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महाराष्ट्र के गडचिरोली में सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत, NHRC ने राज्यों को वेनम भंडार बढ़ाने के दिए निर्देशमहाराष्ट्र
8 सित॰ 2026, 10:03 am (50 मिनट पहले)· 2

महाराष्ट्र के गडचिरोली में सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत, NHRC ने राज्यों को वेनम भंडार बढ़ाने के दिए निर्देश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गडचिरोली और चित्रकूट में सांप के काटने से हुई मौतों के बाद राज्यों को संवेदनशील इलाकों में एंटी-स्नेक वेनम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और आदिवासी छात्रावासों की सुरक्षा समीक्षा करने का निर्देश दिया है।

सांप के काटने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC ने अब देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने अलग-अलग राज्यों से जुड़े दो मामलों पर खुद संज्ञान लेते हुए कहा है कि दूरदराज और सांप काटने की घटनाओं वाले इलाकों में एंटी-स्नेक वेनम यानी ASV की पर्याप्त उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए, ताकि पीड़ितों को समय रहते जानलेवा हालात से बचाया जा सके।

राज्यों को क्या करने के लिए कहा गया

सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली NHRC की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे अपने यहां सांप काटने के लिहाज से संवेदनशील इलाकों को पहले चिन्हित करें। इसके साथ ही ऐसी घटनाओं से जुड़ा पूरा आंकड़ा जुटाने और उन क्षेत्रों में स्वास्थ्य तथा आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे किसी भी पीड़ित को अस्पताल तक पहुंचने में देरी न हो।

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आदिवासी छात्रावासों की सुरक्षा पर भी सवाल

जंगलों और दूरदराज इलाकों में चलने वाली आश्रम शालाओं तथा आदिवासी व अन्य आवासीय छात्रावासों को लेकर भी आयोग ने गंभीर चिंता जताई है। NHRC ने कहा है कि इन छात्रावासों के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाए। इसमें पर्याप्त बेड या खाट का इंतजाम, वार्डन और अन्य कर्मचारियों की पर्याप्त मौजूदगी, छात्र-छात्राओं के लिए सुरक्षित सोने की व्यवस्था, परिसर की सुरक्षा और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता मिलना शामिल है।

गडचिरोली में तीन छात्राओं की जान गई

NHRC के सामने आए दो मामलों में से पहला महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले से जुड़ा है। यहां एक आदिवासी आवासीय स्कूल के छात्रावास में सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद छात्रावास में मौजूद बुनियादी सुविधाओं और वहां की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हुए थे, जिसके बाद आयोग ने इस मामले पर खुद संज्ञान लिया।

चित्रकूट में समय पर नहीं मिला वेनम

दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले से जुड़ा है। आरोप है कि यहां सांप के काटने के शिकार हुए एक व्यक्ति को इलाज के दौरान समय पर एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध नहीं हो सका, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। दोनों ही मामलों में NHRC ने संबंधित अधिकारियों से तय समय सीमा के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है, ताकि यह साफ हो सके कि जमीनी स्तर पर अब तक क्या सुधार किए गए हैं।

सवाल-जवाब

NHRC ने किन दो मामलों पर संज्ञान लिया?
गडचिरोली, महाराष्ट्र में तीन आदिवासी छात्राओं की सांप काटने से मौत और चित्रकूट, उत्तर प्रदेश में एक व्यक्ति की एंटी-स्नेक वेनम न मिलने से मौत के मामलों पर।
आयोग ने राज्यों को मुख्य रूप से क्या निर्देश दिया?
सांप काटने के लिहाज से संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां एंटी-स्नेक वेनम और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा है।
गडचिरोली में क्या हुआ था?
एक आदिवासी आवासीय स्कूल के छात्रावास में सांप के काटने से तीन छात्राओं की मौत हो गई थी।
चित्रकूट के मामले में क्या आरोप है?
आरोप है कि पीड़ित को इलाज के दौरान समय पर एंटी-स्नेक वेनम नहीं मिल सका, जिससे उसकी मौत हो गई।
NHRC की पीठ की अध्यक्षता किसने की?
सदस्य प्रियंक कानूनगो ने।
छात्रावासों के लिए क्या अतिरिक्त निर्देश दिए गए?
पर्याप्त बेड या खाट, वार्डन-स्टाफ की मौजूदगी, सुरक्षित सोने की व्यवस्था और आपात चिकित्सा मदद सुनिश्चित करने को कहा गया।
आयोग ने अधिकारियों से आगे क्या मांगा है?
दोनों मामलों में तय समय सीमा के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·17 मिनट पहले

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का यह कदम प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर बुनियादी ढांचे पर एक कड़ा प्रहार है। महाराष्ट्र के गडचिरोली और उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जैसे दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में आदिवासी छात्रावासों तथा स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली केवल एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। जब तक संवेदनशील क्षेत्रों में एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता और अस्पताल तक एम्बुलेंस की त्वरित पहुंच सुनिश्चित नहीं होती, तब तक ऐसी दुखद मौतें रुकना असंभव है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 मिनट पहले

यह कानूनी और प्रशासनिक जवाबदेही का मामला है। मानवाधिकार आयोग के स्वतः संज्ञान लेने और एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगने से यह तय हो गया है कि अब संबंधित विभागों को केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। यदि तय समय सीमा में आदिवासी छात्रावासों की सुरक्षा और स्वास्थ्य केंद्रों में वेनम की आपूर्ति नहीं सुधारी गई, तो यह सीधे तौर पर मानवाधिकार हनन का गंभीर मामला बनेगा और लापरवाह अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई तय मानी जाएगी।

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