जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायतों के निपटारे के तहत की गई बर्खास्तगी की कार्रवाई के बाद इनर मणिपुर से कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजाम की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इस पूरे प्रकरण को लेकर सांसद से लोकसभा की सदस्यता से तुरंत त्यागपत्र देने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद सांसद सार्वजनिक प्रतिनिधि के पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं।
संसद की गरिमा और जनता के भरोसे पर मुख्यमंत्री का रुख
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने पूर्व जेएनयू प्रोफेसर की सेवा समाप्ति को बेहद परेशान करने वाला और शर्मनाक करार दिया। उनका मानना है कि एक निर्वाचित सांसद पर संसद की गरिमा को बनाए रखने और जनता के विश्वास की रक्षा करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जेएनयू की आंतरिक समिति ने शिकायतों की जांच पूरी कर बड़े दंड की सिफारिश की थी, जिसके परिणामस्वरूप अकोइजाम को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। उन्होंने मणिपुर के लोगों की भावनाओं का हवाला देते हुए मांग की कि अकोइजाम को पद पर बने रहने के बजाय तत्काल अपना पद छोड़ देना चाहिए।
गंभीर शिकायतों के बाद तत्काल प्रभाव से कार्रवाई
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिकायतों की औपचारिक जांच पूरी होने के उपरांत 9 अक्टूबर को बिमोल अकोइजाम की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी थीं। इस मामले में 11 छात्राओं ने उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं, जिसके आधार पर आंतरिक समिति ने अनुशासनात्मक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया था।
प्रक्रियागत उल्लंघन के आरोप और कानूनी चुनौती की तैयारी
दूसरी तरफ, बिमोल अकोइजाम ने विश्वविद्यालय की पूरी जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं और इसे लेकर अपना विरोध दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि इस निर्णय में प्रक्रियागत नियमों का उल्लंघन हुआ है और इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप शामिल रहा है।
अकोइजाम का पक्ष है कि बर्खास्तगी की सूचना मिलने से पहले उन्हें आंतरिक समिति की जांच रिपोर्ट और निष्कर्ष उपलब्ध नहीं कराए गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे विश्वविद्यालय के इस फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे और इसके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।





















