जैसलमेर के लाठी कस्बे में करीब पांच किलोमीटर तक स्वागत रैली चली, क्योंकि रुपाराम भील महाराष्ट्र के लातूर में छह माह का केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) प्रशिक्षण पूरा कर वर्दी में पहली बार अपने पैतृक गांव लौटे थे. बस स्टैंड पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जुटे और ढोल-नगाड़ों, डीजे की धुन, फूलों तथा मालाओं से उनका स्वागत किया.
रुपाराम के परिवार और गांव में उनके सीआरपीएफ चयन के बाद से उत्साह था. धर्माराम भील, जो लाठी में किसान हैं, रुपाराम के पिता हैं. रुपाराम ने लातूर, महाराष्ट्र में छह माह का प्रशिक्षण पूरा किया और बस से पैतृक गांव लौटे. उनकी वापसी की खबर मिलते ही बस स्टैंड पर स्वागत की तैयारियां तेज हो गईं. परिवार के लिए यह मौका खास था, क्योंकि प्रशिक्षण के बाद वह पहली बार वर्दी में गांव में दाखिल हुए.
बस स्टैंड पर सम्मान की शुरुआत
बस स्टैंड पर उनका स्वागत नगाड़ों और ढोल की ताल, डीजे की धुन, फूलों तथा मालाओं के बीच हुआ. ग्रामीणों ने उन्हें हार्दिक अभिनंदन दिया और सीआरपीएफ में चयन तथा प्रशिक्षण पूरा होने की खुशी साझा की. यह क्षण परिवार और स्थानीय लोगों दोनों के लिए उल्लास का हिस्सा था.
कार रैली ने गांव में जश्न लंबा किया
स्वागत के बाद ग्रामीणों ने रुपाराम को एक कार में बिठाया और ढोल-नगाड़ों तथा डीजे की धुनों के साथ करीब पांच किलोमीटर की रैली निकाली. इसमें ग्रामीणों की भारी संख्या ने हिस्सा लिया. वर्दी में सजे रुपाराम ने वाहन पर खड़े होकर मौजूद लोगों को अभिवादन किया. रास्ते भर फूल उछाले गए और मालाएं पहनाई गईं. रैली उनके आवास तक पहुंची तो वहां भी उनका हार्दिक स्वागत हुआ और उपलब्धि पर खुशी जताई गई.
मेहनत को मिला सामुदायिक सम्मान
स्थानीय स्तर पर रुपाराम की सफलता को मेहनत और लगन का परिणाम माना गया. सीआरपीएफ में चयन से उनके परिवार के साथ पूरे गांव का गौरव बढ़ा है. क्षेत्र के युवाओं के लिए यह उपलब्धि प्रेरणादायी मानी जा रही है. परिस्थितियां कठिन होने के बावजूद लक्ष्य तक पहुंचने की उनकी लगन दूसरे युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी.
समारोह में उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई और देश सेवा के नए सफर पर उन्हें बधाई दी गई.
रैली में जगदीश टावरी और सामाजिक कार्यकर्ता सलमान खां शामिल रहे. बलवंतसिंह, नंदकिशोर पावरी, सुंदरलाल दर्जी, शिवरतन पंवार तथा जमालदीन भी वहां मौजूद थे. साबीर खां, शैतानाराम, गेपरराम भील, हजारीराम, केशराराम और खुमाराम ने भी स्वागत में हिस्सा लिया. शिवराज, आशाराम, टीकूराम भील, सुगनाराम माली, हरुराम भील, कानाराम भील, किरताराम और फतरुराम सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे.

















