मणिपुर के निर्वाचन तंत्र ने यह सुनिश्चित करने के लिए एक राज्यव्यापी अभियान शुरू किया है कि कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूचियों से बाहर न रहे, जैसा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने सोमवार को एक बयान में उल्लेख किया। यह अभियान अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर चलाया जा रहा है।
राज्य के सभी जिलों में विशेष शिविर
राज्य के सभी 16 जिला निर्वाचन अधिकारियों ने इस अभियान की शुरुआत कर दी है, जिसके तहत मणिपुर के सभी 3,041 मतदान केंद्रों पर विशेष कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। जिन नागरिकों को सूची में नाम जुड़वाने या हटाने से जुड़ी कोई भी शिकायत है, वे अपने बूथ-लेवल अधिकारियों, 84 सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों, 60 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों या फिर 16 जिला निर्वाचन अधिकारियों से सीधे संपर्क कर सकते हैं।
विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद उठाया गया कदम
यह पूरा अभियान मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद शुरू किया गया है, जिसके पश्चात चुनाव आयोग ने 6 सितंबर को मणिपुर की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया था। वर्तमान में संशोधित सूचियों के अनुसार राज्य के 60 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 19.60 लाख से अधिक मतदाता दर्ज हैं। इस हालिया पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान 1.89 लाख नाम हटाए गए थे और 56,871 नए मतदाताओं को जोड़ा गया था, हालांकि जारी किए गए बयान में नाम हटाए जाने के कारणों का कोई जिक्र नहीं किया गया है।
महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक
मुख्य निर्वाचन अधिकारी अरुण कुमार सिन्हा ने इससे पहले जानकारी दी थी कि कुल मतदाताओं में 9,53,350 पुरुष, 10,06,962 महिलाएं और 308 थर्ड-जेंडर के मतदाता शामिल हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य के कुल मतदाता आधार में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। इन विशेष कैंपों का मुख्य उद्देश्य उन सभी लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान का अवसर देना है जिनके मन में सूची को लेकर कोई भी संशय है, ताकि वे चुनावों से पहले अपने नाम की पुष्टि कर सकें।





















