वैश्विक विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में हालिया आंकड़ों के बाद काफी हलचल देखने को मिल रही है। हंगरी में अगस्त महीने के मुद्रास्फीति आंकड़े जारी होने के बाद हंगेरियन फ़ोरिंट (HUF) की विनिमय दरों में नया रुझान देखा गया है, जबकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और डीजल की कीमतों में तेजी का असर विनिमय दरों पर साफ दिखाई दे रहा है। इसके अलावा एशियाई और यूरोपीय कारोबारी सत्रों के दौरान अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना हुआ है, जिससे जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती मिल रही है।
हंगरी में मुद्रास्फीति में मामूली बढ़ोतरी, केंद्रीय बैंक की बैठक पर टिकी नजरें
हंगरी में अगस्त महीने के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 1.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। हालांकि यह जुलाई के 1.2 प्रतिशत के आंकड़े से थोड़ा अधिक है, जो पिछले लगभग 10 वर्षों का सबसे निचला स्तर था, फिर भी यह आंकड़ा बाजार के अनुमानों से काफी नीचे रहा है। नेशनल बैंक ऑफ हंगरी (NBH) ने अगस्त के लिए 1.8 प्रतिशत मुद्रास्फीति का अनुमान जताया था। इस तरह केंद्रीय बैंक का अनुमान 0.5 प्रतिशत अंक से चूक गया, जबकि जुलाई में यह अंतर 0.7 प्रतिशत अंक का था।
विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष की शेष अवधि के दौरान हंगरी में मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के निर्धारित लक्ष्य से नीचे ही बनी रहेगी। केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि मौद्रिक नीति में किसी भी बड़े बदलाव या ब्याज दरों में कटौती को रोकने के फैसले के लिए सितंबर में होने वाली बैठक और उसमें पेश होने वाले नए आर्थिक पूर्वानुमानों का इंतजार करना होगा। बाजार की उम्मीदें इस बात पर केंद्रित हैं कि क्या बैंक ब्याज दरों में कटौती पर रोक लगाएगा और यूरो अपनाने की दिशा में मुद्रास्फीति के निचले लक्ष्यों को बनाए रखेगा।
यूरो और हंगेरियन फ़ोरिंट की चाल पर ऊर्जा कीमतों का प्रभाव
हाल के दिनों में हंगेरियन फ़ोरिंट में मजबूती दर्ज की गई है और यील्ड कर्व में तेज गिरावट आई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि अगस्त के नए मुद्रास्फीति आंकड़े इस मजबूती के रुझान को उलटने की संभावना नहीं रखते हैं। यूरो-क्षेत्र के स्प्रेड में और संकुचन देखने को मिल सकता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उछाल फ़ोरिंट की आगे की बढ़त को सीमित कर सकता है।
EUR/HUF विनिमय दर गिरकर 364 के स्तर से नीचे आ गई है। हालांकि, यदि प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहता है, तो EUR/HUF दर एक बार फिर 364 के स्तर से ऊपर जा सकती है। ऐसा हंगेरियन फ़ोरिंट के हालिया उच्च-बीटा (हाई-बीटा) व्यवहार के कारण हो सकता है, जहां यह वैश्विक कमोडिटी कीमतों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।
एशिया-प्रशांत बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन की स्थिति
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7200 के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है, जो 14 मई के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। जापानी येन में आई तेजी के कारण अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना हुआ है, जिसने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से सख्त रुख बनाए रखने की उम्मीदों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों से मिलने वाले समर्थन को बेअसर कर दिया है। इसके साथ ही, इस महीने के अंत में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को बल मिला है। हालांकि, चीन के मिश्रित व्यापार संतुलन आंकड़ों के कारण AUD/USD की बढ़त एक सीमित दायरे में सिमट गई है।
दूसरी ओर, USD/JPY जोड़ी अपने छह महीने के निचले स्तर 152.89 से उबरने की कोशिश कर रही है और यूरोपीय कारोबारी सत्र में 154.00 के स्तर को फिर से परख रही है। फिर भी, जापान के सकारात्मक वेतन वृद्धि आंकड़ों और दूसरी तिमाही के जीडीपी (GDP) संशोधन ने बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा अगले सप्ताह ब्याज दरों में वृद्धि की संभावनाओं को मजबूत कर दिया है। इससे जापानी येन को लगातार समर्थन मिल रहा है और अमेरिकी डॉलर में बिकवाली का दौर जारी है।
सोने की कीमतें और अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड में ऐतिहासिक उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें यूरोपीय सत्र की शुरुआत में अपने दैनिक दायरे के निचले स्तर पर आ गईं, हालांकि यह $4,400 प्रति औंस के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी सोने को सहारा दे रही है, लेकिन फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर को भी मांग मिल रही है, जिससे बिना ब्याज वाली संपत्ति सोने की बढ़त सीमित है।
वहीं, ऊर्जा बाजार में डीजल के दामों ने नया रिकॉर्ड बनाया है। अमेरिकी अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल के बीच का अंतर, जिसे यूएस डीजल क्रैक स्प्रेड कहा जाता है, इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इंट्राडे कारोबार के दौरान यह प्रीमियम बढ़कर $102.00 प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर को छू गया, जो शोधन क्षमता और वैश्विक ईंधन आपूर्ति पर बढ़ते दबाव का स्पष्ट संकेत है।



















