मणिपुर के कांगपोकपी जिले में एक ग्रामीण की नृशंस हत्या और उसके बाद वायरल हुए विचलित करने वाले वीडियो ने पूरे इलाके में तनाव बढ़ा दिया है। इस अमानवीय घटना के विरोध में नागा नागरिक समाज संगठन ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को दो दिन की मोहलत दी है। संगठन का साफ कहना है कि जब तक पीड़ित का कटा हुआ सिर परिजनों को नहीं सौंपा जाता, तब तक किसी भी सूरत में शव का पोस्टमॉर्टम नहीं होने दिया जाएगा।
माकुई अशांग गांव में हुआ था हमला
शनिवार को माकुई अशांग गांव पर संदिग्ध चरमपंथियों द्वारा किए गए घातक हमले में 52 वर्षीय अजिनबोउ आर की जान चली गई थी। हमलावरों ने न केवल उनकी हत्या की, बल्कि उनके शरीर को भी क्षत-विक्षत कर दिया। घटना के अगले दिन रविवार की रात पीड़ित का धड़ पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया के लिए इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज पहुंचाया गया। इसी बीच शनिवार को सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसमें छद्म वेशभूषा और भारी हथियारों से लैस उग्रवादी अजिनबोउ का कटा हुआ सिर पकड़े दिखाई दे रहे थे।
जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल की दो टूक चेतावनी
इस खौफनाक वारदात के सामने आने के बाद जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल मणिपुर ने रविवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर तीव्र आक्रोश प्रकट किया। काउंसिल ने स्पष्ट किया कि पीड़ित के अवशेषों के साथ ऐसी दरिंदगी किसी भी मानवीय मर्यादा के खिलाफ है। संगठन ने दो टूक शब्दों में कहा, “अजिनबोउ आर का सिर अब भी गायब है, जब तक सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए सिर परिवार को नहीं सौंपा जाता, पोस्टमॉर्टम नहीं होगा।” काउंसिल ने यह भी रेखांकित किया कि वे सुरक्षा एजेंसियों को अधूरे शव की चीरफाड़ नहीं करने देंगे, जबकि हथियारबंद गिरोह कटे हुए सिर को अपनी विजय की निशानी की तरह प्रदर्शित कर रहे हैं।
कानून-व्यवस्था पर सवाल और न्याय की मांग
नागरिक संगठन ने राज्य में दोबारा भड़की इस हिंसा के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को मानवता पर गहरा आघात बताया। संगठन ने अधिकारियों के समक्ष बिना किसी शर्त के 48 घंटे का अल्टीमेटम रखते हुए कहा कि प्रशासन जल्द से जल्द लापता अंग बरामद कर परिजनों के सुपुर्द करे। इसके साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि तय समयसीमा में मांग पूरी नहीं हुई तो इंसाफ सुनिश्चित करने के लिए सबसे कठोर कदम उठाए जाएंगे।
ताजा हिंसक टकराव की पृष्ठभूमि
यह अल्टीमेटम ऐसे समय में आया है जब राज्य के पहाड़ी इलाकों में अशांति की नई लहर देखने को मिल रही है। पिछले सप्ताह कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी जिलों में अलग-अलग स्थानों पर हुई गोलीबारी में कम से कम नौ लोगों की मौत दर्ज की गई थी। इस नए टकराव की शुरुआत शुक्रवार की रात उस समय हुई जब अज्ञात बंदूकधारियों ने कामजोंग जिले के चासाद गांव में पांच बच्चों की 22 वर्षीय मां की गोली मारकर जान ले ली। चासाद गांव नागा-बहुल जिले के भीतर कुकी आबादी वाला इलाका है। इस वारदात के तुरंत बाद कुकी और नागा सशस्त्र समूहों के बीच भारी गोलीबारी शुरू हो गई, जो शनिवार सुबह तक निरंतर चलती रही।
शांति बहाली के प्रयास और जातीय संघर्ष का इतिहास
लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने हालिया मौतों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने संबंधित प्रशासनिक व सुरक्षा अधिकारियों को स्थिति पर तत्काल काबू पाने, कानून का राज बहाल करने और आम नागरिकों की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। क्षेत्र में तनाव की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस साल फरवरी के बाद से अब तक कुकी और नागा समुदायों के आपसी संघर्ष में 50 से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं तथा दर्जनों मकान जलाकर राख कर दिए गए हैं। इससे पूर्व मणिपुर इंफाल घाटी के मैतेई समुदाय और आसपास के पहाड़ी जिलों के कुकी समुदाय के बीच व्यापक जातीय हिंसा की आग में झुलस चुका है, जिसमें 300 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, 49 लोग लापता हो गए थे और हजारों लोगों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा था।
























