ट्रिलियन रुपये के स्तर को लांघ गया है। यह आंकड़ा वर्ष 2022 और महामारी के दौरान बने उच्चतम स्तरों से भी अधिक है। इसके साथ ही टिकाऊ नकदी का संतुलन बढ़कर 14 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया है, जिसने ओवरनाइट कॉल दरों को नीचे बनाए रखा है। जून के उत्तरार्ध में औसतन 1 ट्रिलियन रुपये के अधिशेष की तुलना में यह एक बहुत बड़ा उछाल माना जा रहा है।
भारतीय रुपये की स्थिति और मुद्रास्फीति की चुनौतियां
विदेशी मुद्रा प्रवाह से केंद्रीय मौद्रिक प्राधिकरणों को अतिरिक्त क्षमता हासिल हुई है, जिससे निकट भविष्य में रुपये में एकतरफा बड़ी गिरावट की संभावना काफी कम हो गई है। हालांकि, व्यापक आर्थिक मोर्चे पर मुद्रास्फीति का दबाव बना हुआ है। अगस्त महीने के मुद्रास्फीति आंकड़े 4.8% से 4.9% तक तेज होने का अनुमान है, जो पिछले महीने 4.4% पर थे। खाद्य पदार्थों की कीमतों में व्यापक बढ़ोतरी के साथ-साथ बहुमूल्य धातुओं के दामों में तेजी ने कोर इन्फ्लेशन को ऊपर धकेलने का काम किया है।
वीआरआरआर नीलामी और बॉन्ड यील्ड पर प्रभाव
हाल ही में आयोजित 30-दिवसीय वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) में बाजार सहभागियों की कम रुचि यह दर्शाती है कि निवेशक नीतिगत दरों में संभावित बढ़ोतरी से पहले अपने धन को लंबी अवधि के लिए ब्लॉक करने से बच रहे हैं। यदि मौजूदा दर वृद्धि की उम्मीदें बनी रहती हैं, तो अक्टूबर की समीक्षा बैठक से पहले लंबी अवधि के VRRR उपकरण कम प्रभावी रह सकते हैं। ऐसी स्थिति में यदि अधिशेष तरलता को वापस खींचने के लिए कड़े उपाय लागू किए जाते हैं, तो बॉन्ड यील्ड पर ऊपर की ओर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है। प्रचुर नकदी के कारण दर समायोजन को रोकना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान 0.7200 के स्तर से ऊपर बना हुआ है, जो 14 मई के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। अमेरिकी डॉलर पर बने दबाव और जापानी येन की मजबूती ने फेडरल रिजर्व की ओर से सख्त रुख की उम्मीदों को बेअसर कर दिया है। इसके अतिरिक्त, ऑस्ट्रेलिया के रिजर्व बैंक (RBA) द्वारा दरें बढ़ाने की संभावनाओं से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला है, हालांकि चीन के मिश्रित व्यापार आंकड़ों ने इसकी बढ़त को एक सीमित दायरे में रखा है।
दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी छह महीने के निचले स्तर 152.89 से उबरकर यूरोपीय सत्र में 154.00 के स्तर का पुनरपरीक्षण कर रही है। जापान में वेतन वृद्धि के सकारात्मक आंकड़े और दूसरी तिमाही के जीडीपी संशोधनों ने बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा अगले सप्ताह दरें बढ़ाने की उम्मीदों को मजबूत किया है। इससे जापानी येन को लगातार मजबूती मिल रही है और अमेरिकी डॉलर की बिकवाली जारी है।
सोना और कच्चे तेल के बाजार का परिदृश्य
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतें यूरोपीय सत्र से पहले अपने दैनिक दायरे के निचले स्तर पर आ गई हैं, हालांकि यह 4,400 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर टिकने में सफल रहा है। फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती की आशंकाओं और जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर को सहारा मिल रहा है, जिससे बिना ब्याज वाले सोने की तेजी पर लगाम लगी है।
तेल बाजार के संदर्भ में, डीजल की कीमतों से महत्वपूर्ण संकेत मिल रहे हैं। अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और डब्ल्यूटीआई (WTI) के बीच का अंतर यानी अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड हाल ही में इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। इसने इंट्राडे कारोबार में 102.00 डॉलर प्रति बैरल का सर्वकालिक नया रिकॉर्ड बनाया है, जो रिफाइनिंग मार्जिन में भारी बदलाव को दर्शाता है।



















