मणिपुर के सेनापति जिले में शुक्रवार को सैकड़ों स्थानीय नागरिकों ने पारंपरिक परिधानों में एकत्रित होकर एक व्यापक विरोध मार्च निकाला। यह प्रदर्शन 26 सितंबर को कैलेनजांग में हुई उस हिंसक गोलीबारी की घटना के विरोध में आयोजित किया गया था, जिसमें तीन निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी और एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि जब तक इस खूनी वारदात के दोषियों को न्याय के कठघरे में नहीं लाया जाता, तब तक उनका आंदोलन थमेगा नहीं।
विशाल जनसभा और विभिन्न संगठनों की एकजुटता
इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन नगा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (एनपीओ) द्वारा किया गया, जिसे कई प्रमुख नागरिक समाज संगठनों, जनजातीय निकायों, महिला संगठनों, छात्र संघों और स्थानीय चर्चों का व्यापक समर्थन हासिल हुआ। रैली सेनापति ट्रैफिक पॉइंट से प्रारंभ हुई और रिखुमई ताफौ स्थित फॉरेस्ट गेट की ओर आगे बढ़ी। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारी वापस अपने प्रारंभिक स्थल पर पहुंचे, जहां एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया।
गांधी जयंती के उपलक्ष्य में सरकारी कार्यालयों में अवकाश होने के कारण एनपीओ के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के आधिकारिक आवास पर जाकर उन्हें नौ सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। यह ज्ञापन केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे राज्यपाल, उपमुख्यमंत्री, गृह मंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और सेनापति के पुलिस अधीक्षक को भी औपचारिक रूप से प्रेषित किया गया है। संगठन ने राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर उनकी मांगों पर लिखित प्रतिक्रिया नहीं दी गई, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
उच्चस्तरीय एसआईटी जाँच और समयसीमा तय करने की मांग
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग एक उच्चस्तरीय विशेष जाँच दल (एसआईटी) के तत्काल गठन की है, जिसका नेतृत्व कम से कम पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए। संगठन ने स्पष्ट रूप से यह शर्त रखी है कि इस पूरी जाँच प्रक्रिया को 30 दिनों के भीतर पूरा किया जाए और अदालत में 45 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल किया जाए। इसके अतिरिक्त, घटना की जाँच की प्रगति को लेकर 15 दिनों के भीतर पीड़ित परिवारों और एनपीओ के साथ एक अंतरिम स्थिति रिपोर्ट साझा करने की बात भी कही गई है।
मुआवजा और आश्रितों के लिए कल्याणकारी कदम
आर्थिक और मानवीय सहायता के संदर्भ में, ज्ञापन में मांग की गई है कि प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को कम से कम 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि तत्काल दी जाए। गोलीबारी में घायल हुए एकमात्र जीवित व्यक्ति, अदनी मानियो, के लिए पूर्ण चिकित्सा उपचार और व्यापक वित्तीय सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया गया है। इसके साथ ही, मृतकों के अंतिम संस्कार और पारंपरिक रीति-रिवाजों को पूरा करने हेतु सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।
एनपीओ ने यह भी मांग रखी कि पीड़ित परिवारों के पात्र सदस्यों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी रोजगार प्रदान किया जाए। इसके अलावा, मृतकों पर आश्रित बच्चों की निरंतर शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष शैक्षिक सहायता पैकेज की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि उनके भविष्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने की पुरजोर अपील
सुरक्षा के मोर्चे पर, नगा समुदाय के प्रतिनिधियों ने सेनापति और कांगपोकपी सीमा के संवेदनशील हिस्सों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, सघन गश्त और क्षेत्र में प्रभावी नियंत्रण की मांग की है। ज्ञापन में विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया है कि नागरिक बस्तियों के आसपास सक्रिय सशस्त्र गिरोहों और कैडरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि आम लोगों का जीवन सुरक्षित रह सके।
जनसभा के दौरान पीड़ित परिवारों के एक प्रतिनिधि ने अपनी बात रखते हुए 26 सितंबर की दोपहर हुई घटना को पूर्व-नियोजित और बर्बर हमला बताया। उन्होंने इस बात पर गहरा ऐतराज जताया कि घटना को दो समूहों के बीच संघर्ष का रूप दिया जा रहा है। प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि पीड़ित सामान्य नागरिक थे, जिन पर उस समय घात लगाकर हमला किया गया जब वे अपनी दैनिक गतिविधियों में व्यस्त थे। इस सभा में सेनापति जिला छात्र संघ (एसडीएसए) और नगा वीमेंस यूनियन के पदाधिकारियों ने भी निष्पक्ष और समयबद्ध जाँच की मांग दोहराते हुए कहा कि न्याय मिलने तक शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा।





















